महाकाल मंदिर में पहली बार सामने आया गुप्त दान का रिकॉर्ड, खजाना 472 करोड़ के पार
समझें क्या है पूरा मामला...
- उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में पिछले तीन साल में 20.92 करोड़ श्रद्धालु आए।
- इस दौरान मंदिरको कुल356 करोड़ 17 लाख रुपए कीआय हुई।
- इसमेंदान से 175करोड़ 70 लाख और लड्डूप्रसाद की बिक्रीसे 180 करोड़ 77 लाख रुपए मिले।
- पहली बार मंदिर को गुप्त दान में चार करोड़ 65 लाख रुपए भी मिले हैं।
- मंदिर के खजाने में अब कुल 472 करोड़ रुपए जमा हैं।
तीन साल का आंकड़ा
महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक के अनुसार साल 2023 में पांच करोड़ 30 लाख श्रद्धालु मंदिर आए थे। अगले साल यानी 2024 में यह संख्या बढ़कर सात करोड़ 20 लाख हो गई थी। वहीं 2025 में श्रद्धालुओं की संख्या रिकॉर्ड आठ करोड़ 42 लाख तक पहुंच गई थी।
तीनों साल को जोड़ें तो कुल आंकड़ा 20 करोड़ 92 लाख बैठता है। यह साफ दिखाता है कि हर साल भक्तों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। मंदिर प्रशासन के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है।
कहां से आया कितना पैसा
मंदिर को सबसे ज्यादा कमाई दान पेटियों से हुई। तीन साल में दान पेटी से 148 करोड़ 68 लाख रुपए जमा हुए। अकेले 2025 में यह आंकड़ा 62 करोड़ रुपए तक पहुंच गया।
इसके अलावा नकद काउंटर से नौ करोड़ 97 लाख, ऑनलाइन दान से पांच करोड़ 34 लाख और अन्न क्षेत्र से छह करोड़ 73 लाख रुपए मिले हैं। वहीं मनीऑर्डर के जरिए भी करीब 39 लाख से ज्यादा रुपए मंदिर को मिले हैं।
सबसे खास बात यह रही कि 2025 में पहली बार गुप्त दान का जिक्र सामने आया है। इसमें भक्तों ने चार करोड़ 65 लाख रुपए गुप्त रूप से दान किए। कुल मिलाकर तीन साल में दान से 175 करोड़ 70 लाख रुपए मंदिर के खाते में आए।
लड्डू प्रसाद से भी बड़ी कमाई
महाकाल मंदिर में लड्डू प्रसाद की बिक्री दान से भी तेजी से बढ़ी है। 2023 में लड्डू से 55 करोड़ रुपए की आय हुई थी। 2024 में यह आंकड़ा 60 करोड़ 77 लाख रुपए हो गया था।
2025 में लड्डू प्रसाद की बिक्री से मंदिर को 65 करोड़ रुपए मिले थे। तीन साल का कुल आंकड़ा 180 करोड़ 77 लाख रुपए तक पहुंच गया। यह दान से मिली राशि से भी ज्यादा है।
भक्तों की संख्या क्यों बढ़ी
2022 से पहले महाकाल मंदिर में रोजाना 40 से 50 हजार श्रद्धालु ही आते थे। 11 अक्टूबर 2022 को महाकाल लोक का लोकार्पण हुआ था। इसके बाद से ही हालात पूरी तरह बदल गए।
अब हर दिन डेढ़ लाख से दो लाख श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं। उज्जैन महाशिवरात्रि, सावन-भादौ महीने और नागपंचमी जैसे खास मौकों पर यह संख्या पांच से आठ लाख तक पहुंच जाती है। महाकाल लोक ने मंदिर की पहचान पूरी तरह बदल दी है। आज से समय में उज्जैन का महाकाल मंदिर दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
दान का इस्तेमाल कहां हो रहा
उज्जैन के महाकाल मंदिर की प्रबंध समिति भक्तों से मिले दान का उपयोग निर्माण कार्यों और विस्तारीकरण में कर रही है। यह काम आने वाले सिंहस्थ की तैयारी का हिस्सा है। मंदिर परिसर को और बड़ा बनाने की योजना पर काम चल रहा है।
जानकारी के अनुसार इंदौर-उज्जैन रोड पर 2200 कमरों का भक्त निवास भी बनाया जा रहा है। यह निर्माण श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए किया जा रहा है। आने वाले समय में और सुविधाएं जोड़ी जा सकती हैं।
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