उज्जैन महाकाल मंदिर के त्रिनेत्र सिस्टम को मिला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार
उज्जैन महाकाल मंदिर से बड़ी और गर्व वाली खबर आई है। महाकालेश्वर मंदिर की सुरक्षा अब पूरी तरह हाई‑टेक हो गई है। मंदिर में भीड़ और सुरक्षा संभालने के लिए एक खास एआई वीडियो सर्विलांस सिस्टम TRINETRA लगाया गया है।
इस स्मार्ट सिस्टम को अब केंद्र सरकार ने भी मान्यता दी है। त्रिनेत्र को 29वें राष्ट्रीय ई‑गवर्नेंस पुरस्कारों में शामिल किया गया। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय ने इस सम्मान की घोषणा की है।
मंदिर में तकनीक के जरिए सुरक्षा मजबूत करने के लिए ये पुरस्कार दिया जा रहा है। उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने इस प्रोजेक्ट को तैयार करवाया और दिल्ली में 13 सदस्यीय ज्यूरी के सामने इसका प्रजेंटेशन दिया। टीम ने खुद उज्जैन आकर पूरे सिस्टम का बारीकी से निरीक्षण भी किया।
आखिर क्या है इस त्रिनेत्र नाम का असली मतलब
धार्मिक मान्यताओं में भगवान शिव के तीसरे नेत्र को त्रिनेत्र कहा जाता है। जब भगवान शिव का तीसरा नेत्र खुलता है, तो कुछ भी छिपा नहीं रहता। ठीक इसी तरह, मंदिर परिसर की सुरक्षा के लिए इस डिजिटल सिस्टम को त्रिनेत्र नाम दिया गया है।
ये सिस्टम इंसानी आंख से बच जाने वाली हर छोटे से छोटे एक्शन को तुरंत पकड़ लेता है। ये चौबीसों घंटे चालू रहने वाली एक ऐसी डिजिटल तीसरी आंख है जो श्रद्धालुओं की रक्षा करती है।
महाकाल लोक बनने के बाद क्यों पड़ी इसकी जरूरत
पीएम नरेंद्र मोदी ने अक्टूबर 2022 में उज्जैन के श्रीमहाकाल महालोक का भव्य लोकार्पण किया था। इसके बाद से ही उज्जैन में आने वाले भक्तों की संख्या अचानक बहुत बढ़ गई। आज के समय में हर दिन करीब 1.5 से 2 लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।
त्योहारों और सावन के महीने में ये संख्या बढ़कर 8 से 10 लाख तक हो जाती है। इतनी भारी भीड़ को संभालना और उनकी सुरक्षा करना मंदिर प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती थी। इसी चुनौती से निपटने के लिए उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने यह सिस्टम बनाया।
कैसे काम करती है ये मॉडर्न तीसरी आंख
इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार करने में करीब 5.25 करोड़ रुपए की लागत आई है। इसके तहत 116.14 एकड़ के विशाल महाकाल रुद्रसागर विकास क्षेत्र को कवर किया गया है।
मंदिर परिसर और आसपास के रास्तों पर 450 से अधिक एडवांस एआई कैमरे लगाए गए हैं। ये सभी कैमरे एक बहुत बड़े और आधुनिक कंट्रोल रूम से जुड़े हुए हैं। सुरक्षाकर्मी वहां बैठकर हर कोने की लाइव वीडियो मॉनिटरिंग करते हैं।
ये सिस्टम इतना एडवांस है कि हर मिनट 10 हजार चेहरों की पहचान कर सकता है। इसमें एडवांस फेशियल रिकॉग्निशन और ऑटोमैटिक व्हीकल नंबर प्लेट पहचान जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति परिसर में आता है, तो यह तुरंत अलार्म बजा देता है। भीड़ ज्यादा बढ़ने पर यह अधिकारियों को पहले ही अलर्ट भेज देता है। इससे भगदड़ जैसी अनहोनी होने का खतरा बिल्कुल खत्म हो गया है।
त्रिनेत्र सिस्टम लागू होने से क्या बदला
इस नए एआई सिस्टम के आने से सुरक्षा व्यवस्था में बहुत बदलाव देखने को मिला है। पहले किसी भी आपात स्थिति में मदद पहुंचने में 15 से 20 मिनट लगते थे। अब त्रिनेत्र की मदद से रिस्पॉन्स टाइम घटकर सिर्फ 5 मिनट से कम रह गया है।
पिछले कुछ समय में इस सिस्टम ने कमाल का काम करके दिखाया है। इसकी मदद से भीड़ में खोए 552 मासूम लोगों को उनके परिवार से मिलाया गया।
इतना ही नहीं, परिसर में छूटे हुए 53 कीमती सामान ढूंढकर उनके मालिकों को सौंपे गए। चोरी की 10 वारदातों को रंगे हाथों पकड़ा गया और पुलिस को वीडियो सबूत दिए गए।
इस सिस्टम ने मंदिर के सालाना खर्च में करीब 8.60 करोड़ रुपए की बड़ी बचत की है। सुरक्षा के लिए अलग से अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात करने का खर्च अब बच गया है। सिर्फ 7 महीने के अंदर ही इस प्रोजेक्ट की पूरी लागत वसूल हो चुकी है।
सिंहस्थ महाकुंभ 2028 के लिए बनेगा सुरक्षा कवच
त्रिनेत्र की सफलता को देखते हुए प्रशासन अब इसके अगले चरण पर काम कर रहा है। साल 2028 में उज्जैन की पावन धरती पर भव्य सिंहस्थ महाकुंभ का आयोजन होना है। उस समय शहर में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया गया है। इतने बड़े आयोजन के लिए इस एआई सुरक्षा ग्रिड को 8 गुना ज्यादा बड़ा किया जाएगा।
सिंहस्थ 2028 के लिए करीब 140 करोड़ रुपए का एक बड़ा बजट तैयार किया गया है। इसके तहत पूरे क्षेत्र में 35 सौ से अधिक एडवांस एआई कैमरे लगाए जाएंगे। इसमें ड्रोन सर्विलांस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित चैटबॉट जैसी आधुनिक सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।
भक्तों को दर्शन की लाइव बुकिंग और भीड़ की सही जानकारी त्रिनेत्र एआई सिस्टम से सीधे उनके मोबाइल पर मिल जाएगी। देश के अन्य बड़े धार्मिक स्थलों के लिए उज्जैन का यह मॉडल एक बेहतरीन मिसाल बन गया है।
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