ट्विशा शर्मा सुसाइड केस: लापरवाही के लिए एसआई पर 5 हजार रुपए का जुर्माना
समझें क्या है पूरा मामला
- ट्विशा शर्मा संदिग्ध मौत मामले को एक महीना पूरा हुआ।
- कटारा हिल्स थाने के सब-इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा पर 5,000 रुपए जुर्माना।
- दिल्ली एम्स से दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद जांच तेज हुई।
- पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह रिमांड पर लिए जा सकते हैं।
- एक महीना बीतने के बाद भी मौत का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया।
SI की लापरवाही क्या थी?
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार के निर्देश पर मिसरोद संभाग के एसीपी डॉ. रजनीश कश्यप ने प्राथमिक जांच कराई। जांच में एसआई दिनेश शर्मा दोषी पाए गए।
नियम के अनुसार पोस्टमार्टम के दौरान ही सभी साक्ष्य एकत्र कर सुरक्षित करने होते हैं। लेकिन एसआई ने लिगेचर यानी फंदे की सामग्री जमा करने में दो दिन की देरी की।
इस चूक के बाद मृतका के परिजनों ने पुलिस कार्यालय में हंगामा किया था। एसीपी की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस उपायुक्त विकास शाहवाल ने कमिश्नर की सहमति से 5,000 रुपये का अर्थदंड लगाया।
AIIMS रिपोर्ट से जांच को मिली नई दिशा
मामला सीबीआई को सौंपे जाने के बाद दिल्ली एम्स से दूसरी पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिल चुकी है। इस रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई के फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम पूरी तरह सक्रिय हो गई है।
केंद्रीय एजेंसी अब एम्स की रिपोर्ट के मुख्य बिंदुओं का मिलान कर रही है ताकि नए सिरे से पूछताछ के बिंदु तैयार किए जा सकें। नए गवाहों से पूछताछ और संबंधित दस्तावेजों की दोबारा जांच की भी तैयारी है।
पूर्व जज और बेटे की फिर रिमांड संभव
वर्तमान में जेल में बंद मुख्य आरोपित पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह को सीबीआई एक बार फिर रिमांड पर ले सकती है। एम्स रिपोर्ट के नए बिंदुओं के आधार पर इन दोनों से गहन पूछताछ की जाएगी।
दोनों आरोपित न्यायिक आदेश के बाद से जेल में हैं। सीबीआई उनसे पहले भी पूछताछ कर चुकी है और अब नए साक्ष्यों के साथ फिर से यह प्रक्रिया शुरू होने वाली है।
एक महीने में क्या-क्या हुआ?
12 मई को ट्विशा शर्मा का शव भोपाल के उनके घर में फंदे से लटका मिला था। परिजनों ने शुरू से ही मौत को संदिग्ध बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की। 13 से 17 मई के बीच पहला पोस्टमार्टम हुआ और परिजनों ने सीएम हाउस तथा कमिश्नर कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
18 से 20 मई के बीच पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत खारिज हुई और लुकआउट नोटिस जारी किया गया।
22 से 24 मई के बीच हाईकोर्ट जबलपुर के निर्देश पर दोबारा पोस्टमार्टम हुआ और समर्थ सिंह को गिरफ्तार कर सात दिन की रिमांड पर लिया गया।
25 से 28 मई के बीच सीबीआई ने पूर्व जज गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह के खिलाफ एफआईआर (FIR – First Information Report) दर्ज की। हाईकोर्ट से जमानत निरस्त होने के बाद गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार किया गया।
1 और 2 जून को सीबीआई ने घटनास्थल का सीन रीक्रिएशन किया। तब से दोनों आरोपित न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
एक महीना बाद भी जांच अधूरी
सीबीआई जांच के एक महीने बाद भी ट्विशा शर्मा की मौत का कारण आधिकारिक तौर पर स्पष्ट नहीं हो पाया है। जांच का काम जारी है और परिजन न्याय का इंतजार कर रहे हैं।
थानेदार छुट्टी पर, सवाल कायम
प्रॉपर्टी सीजर में लापरवाही और बेल्ट जब्ती को लेकर विवाद में घिरा थानेदार अचानक छुट्टी पर चला गया है। उसने बीमार होने का आवेदन दिया है। इससे मामले में और सवाल खड़े हो गए हैं।
जेल में गिरिबाला: किताब से समय बिता रहीं
भोपाल सेंट्रल जेल में बंद पूर्व जज गिरिबाला सिंह के पास जब मध्यप्रदेश महिला आयोग की टीम अचानक पहुंची, तब वे लेखक देवदत्त पटनायक की किताब पढ़ रही थीं। इस किताब का नाम द प्रेग्नेंट किंग है।
वहीं महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा यादव ने औचक निरीक्षण के बाद बताया कि पूर्व जज को जेल प्रशासन की तरफ से कोई खास सुविधा या तरजीह नहीं दी जा रही है। इससे वीआईपी ट्रीटमेंट की अटकलों पर विराम लग गया है।
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