जिनकी हत्या की, उनके लिए पिंडदान: उज्जैन की जेल में 125 कैदियों ने किया सामूहिक तर्पण
जेल में गूंजे वैदिक मंत्र
उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल (Bhairavgarh Jail Ujjain) गुरुवार को अलग माहौल में दिखी। श्राद्ध पक्ष के मौके पर यहां सामूहिक तर्पण (Prisoners Tarpan), श्राद्ध और पिंडदान हुआ। यह जेल प्रशासन का 11वां वार्षिक आयोजन था।
इसमें 125 कैदियों ने हिस्सा लिया। सभी ने अपने दिवंगत परिजनों और पूर्वजों के लिए विधि-विधान से तर्पण किया। पंडितों ने सभी बंदियों को एक साथ बैठाया। उन्होंने पूजन और तर्पण की पूरी प्रक्रिया कराई।
आमतौर पर यहां कड़ी सुरक्षा रहती है। लेकिन दिनभर जेल की चारदीवारी में वैदिक मंत्रोच्चार गूंजता रहा। पूरे दिन परिसर में आध्यात्मिक माहौल बना रहा।
जेल परिसर में ही क्यों हुआ आयोजन
सिद्धवट और रामघाट उज्जैन के प्रमुख घाट हैं। श्राद्ध पक्ष (Shradh Paksha) में आमतौर पर तर्पण के लिए लोग ऐसे घाटों पर जाते हैं, लेकिन जेल नियमों की वजह से बंदी वहां नहीं जा सकते।
इसलिए जेल परिसर में ही पूरी व्यवस्था की गई। श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान, तीनों यहीं कराए गए। जेल की चारदीवारी के भीतर ही बंदियों को पूर्वजों के प्रति कर्तव्य निभाने का मौका मिला।
जिनकी हत्या की, उनके लिए भी पिंडदान
इस आयोजन का सबसे भावुक पहलू यही रहा। हत्या जैसे गंभीर अपराध में सजा काट रहे कुछ बंदियों ने अपने पूर्वजों के साथ मृतकों के लिए भी तर्पण और पिंडदान किया। ये वे लोग थे, जिनकी हत्या उनके हाथों हुई थी।
पूजन के दौरान बंदियों ने दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। उन्होंने अपने किए अपराध के लिए क्षमा भी मांगी।
नंदकिशोर ने मां और पांच मृतकों का किया तर्पण
हत्या के मामले में सजा काट रहे बंदी नंदकिशोर धाकड़ ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, "मैंने अपनी मृत मां के लिए तो तर्पण किया ही, उन पांच लोगों के लिए भी तर्पण किया, जिनकी हत्या मुझसे गलती से हुई थी।" नंदकिशोर के मुताबिक उन्होंने सभी दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की।
जेल अधीक्षक ने बताया आयोजन का मकसद
जेल अधीक्षक मनोज कुमार साहू ने इस आयोजन के उद्देश्य बताए। उनके मुताबिक बंदियों को अपने पूर्वजों के प्रति कर्तव्य निभाने का मौका मिलता है। इससे उन्हें मानसिक शांति मिलती है। साथ ही उन्हें सकारात्मकता से जोड़ने की कोशिश की जाती है।
यह आयोजन लगातार 11वें वर्ष हुआ है। इसका एक मकसद बंदियों को धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों से जोड़ना है। दूसरा मकसद उन्हें अपने अपराध पर आत्ममंथन और प्रायश्चित का अवसर देना है।
इस आयोजन के मायने
सजा काट रहे कैदियों के लिए यह दिन आम दिनों से अलग रहा। एक तरफ उन्हें अपने परिजनों को याद करने का मौका मिला। दूसरी तरफ कुछ ने उन लोगों के लिए भी प्रार्थना की, जिनकी जान उनके हाथों गई।
यह आयोजन दिखाता है कि जेल में सजा के साथ आत्ममंथन की कोशिश भी होती है। हालांकि खबर में पीड़ित परिवारों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
FAQ:
- उज्जैन की केंद्रीय भैरवगढ़ जेल में सामूहिक तर्पण का आयोजन क्यों किया गया?
यह आयोजन जेल प्रशासन का 11वां वार्षिक आयोजन था, जिसमें कैदियों को अपने दिवंगत परिजनों के लिए विधि-विधान से तर्पण करने का अवसर दिया गया। - इस आयोजन में कितने कैदियों ने हिस्सा लिया और वे किस तरह के अपराध के लिए सजा काट रहे थे?
इस आयोजन में 125 कैदियों ने हिस्सा लिया, इनमें कुछ ऐसे भी थे जो हत्या के मामले में सजा काट रहे थे। - जेल प्रशासन ने इस आयोजन का उद्देश्य क्या बताया?
जेल प्रशासन का कहना है कि इस आयोजन का मकसद कैदियों को अपने पूर्वजों के प्रति कर्तव्य निभाने का अवसर देना है, ताकि उन्हें मानसिक शांति मिले और वे अपने अपराध पर आत्ममंथन कर सकें।