उज्जैन की गिर गाय राधा बनी प्रदेश में नंबर-1, रोज देती है 19.760 लीटर दूध, पशुपालक को मिलेगा 1 लाख रुपए का पुरस्कार

Umeshwari Baghel | Nov 07, 2026, 22:42 IST
उज्जैन की गिर गाय राधा रोज 19.760 लीटर दूध देकर प्रदेश में पहले स्थान पर
उज्जैन जिले के तालोद गांव की एक गिर नस्ल की गाय ने मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा दूध देने का पहला स्थान हासिल किया है। गांव के पशुपालक गौरव रघुवंशी की गाय राधा रोज औसतन 19.760 लीटर दूध देती है। इस उपलब्धि के लिए उन्हें पशुपालन एवं डेयरी विभाग की ‘गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना’ के तहत 1 लाख रुपये का पुरस्कार और प्रमाण पत्र मिलेगा।

अच्छी नस्ल की गाय पालना आसान काम नहीं है। उसके चारे, पानी, देखभाल और समय पर इलाज पर लगातार ध्यान देना पड़ता है। ऐसे में किसी एक गाय का इतना ज्यादा दूध देना पशुपालकों के लिए प्रेरणा की बात मानी जा रही है।



प्रतियोगिता कैसे हुई

पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने 27 से 31 अक्टूबर के बीच प्रदेश के चयनित 208 वृंदावन ग्रामों में दुग्ध उत्पादन प्रतियोगिता कराई थी। इसमें गांवों के पशुपालकों ने अपनी गायों का दूध उत्पादन दर्ज कराया। सबसे ज्यादा दूध देने वाली गाय को प्रथम स्थान दिया गया। इस प्रतियोगिता में राधा ने प्रतिदिन 19.760 लीटर दूध देकर पहला स्थान हासिल किया।




यह प्रतियोगिता पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई थी। इसमें सभी वर्गों के पशुपालक हिस्सा ले सकते थे। विभाग के अनुसार प्रतियोगिता का मकसद दूध उत्पादन बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।



मुख्यमंत्री करेंगे सम्मान

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 9 नवंबर 2026 को गोवर्धन पर्व के अवसर पर भोपाल के रवींद्र भवन में राज्य स्तरीय गौ-पूजन और पशुपालक सम्मान समारोह आयोजित करेंगे। इस समारोह में गौरव रघुवंशी सहित सभी विजेता पशुपालकों को सम्मानित किया जाएगा। गोवर्धन पूजा पर गायों की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है, इसलिए इस दिन का आयोजन पशुपालकों के लिए खास होगा।



पुरस्कार की राशि और नियम

इस योजना में पहले स्थान पर आने वाले पशुपालक को 1 लाख रुपए, दूसरे स्थान पर 50 हजार रुपए और तीसरे स्थान पर 25 हजार रुपए दिए जाते हैं। सभी विजेताओं को प्रमाण पत्र भी दिए जाएंगे। पुरस्कार की राशि सीधे उनके बैंक खातों में DBT के जरिए भेजी जाएगी।



प्रतियोगिता में कुल 624 पुरस्कार तय किए गए हैं। इन पर लगभग 3 करोड़ 64 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। यह राशि पूरे प्रदेश के विजेता पशुपालकों में बांटी जाएगी।



उज्जैन की गिर गाय राधा रोज 19.760 लीटर दूध देकर प्रदेश में पहले स्थान पर

देशी नस्लों के संरक्षण पर जोर

इस पहल का मुख्य उद्देश्य देशी और उन्नत नस्लों की गायों का संरक्षण और संवर्धन करना है। इन नस्लों में गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी और निवाड़ी शामिल हैं। सरकार का मानना है कि अच्छी नस्ल की गायों से दूध उत्पादन बढ़ेगा और पशुपालकों की आय भी बढ़ेगी।



मध्य प्रदेश में मालवी और निमाड़ी जैसी देशी नस्लें पहले से पहचान रखती हैं। गिर नस्ल की गाय भी दूध उत्पादन के लिए जानी जाती है। ऐसे में इन नस्लों को बढ़ावा देना प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।




पशुपालकों के लिए संदेश

गांवों में पशुपालन को लाभकारी बनाने के लिए ऐसी प्रतियोगिताएं किसानों को प्रेरित करती हैं। जब किसी पशुपालक की मेहनत को सम्मान और पुरस्कार मिलता है, तो दूसरे पशुपालक भी बेहतर नस्ल और बेहतर देखभाल की ओर बढ़ते हैं। इससे किसानों के बीच अच्छी नस्ल की गायों के पालन का रुझान बढ़ सकता है।



आगे क्या होगा?

9 नवंबर को भोपाल में होने वाले सम्मान समारोह में विजेता पशुपालकों के नाम और पुरस्कार की औपचारिक घोषणा होगी। इसके बाद पुरस्कार राशि का भुगतान होगा। पशुपालकों के लिए यह योजना आगे भी दूध उत्पादन सुधारने का अवसर साबित हो सकती है।




यह खबर क्यों जरूरी है?

दूध उत्पादन सीधे गांवों की आय और पशुपालकों की रोजी-रोटी से जुड़ा है। मध्य प्रदेशमें बड़ी संख्या में परिवार डेयरी और पशुपालन पर निर्भर हैं, इसलिए ऐसी प्रतियोगिताएं उनके लिए सीधा संदेश हैं कि अच्छी नस्ल और बेहतर देखभाल से अधिक कमाई संभव है।



इस खबर में देशी नस्लों का संरक्षण भी जुड़ा है। मालवी, निमाड़ी, गिर और साहीवाल जैसी नस्लें मध्य प्रदेश और देश की पहचान का हिस्सा हैं। इनके संरक्षण से देशी पशुधन बचा रहता है और दुग्ध उत्पादन की स्थिरता बढ़ती है।



साथ ही, पुरस्कार राशि का DBT के जरिए सीधे बैंक खातों में भेजा जाना पारदर्शिता का एक उदाहरण है। इससे पशुपालकों को सरकारी योजनाओं के लाभ का सीधा अनुभव मिलता है।



FAQ



सवाल 1: गोपाल-कृष्ण ग्राम पुरस्कार योजना क्या है?



जवाब: यह पशुपालन एवं डेयरी विभाग की योजना है, जिसमें चयनित वृंदावन ग्रामों में सबसे ज्यादा दूध देने वाली गायों के पशुपालकों को पुरस्कार दिया जाता है। पहले स्थान पर 1 लाख, दूसरे पर 50 हजार और तीसरे पर 25 हजार रुपए का पुरस्कार है।



सवाल 2: इस प्रतियोगिता में कौन-कौन सी नस्लें शामिल हैं?



जवाब: योजना में गिर, साहीवाल, थारपारकर, मालवी और निवाड़ी जैसी देशी और उन्नत अधिसूचित नस्लों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर दिया गया है।



सवाल 3: पुरस्कार की राशि कैसे मिलेगी?



जवाब: पुरस्कार राशि DBT के माध्यम से विजेता पशुपालकों के बैंक खातों में सीधे भेजी जाएगी। साथ ही सभी विजेताओं को प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।

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