इंदौर बड़ा, फिर नाम पीछे क्यों? उज्जैन-इंदौर मेट्रो अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती

Sanjay Dhiman | Jun 23, 2026, 16:30 IST
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उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया की सरकारी अधिसूचना को MP हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इंदौर का नाम दूसरे स्थान पर रखने और कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी पर सवाल उठाए गए हैं।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्यप्रदेश सरकार ने उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया की अधिसूचना जारी की है।
  • इस अधिसूचना को MP हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में चुनौती दी गई है।
  • याचिका में इंदौर का नाम दूसरे स्थान पर रखने पर आपत्ति जताई गई है।
  • अधिसूचना में छह जिलों की 38 तहसीलें और 2781 गांव शामिल हैं।
  • जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की बेंच इस पर सुनवाई करेगी।

मेट्रो अधिसूचना पहुंची कोर्ट

मध्यप्रदेश सरकार की एक बड़ी शहरी योजना अब अदालत के दरवाजे तक पहुंच गई है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया की अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना को हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में चुनौती दी गई है।



याचिका दाखिल करने वाले की ओर से एडवोकेट अक्षत पहाड़िया ने पैरवी की है। उन्होंने अधिसूचना में कई कानूनी और प्रक्रियागत खामियां गिनाई हैं। याचिका में कहा गया है कि मेट्रोपॉलिटन एरिया बनाने के जरूरी कानूनी प्रावधानों की अनदेखी हुई है।



नाम पर क्यों है विवाद

याचिका में सबसे बड़ा सवाल नाम को लेकर उठाया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि इंदौर प्रदेश का सबसे बड़ा शहरी और आर्थिक केंद्र है। इसके बावजूद उसका नाम उज्जैन के बाद रखा गया है। याचिका में इस पर पुनर्विचार की मांग की गई है।



यह सवाल सिर्फ नाम का नहीं है। इंदौर का पूरा यानी 100 प्रतिशत क्षेत्र इस मेट्रोपॉलिटन एरिया में शामिल है। इंदौर जिले का 3901.63 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र इसमें आता है। वहीं उज्जैन का करीब 59 प्रतिशत हिस्सा ही इसमें शामिल किया गया है।



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मेट्रोपॉलिटन एरिया में छह जिले, 2781 गांव

यह मेट्रोपॉलिटन एरिया बेहद विशाल है। इसमें इंदौर, उज्जैन, देवास, धार, शाजापुर और रतलाम जिलों को जोड़ा गया है। इन जिलों की 38 तहसीलें और 2781 गांव इस एरिया का हिस्सा बनेंगे।



कुल क्षेत्रफल करीब 16,000.87 वर्ग किलोमीटर तय किया गया है। इसमें रहने वाली अनुमानित आबादी 75.34 लाख बताई गई है। इस पूरे क्षेत्र को चार चरणों में विकसित करने की योजना है।



क्या है सरकार की महत्वाकांक्षा

यह योजना मध्यप्रदेश की सबसे बड़ी शहरी विकास परियोजनाओं में से एक है। सरकार का मकसद इस पूरे क्षेत्र को एकीकृत ढांचे में विकसित करना है। इससे इन जिलों में बुनियादी सुविधाएं, यातायात और नगरीय प्रशासन को एक साथ जोड़ा जा सकेगा।



सुनवाई पर सबकी नजर

अब सारी निगाहें हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच इस मामले को सुनेगी। प्रशासनिक, राजनीतिक और शहरी विकास से जुड़े सभी पक्ष इसके नतीजे का इंतजार कर रहे हैं।



कोर्ट का फैसला तय करेगा कि यह अधिसूचना अपने मौजूदा स्वरूप में लागू होगी या इसमें बदलाव होगा। इंदौर के नाम का सवाल भी इसी सुनवाई में सुलझ सकता है।



FAQ

  1. उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया क्या है?
    यह मध्यप्रदेश सरकार की एक बड़ी शहरी योजना है। इसमें छह जिलों को मिलाकर करीब 16,000 वर्ग किलोमीटर का एकीकृत क्षेत्र बनाया जाएगा। इस एरिया में 75 लाख से अधिक लोग रहते हैं।
  2. हाईकोर्ट में याचिका किस बात पर दायर हुई है?
    याचिका में दो मुख्य आपत्तियां हैं। पहली, अधिसूचना जारी करने में कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी का आरोप है। दूसरी, इंदौर जैसे बड़े शहर का नाम उज्जैन के बाद रखने पर सवाल उठाया गया है।
  3. इस मामले की सुनवाई कौन करेगा?
    मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच इस मामले की सुनवाई करेगी। जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच इस याचिका पर विचार करेगी।

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