उज्जैन में जिंदा बेटी का किया अंतिम संस्कार, दूसरी जाति में शादी करने पर नाराज था परिवार

Aman Vaishnav | Jul 29, 2026, 11:07 IST
लड़की की गरिमा को देखते हुए इमेज को ब्लर किया गया
उज्जैन के खाचरौद में एक 18 साल की लड़की ने जूसरी जाति में शादी कर ली। इससे नाराज होकर परिवार ने जीवित बेटी का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया।

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के खाचरौद नगर में एक अजीब मामला सामने आया है। यहां नर्सिंग मंदिर इलाके में एक परिवार ने अपनी जिंदा बेटी का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार (उज्जैन में अंतिम संस्कार) कर दिया।



जानकारी के अनुसार बेटी ने कुछ समय पहले अपनी मर्जी से प्रेम विवाह किया था। यह विवाह जूसरी जाति (अंतरजातीय विवाह) के युवक से हुआ। घर वालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था।



नाराज परिवार ने बेटी से हर तरह का सामाजिक संबंध तोड़ने का ऐलान कर दिया। इसके बाद बेटी की तस्वीर जलाकर पारंपरिक रीति रिवाज से उसका प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। इस दौरान समाज के कई लोग भी वहां मौजूद रहे।



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बेटी है मेकअप आर्टिस्ट

परिवार के मुताबिक बेटी की उम्र करीब 18 साल 2 महीने है। वो पेशे से मेकअप आर्टिस्ट है। परिवार का कहना है कि बेटी ने खुद अपनी मर्जी से यह विवाह किया।



घर वालों ने बताया कि उन्होंने बेटी को समझाने की पूरी कोशिश की थी। इसके बाद भी बेटी अपने फैसले पर अड़ी रही। इसके बाद परिवार ने उसे परिवार से बेदखल घोषित कर दिया।



मामला थाने तक पहुंचा

यह मामला सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहा। बेटी के पिता और दोनों भाई उसे मनाने पुलिस थाने भी पहुंचे थे। वहां उन्होंने बेटी को घर लौटने के लिए समझाने की कोशिश की।



हैरानी की बात तो यह है कि थाने में बेटी ने अपने माता पिता और भाइयों को पहचानने से ही इनकार कर दिया। परिवार का कहना है कि इसी घटना के बाद उन्होंने यह कड़ा कदम उठाने का फैसला किया।



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रीति रिवाज से तोड़े रिश्ते

परिजन के मुताबिक बेटी के थाने वाले रवैये के बाद उन्होंने रीति रिवाज के अनुसार उससे सारे रिश्ते खत्म करने का निर्णय लिया। इसके तहत बेटी की तस्वीर का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार किया गया।



इस दौरान गोरनी सहित अन्य पारंपरिक रस्में भी पूरी की गईं। परिवार के इस फैसले की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग भी वहां जमा हो गए। इलाके में इस घटना को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।



भावुक दिखे पिता और भाई

इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पिता और दोनों भाई काफी भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि बेटी का पालन पोषण उन्होंने बड़े स्नेह और संघर्ष से किया था। जिंदा बेटी का पिंडदान



परिवार का कहना था कि बेटी के फैसले के बाद अब दोनों तरफ से कोई रिश्ता नहीं बचा है। उनका यह भी कहना था कि भावनात्मक पीड़ा के बाद परिवार को यह कठिन फैसला लेना पड़ा।



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