महाकाल नगरी में सज रहा हजार साल पुराना शिव मंदिर, खुदाई में मिले थे सुराग
समझें क्या है पूरा मामला...
- उज्जैन महाकाल मंदिर परिसर में खुदाई के दौरान प्राचीन शिव मंदिर के अवशेष मिले थे।
- यह मंदिर करीब एक हजार साल पुराना परमारकालीन मंदिर है।
- अब उन्हीं अवशेषों से उसी प्राचीन शैली में मंदिर बनाया जा रहा है।
- पुरातत्व विशेषज्ञ इस काम की निगरानी कर रहे हैं।
- राजस्थान से बुलाए गए कारीगर मूल पत्थरों को जोड़कर मंदिर तैयार कर रहे हैं।
विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर एक बार फिर इतिहास के पन्नों को जीवंत कर रहा है। यहां एक हजार साल पुरानी धरोहर को नया रूप दिया जा रहा है। यह काम सिर्फ निर्माण नहीं, बल्कि एक पूरी सभ्यता को दोबारा खड़ा करने जैसा है।
कैसे मिले प्राचीन अवशेष
बता दें कि मई 2020 में महाकाल परिसर के विस्तारीकरण का काम चल रहा था। इसी दौरान खुदाई में 25 से 30 फीट गहराई पर पुराने अवशेष मिले। यह अवशेष परमारकालीन शिव मंदिर के थे। यह खोज पुरातत्व की दुनिया के लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई।
साल 2020-21 की खुदाई में कई अहम चीजें सामने आईं। भूमिगत गर्भगृह के अवशेष मिले। इसके साथ ही प्राचीन शिवलिंग, नंदी और गणेश की प्रतिमाएं भी निकलीं।
साथ ही मां चामुंडा और शार्दूल की मूर्तियां भी वहीं मिलीं। यह सभी अवशेष उस दौर की कला और आस्था की झलक देते हैं।
इसके अलावा भूमिज शैली में बने मंदिर के कई हिस्से भी मिले। इनमें स्तंभ, कुंभ भाग और आमलक शामिल हैं। भारवाही कीचक और कपोतिका जैसे स्थापत्य खंड भी मिले। यह सभी हिस्से मूल मंदिर की बनावट समझने में मदद कर रहे हैं।
राजस्थान के कारीगर और पत्थर
पुरातत्व विभाग ने हर अवशेष को अलग-अलग वर्गीकृत किया है। हर पत्थर पर नंबर डाला गया है। ऐसा इसलिए किया गया ताकि हर पत्थर उसकी मूल जगह पर वापस लगाया जा सके। यह काम बेहद बारीकी और सावधानी से किया जा रहा है।
इस पुनर्निर्माण के लिए राजस्थान से 28 विशेष कारीगर बुलाए गए हैं। यह कारीगर पारंपरिक शैली में पत्थर तराशने में माहिर हैं। जहां तक संभव है, वहां खुदाई में मिले मूल पत्थरों को ही प्राथमिकता दी जा रही है।
बता दें कि जहां पत्थर कम पड़ रहे हैं या क्षतिग्रस्त हैं, वहां नए पत्थर मंगवाए गए हैं। राजस्थान से खास बेसाल्ट यानी काले पत्थर लाए गए हैं। कारीगर इन पत्थरों को भी उसी प्राचीन शैली में तराश रहे हैं।
मंदिर की ऊंचाई और लागत
नया मंदिर महाकाल मंदिर के मुख्य शिखर के ठीक सामने बन रहा है। इसकी ऊंचाई करीब 36 से 37 फीट रखी जा रही है। यह ऊंचाई मूल मंदिर की बनावट को ध्यान में रखकर तय की गई है।
इस पूरी परियोजना पर करीब 65 से 90 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान है। यह लागत पत्थरों, कारीगरों और निर्माण सामग्री पर आधारित है।
कब तक पूरा होगा निर्माण
मंदिर का आधार बनकर तैयार हो चुका है। यह पहला और सबसे अहम चरण माना जाता है। अब ऊपर के हिस्से पर काम चल रहा है।
विशेषज्ञों का लक्ष्य है कि यह काम अगले डेढ़ साल में पूरा हो जाए। यानी यह मंदिर 2027 के अंत तक पूरी तरह तैयार हो सकता है। इसके बाद श्रद्धालु इस प्राचीन मंदिर के दर्शन कर सकेंगे।
FAQ
- महाकाल परिसर में प्राचीन मंदिर के अवशेष कब मिले थे?
यह अवशेष मई 2020 में विस्तारीकरण के दौरान मिले थे। खुदाई करीब 25 से 30 फीट गहरी थी। इसमें परमारकालीन शिव मंदिर के अवशेष सामने आए। - उज्जैन में नए मंदिर के निर्माण में किन पत्थरों का उपयोग हो रहा है?
मुख्य रूप से खुदाई में मिले मूल पत्थरों का उपयोग किया जा रहा है। जहां पत्थर कम हैं, वहां राजस्थान से बेसाल्ट पत्थर मंगवाए गए हैं। यह काम राजस्थान के 28 कारीगर कर रहे हैं। - उज्जैन में मंदिर का निर्माण कब तक पूरा होगा?
मंदिर का आधार तैयार हो चुका है। विशेषज्ञों का लक्ष्य इसे डेढ़ साल में पूरा करना है। यह काम 2027 के अंत तक पूरा हो सकता है।
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