UHQ कोटे पर एक बेटा हुआ सेना में भर्ती तो दूसरे को नहीं दिया लाभ, हाईकोर्ट ने तोड़ी गलतफहमी
News in short
- परिवार के दूसरे बेटे को भी मिलेगा UHQ कोटे का लाभ।
- बोनस अंक का फायदा सिर्फ एक बेटे को ही मिलेगा।
- सेना की हलफनामे की शर्त को किया खारिज।
- अग्निवीर नहीं, ‘रेगुलर सोल्जर’ के रूप में होगी नियुक्ति।
- अभ्यर्थी को पुराने बैच के अनुसार सीनियरिटी देने का आदेश।
News in detail
जबलपुर हाईकोर्ट ने सेना भर्ती से जुड़े अहम मामले में बड़ा फैसला सुनाया। इस फैसले से वह गलतफहमी दूर हो गई, जिसके अनुसार पिता की सर्विस के कोटे का लाभ सिर्फ एक बेटे को मिल सकता था। यह मामला नीलेश पाठक नाम के अभ्यर्थी का था, जिनके पिता सेना से रिटायर्ड हवलदार हैं। नीलेश ने 2015 में सेना भर्ती परीक्षा पास की थी और मेरिट में तीसरे स्थान पर आए थे, लेकिन फिर भी उन्हें भर्ती नहीं मिल सकी।
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सेना की शर्त बनी सबसे बड़ी बाधा
नीलेश की भर्ती इसलिए अटक गई क्योंकि सेना ने उनके पिता से एक हलफनामा मांगा था। इसमें यह लिखना था कि परिवार का कोई दूसरा बेटा UHQ (Unit Headquarters) कोटे से भर्ती नहीं हुआ है। जबकि नीलेश का बड़ा भाई पहले से ही इसी कोटे से सेना में था, ऐसे में यह शपथ पत्र देना संभव नहीं था।
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बोनस अंक एक को
मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस विवेक जैन की बेंच में हुई। कोर्ट ने कहा कि यह नियमों की गलत व्याख्या थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि UHQ कोटे से एक ही परिवार के दो बेटों की भर्ती पर कोई रोक नहीं है। रोक केवल बोनस अंकों पर है। दूसरा बेटा भर्ती हो सकता है, लेकिन उसे अतिरिक्त अंक नहीं मिलेंगे।
अग्निवीर नहीं, नियमित सैनिक के तौर पर हो भर्ती
सुनवाई के दौरान सेना ने दलील दी कि अग्निपथ योजना लागू हो चुकी है। सेना ने कहा कि नीलेश को ‘अग्निवीर’ के रूप में शामिल किया जा सकता है। कोर्ट ने इसे खारिज किया और कहा कि नीलेश ने पहले परीक्षा पास की थी। इसलिए उन्हें नियमित सैनिक के रूप में भर्ती किया जाएगा।
पुराने बैच के आधार पर ही मिलेगी वरिष्ठता
हाईकोर्ट ने सेना को निर्देश दिया कि नीलेश से असंभव हलफनामा न मांगा जाए। साथ ही, उनकी भर्ती नियमित पद पर की जाए और उन्हें उनके पुराने बैच के अनुसार वरिष्ठता भी दी जाए। हालांकि उन्हें मेडिकल टेस्ट पास करना अनिवार्य होगा।
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क्या है UHQ (Unit Headquarters) कोटा
UHQ (यूनिट हेडक्वार्टर) कोटा भारतीय सेना में भर्ती की विशेष व्यवस्था है। इस कोटे के तहत सेवारत या सेवानिवृत्त सैनिकों के बेटों को प्राथमिकता दी जाती है। इसका उद्देश्य सैन्य परिवारों की परंपरा को बढ़ावा देना है। यह कोई अलग भर्ती प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सामान्य भर्ती का हिस्सा है। उम्मीदवार को कुछ मामलों में बोनस अंक या प्राथमिकता मिल सकती है। सभी नियम और योग्यता मानदंड लागू रहते हैं।
फैसले का बड़ा असर
यह फैसला उन हजारों सैन्य परिवारों के लिए राहत लेकर आया है, जहां एक से अधिक बच्चे सेना में जाना चाहते हैं। कोर्ट ने साफ कर दिया कि नियमों की आड़ में किसी योग्य उम्मीदवार के साथ अन्याय नहीं किया जा सकता।