उज्जैन महाकाल लोक के बाद अब कालभैरव लोक की बारी, 12 महीने में काम पूरा होने की उम्मीद, जानें क्या है तैयारी

Kaushiki | Oct 31, 2026, 10:16 IST
उज्जैन महाकाल लोक के बाद अब बदलेगा कालभैरव मंदिर का स्वरूप
Construction preparations are underway for the ₹164-crore Kal Bhairav Lok project at the Shri Kal Bhairav Temple in Ujjain. The project aims to improve access, parking and facilities for devotees.
मध्य प्रदेश के उज्जैन में महाकाल लोक के बाद अब कालभैरव लोक बनाने का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। भैरवगढ़ स्थित प्रसिद्ध श्री कालभैरव मंदिर परिसर में करीब 164 करोड़ रुपए की लागत से यह परियोजना तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देना और दर्शन के लिए आने-जाने की व्यवस्था को आसान बनाना है।

कालभैरव मंदिर दर्शन व्यवस्था में क्या बदला

कालभैरव लोक निर्माण परियोजना के तहत सबसे पहले मंदिर के मुख्य मार्ग पर काम शुरू किया जाएगा। इसके लिए मंदिर के पीछे बन रहा नया स्थायी निकास मार्ग अगले 4 से 5 दिनों में चालू कर दिया जाएगा। नया ट्रैफिक डायवर्जन लागू होते ही मुख्य भैरवगढ़ मार्ग को बंद कर खुदाई का काम शुरू होगा।



परियोजना के लिए संबंधित दुकानों को खाली कराकर जगह साफ कर दी गई है। श्रद्धालुओं के वाहनों के लिए नई पार्किंग का निर्माण भी शुरू हो गया है। इस पूरे प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं के आवागमन, पार्किंग और दर्शन व्यवस्था को अधिक आसान और बेहतर बनाना है।



कालभैरव लोक बनने से श्रद्धालुओं को क्या फायदा होगा

कालभैरव लोक परियोजना का मुख्य उद्देश्य मंदिर आने वाले लोगों की सुविधा बढ़ाना है। इसके लिए दर्शन व्यवस्था, आने-जाने के रास्तों और अन्य सुविधाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। परियोजना में पार्किंग की व्यवस्था का काम भी शुरू किया जा चुका है। वहीं मुख्य मार्ग पर निर्माण शुरू करने से पहले नया निकास रास्ता तैयार किया जा रहा है, ताकि रास्ते में बदलाव की प्रक्रिया पूरी की जा सके।



इस Temple Development कार्य से आने वाले समय में श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। फिलहाल सभी की नजर नए निकास मार्ग के चालू होने और उसके बाद मुख्य मार्ग पर शुरू होने वाले निर्माण कार्य पर है।



12 महीने में परियोजना पूरी होने की उम्मीद

कालभैरव लोक परियोजना की अनुमानित लागत करीब 164 करोड़ रुपए है। इसे पूरा करने के लिए लगभग 12 महीने का समय तय माना जा रहा है। हालांकि मंदिरों के निर्माण का लक्ष्य अक्टूबर से दिसंबर 2027 के बीच रखा गया है।



फिलहाल परियोजना के शुरुआती काम किए जा रहे हैं। इनमें नया निकास मार्ग बनाना, मुख्य मार्ग पर निर्माण की तैयारी करना, दुकानों को खाली करवाना और पार्किंग की व्यवस्था तैयार करना शामिल है। नए रास्ते के चालू होने के बाद मुख्य सड़क पर खुदाई का काम शुरू किया जाएगा। इस तरह निर्माण कार्य को अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया जा रहा है।



महाकाल लोक बनने के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या

उज्जैन में महाकाल लोक बनने के बाद श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। बड़ी संख्या में लोग भगवान महाकाल के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इसके साथ ही शहर के दूसरे प्रसिद्ध मंदिरों में भी दर्शन करने जाते हैं। श्री कालभैरव मंदिर भी उज्जैन के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।



यहां आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए कालभैरव लोक बनाने की योजना पर काम किया जा रहा है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या को देखते हुए मंदिर के आसपास आने-जाने और अन्य जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने की आवश्यकता महसूस की गई है। इसी उद्देश्य से यह परियोजना आगे बढ़ाई जा रही है।



मुख्यमंत्री के सहयोग से यूडीए कर रहा निर्माण

कालभैरव लोक का निर्माण मुख्यमंत्री के सहयोग से उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) द्वारा कराया जा रहा है। यूडीए का प्रयास है कि परियोजना का काम निर्धारित समय में पूरा किया जाए और श्रद्धालुओं को अच्छी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।



यूडीए अध्यक्ष रवि सोलंकी के मुताबिक, महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। लोग महाकाल मंदिर के साथ शहर के अन्य मंदिरों में भी दर्शन करने पहुंच रहे हैं। उन्होंने बताया कि इसी बात को ध्यान में रखते हुए कालभैरव लोक का निर्माण कराया जा रहा है। प्रयास है कि काम समय पर पूरा हो और श्रद्धालुओं को दर्शन, आवागमन और दूसरी जरूरी सुविधाओं में आसानी हो।



FAQs:



  1. कालभैरव मंदिर दर्शन व्यवस्था में क्या बदलाव हो रहे हैं?
    कालभैरव लोक निर्माण परियोजना के तहत मंदिर के मुख्य मार्ग पर काम किया जा रहा है, जिसमें नया स्थायी निकास मार्ग, पार्किंग व्यवस्था और सुविधाओं में सुधार शामिल हैं।
  2. कालभैरव लोक परियोजना की लागत और समय सीमा क्या है?
    कालभैरव लोक परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 164 करोड़ रुपए है और इसे पूरा करने के लिए लगभग 12 महीने का समय निर्धारित किया गया है।
  3. इस परियोजना से श्रद्धालुओं को क्या लाभ होगा?
    इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं के आवागमन, पार्किंग और दर्शन व्यवस्था को अधिक आसान और बेहतर बनाना है, जिससे उनके लिए सुविधाएं बेहतर होंगी।
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