अब सुरंग से सीधे पहुंच सकेंगे महाकाल लोक, 91 करोड़ की टनल हो रही है तैयार
समझें क्या है पूरा मामला...
- उज्जैन में हरिफाटक से महाकाल लोक तक भूमिगत टनल बनाई जा रही है।
- यह टनल करीब 650 मीटर लंबी होगी।
- प्रोजेक्ट की लागत 91.74 करोड़ रुपए तय की गई है।
- अप्रैल 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है।
- इससे सिंहस्थ 2028 से पहले ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी।
उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ अब हर साल तेजी से बढ़ रही है। सिंहस्थ 2028 में करीब 40 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। इससे पहले ही उज्जैन में ट्रैफिक व्यवस्था प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन चुकी है। इसी समस्या के स्थायी हल के लिए अब एक बड़ा टनल प्रोजेक्ट तैयार हो रहा है।
सावन में टूटा ट्रैफिक का बांध
हाल ही में सावन सोमवार पर उज्जैन में रिकॉर्ड भीड़ पहुंची। इस दिन करीब साढ़े सात लाख श्रद्धालु दर्शन के लिए आए। इतनी बड़ी भीड़ के आगे शहर की सड़कें कम पड़ गईं। इंदौर-उज्जैन हाईवे से लेकर हरिफाटक तक यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। कई जगह घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही। यही घटना प्रशासन के लिए बड़ा सबक बनी। इसके बाद स्थायी समाधान खोजने की कोशिश तेज हुई।
अब बनेगी भूमिगत टनल
समाधान के तौर पर अब हरिफाटक पार्किंग से महाकाल लोक तक जमीन के नीचे नया रास्ता तैयार किया जा रहा है। यह करीब 650 मीटर लंबा अंडरपास होगा। इस प्रोजेक्ट को 91.74 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति मिल चुकी है। यह स्वीकृति 28 अक्टूबर 2025 को दी गई थी।
योजना पूरी होने के बाद श्रद्धालु हरिफाटक क्षेत्र में वाहन पार्क करेंगे। इसके बाद वे सीधे अंडरपास के जरिए महाकाल लोक पहुंच सकेंगे। प्रोजेक्ट को 15 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल करीब 15 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।
हरिफाटक क्यों बना बॉटलनेक
महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की वजह से उज्जैन देश के प्रमुख धार्मिक शहरों में शामिल है। यहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। सावन, महाशिवरात्रि, त्योहारी सीजन और सिंहस्थ जैसे मौकों पर यह संख्या कई गुना बढ़ जाती है। इंदौर-उज्जैन रोड, आगर रोड और गऊघाट यानी पुराने उज्जैन-बड़नगर मार्ग से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिफाटक ब्रिज की ओर से महाकाल क्षेत्र पहुंचते हैं।
इस वजह से हरिफाटक ब्रिज एक तरह से बॉटलनेक बन जाता है। भीड़ बढ़ने पर पुलिस को बड़े वाहन दूर ही रोकने पड़ते हैं। श्रद्धालुओं को भी लंबे समय तक जाम में फंसना पड़ता है। नई टनल बनने के बाद हरिफाटक ब्रिज पर यह निर्भरता कम होगी।
दो अलग बॉक्स वाली खास डिजाइन
यह कोई सामान्य अंडरपास नहीं है। यह करीब 650 मीटर लंबा भूमिगत कॉरिडोर होगा। इसका करीब 450 मीटर हिस्सा जमीन से करीब 10 मीटर नीचे बनाया जाएगा। इसमें दो अलग-अलग बॉक्स होंगे। हर बॉक्स की चौड़ाई करीब 9 मीटर रहेगी।
