महाकाल मंदिर उज्जैन के पास की जमीन खरीदी में घिरे BJP विधायक चिंतामणि, HC में केस

Sanjay Gupta | Jul 22, 2026, 22:55 IST
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उज्जैन महाकाल मंदिर के पास हरिफाटक की जमीन को लेकर मामला हाईकोर्ट इंदौर पहुंच गया है। इस मामले में कांग्रेस पार्षद राजेंद्र कुंवल ने ईओडब्ल्यू और लोकायुक्त में शिकायत की थी। अब उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। जिसमें पक्षकारोंं को नोटिस हुआ है।

Indore. उज्जैन श्री महाकाल मंदिर के पास की बेशकीमती जमीन को लेकर मामला इंदौर हाईकोर्ट पहुंचा है। यह हरिफाटक पार्किंग और इसके पास की जमीन है। इसमें कांग्रेस पार्षद राजेंद्र कुंवल ने याचिका दायर की है, जिसमें पक्षाकारों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।



यह है मामला

याचिका में कहा गया है कि महाकाल मंदिर के पास सर्वे नंबर 3664/1, 3666/1, 3690/1/1, 3691/1 यह साल 1950 में सरकारी रही है। यह कुल 1.877 हेक्टेयर है जो बेशकीमती है। लेकिन इस जमीन को यूटोपिया होटल एंड रिसार्ट ने मार्च 2026 में 45 हजार वर्गफीट जमीन 3.82 करोड़ में ले ली। जबकि यह जमीन सरकारी है और जिला प्रशासन उज्जैन की विविध रिपोर्ट में सरकारी आ चुकी है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने विस्तृत पक्ष रखा।



इससे सिंहस्थ में आएगी समस्या

अधिवक्ता गुरनानी ने कहा कि यह मामला गंभीर है क्योंकि सरकारी जमीन का व्यावसायिक उपयोग होगा। वहीं सिंहस्थ के मद्देनजर आगे लाखों भक्त आएंगे और तब पार्किंग को लेकर समस्या आएगी।



इन सभी से मांगा जवाब

याचिका में राज्य शासन, राजस्व विभाग, संभागायुक्त उज्जैन, कलेक्टर उज्जैन, नगर निगम उज्जैन, तहसीसलदार, पटवारी सभी को राजस्व अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है।



कैसे घिर रहे हैं विधायक चिंतामणि

दरअसल जिस कंपनी Utopia Hotel and Resorts Private Limited ने इस जमीन का एक हिस्सा खरीदा है, इसमें डायरेक्टर आलोट से बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय हैं। साथ ही इकबाल सिंह गांधी पार्टनर है।



जनहित याचिका में मुख्य रूप से मांग की गई है कि संबंधित भूमि को राजस्व रिकार्ड में फिर से शासकीय भूमि के रूप में दर्ज किया जाए तथा भूमि पर किसी भी प्रकार की विकास अथवा भवन निर्माण अनुमति प्रदान नहीं की जाए।



मामला सार्वजनिक हित का

अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने बताया कि यह मामला किसी निजी व्यक्ति के व्यक्तिगत हित से नहीं है। उज्जैन में श्री महाकालेश्वर मंदिर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा, सार्वजनिक पार्किंग व्यवस्था, शासकीय भूमि की सुरक्षा और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण का मामला है।



उन्होंने कहा कि याचिका में उपलब्ध राजस्व अभिलेखों, संबंधित अधिकारियों की रिपोर्टों एवं अन्य दस्तावेजों के आधार पर मामले की निष्पक्ष जांच और सार्वजनिक भूमि को सुरक्षित रखने की मांग की गई है।



मालवीय कह चुके उलझा रहे कुछ लोग

बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय इस मामले में पहले ही पक्ष रख चुके हैं कि हमने तो उनसे रजिस्ट्री करवाई है, जिनके नाम जमीन है। इसमें शासन का सवाल नहीं आता। जमीन को लेकर भ्रम फैलाया गया, जबकि महाकाल मंदिर से जमीन काफी दूर है। पार्किंग की बात है तो जमीन मालिक ने आपत्ति भी ली, लेकिन फिर भी उस पर पार्किंग बना दी गई। बाकी पूरा मामला कोर्ट तय करेगी।



उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित आरोप लगाकर बदनाम करने की कोशिश है। उज्जैन के कुछ बड़े राजनीतिक लोग इस तरह के मुद्दे उठाकर अपने राजनीतिक विरोधियों को परेशान और बदनाम करना चाहते हैं। वे हमें उलझाना चाहते हैं।



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