पिता के साथ चार साल का बेटा भी जेल गया, जेल प्रशासन बोला बच्चे को मिलेगी सुविधा

Sandeep Kumar | May 18, 2026, 22:26 IST
4 year son prison
उज्जैन में 4 साल का बच्चा पिता के साथ जेल गया। कोर्ट ने बच्चे की जिद पर पिता के साथ रहने का आदेश दिया। दरअसल मां की आत्महत्या के बाद पुलिस ने पिता को गिरफ्तार किया था।

News in Short

  • मां की आत्महत्या के बाद पिता गिरफ्तार, बच्चा पिता के साथ जेल गया।
  • बच्चा नाना-नानी के साथ जाने से साफ इनकार कर रहा था।
  • अदालत ने बच्चे की भावनात्मक जिद को मानते हुए निर्णय दिया।
  • जेल प्रशासन ने बच्चे के लिए भोजन, पढ़ाई और सुरक्षा सुनिश्चित की।
  • यह पुरुष बंदी के साथ बच्चे का दुर्लभ और चर्चित मामला है।

News in Detail

उज्जैन में एक महिला की आत्महत्या के बाद पिता गिरफ्तार हुए। उनका चार साल का बच्चा नाना-नानी के साथ जाने से इनकार कर पिता के साथ जेल पहुंचा। अदालत ने बच्चे की भावनात्मक जिद को मानते हुए उसे पिता के साथ भेजा। यह मामला पुरुष बंदी के साथ बच्चे का दुर्लभ उदाहरण है।



पिता के साथ जेल जाने की जिद

उज्जैन के देवास रोड आरके होम्स कॉलोनी में रहने वाली महिला ने एक महीने पहले फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मामले की जांच में पुलिस ने पति को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया। बच्चे ने कोर्ट में नाना-नानी के साथ जाने से साफ इनकार किया और पिता के साथ रहने की जिद की।



कोर्ट ने बच्चे की इच्छा मानी

सुनवाई के दौरान बच्चे की भावनात्मक अपील को देखते हुए न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया पूरी की। अदालत ने निर्णय दिया कि बच्चा पिता के साथ रहेगा। इस फैसले के बाद दोनों को भैरवगढ़ सेंट्रल जेल भेजा गया। यह घटना इसलिए भी खास है क्योंकि आमतौर पर बच्चों को महिला बंदियों के साथ रहने की अनुमति होती है।



लोक अभियोजन अधिकारी क्या बोले

लोक अभियोजन अधिकारी कुलदीप सिंह भदौरिया ने बताया कि माता-पिता बच्चे के प्राकृतिक संरक्षक होते हैं। इस मामले में स्थायी कस्टडी का फैसला नहीं किया जा रहा था। यदि बच्चा नाना-नानी के साथ जाना चाहता, तो अदालत अंतरिम आदेश दे सकती थी। बच्चे ने स्पष्ट रूप से पिता के साथ जाने की इच्छा जताई। इसी आधार पर अदालत ने उसे पिता के साथ भेजने का निर्णय लिया।



क्या बोले जेल अधीक्षक

भैरवगढ़ जेल अधीक्षक मनोज साहू ने बताया कि जेल प्रशासन बच्चे के लिए सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। बच्चे के भोजन, दूध और जरूरत के अनुसार डाइट की व्यवस्था की जाएगी। पढ़ाई, खेलने और मनोरंजन की सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। इसका उद्देश्य बच्चे पर जेल का नकारात्मक असर न पड़े। वर्तमान में महिला बंदियों के साथ चार बच्चे जेल में हैं। पुरुष बंदी के साथ बच्चे का यह संभवतः पहला मामला है। बच्चे को अन्य अपराधियों से दूर सुरक्षित वातावरण में रखा जाएगा।



मामला समाज में चर्चा का विषय

यह मामला इसलिए चर्चा में आया क्योंकि पुरुष बंदी के साथ बच्चे की रहने की अनुमति दुर्लभ है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला बच्चे के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया।



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