एक बॉक्स का इस्तेमाल श्रद्धालुओं के जाने के लिए होगा। दूसरे बॉक्स का इस्तेमाल लौटने के लिए किया जाएगा। इस डिजाइन से भीड़ नियंत्रित करने के लिए अलग बैरिकेडिंग की जरूरत कम पड़ेगी। दोनों बॉक्स इतने चौड़े होंगे कि जरूरत पड़ने पर बड़े वाहन भी यहां से गुजर सकें।
बारिश और आपात स्थिति का भी इंतजाम
भूमिगत रास्तों में बारिश के दौरान पानी भरना सबसे बड़ी चुनौती होती है। इसके लिए अलग ड्रेनेज सिस्टम तैयार किया जा रहा है। दोनों बॉक्स में अंडरग्राउंड ड्रेनेज लाइन रहेगी। इससे पानी एक अलग संपवेल तक पहुंचेगा। टनल के कुछ हिस्से को ऊपर से खुला भी रखा जाएगा।
इससे प्राकृतिक हवा और रोशनी का आवागमन बना रहेगा। आपात स्थिति के लिए अलार्म सिस्टम भी लगाया जाएगा। हर 100 मीटर पर यह व्यवस्था रहेगी। इससे जरूरत पड़ने पर श्रद्धालु पुलिस या एंबुलेंस तक सूचना पहुंचा सकेंगे।
रेलवे लाइन के नीचे सबसे मुश्किल हिस्सा
टनल का सबसे जटिल हिस्सा रेलवे लाइन के नीचे से गुजरेगा। रेलवे ट्रैक के नीचे बनने वाला अंडरपास रेलवे खुद बनाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने रेलवे को 31 करोड़ रुपए दिए हैं। टनल निर्माण की अनुबंधित लागत 35.37 करोड़ रुपए है।
बाकी राशि का इस्तेमाल भू-अर्जन, भवनों और यूटिलिटी शिफ्टिंग जैसे कामों में होगा। प्रोजेक्ट के दायरे में एक थाना, एक स्कूल और कुछ अन्य भवन भी आ रहे हैं। इन्हें हटाने और सुविधाएं शिफ्ट करने का काम भी निर्माण की रफ्तार तय करेगा।
महाकाल क्षेत्र में पहले से चार टनल
महाकाल मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में पहले से दो टनल चल रही हैं। दो और टनल का निर्माण जारी है। मंदिर प्रशासन के मुताबिक प्रवेश और निकास के लिए अलग-अलग टनल का इस्तेमाल होता है। मंदिर अधिकारियों के अनुसार 13 से 15 कतारों के जरिए श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाता है। एक दिन में सात लाख तक श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं।
सामान्य दिनों में औसतन करीब दो लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंदिर प्रशासक प्रथम कौशिक के मुताबिक हैरिटेज होटल से शहनाई द्वार स्थित न्यू वेटिंग हॉल तक भी एक टनल बन रही है। यह करीब 6 मीटर चौड़ी होगी और 24 मीटर चौड़ी सड़क पार करते हुए मंदिर क्षेत्र तक पहुंचेगी। हरिफाटक से महाकाल लोक तक बनने वाली टनल इस पूरी श्रृंखला की चौथी अहम कड़ी होगी।
कलेक्टर बोले, पीक सीजन में मिलेगी बड़ी राहत
उज्जैन कलेक्टर (आईएएस रौशन कुमार सिंह) ने इस प्रोजेक्ट को लेकर अपनी बात रखी। उनके मुताबिक यह भूमिगत रास्ता सावन सोमवार और अन्य पीक सीजन में बेहद उपयोगी साबित होगा। उनका कहना है कि इससे हरिफाटक ब्रिज और आसपास की सड़कों पर दबाव कम होगा।
कलेक्टर के अनुसार श्रद्धालु पार्किंग से उतरकर बिना ट्रैफिक में फंसे सीधे महाकाल क्षेत्र तक पहुंच सकेंगे। सिंहस्थ जैसे बड़े आयोजन में यह कॉरिडोर भीड़ प्रबंधन में अहम भूमिका निभा सकता है।
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