उज्जैन बन सकता है मीट‑फ्री जोन, शहरी सीमा से बाहर दुकानों की शिफ्टिंग तय!

Sandeep Kumar | Jun 09, 2026, 07:30 IST
उज्जैन शहर में बन सकता है मीट फ्री जोन
उज्जैन महापौर ने मांस दुकानें शहर सीमा से बाहर करने का प्रस्ताव तैयार करने के आदेश दिए। सिंहस्थ 2028 और महाकाल नगरी की धार्मिक पहचान इस कदम की वजह बताई जा रही है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • महापौर ने शहर सीमा से बाहर मांस दुकानों का प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए।
  • उज्जैन में मटन-चिकन दुकानें और होटल संचालित हैं।
  • महाकाल मंदिर के 500 मीटर के भीतर भी मांस कारोबार होता है।
  • सिंहस्थ-2028 को देखते हुए धार्मिक क्षेत्रों के लिए नई नीति पर विचार।
  • मीट व्यापारियों ने वैकल्पिक जगह और सुविधाओं की मांग की।

वाराणसी के बाद अब उज्जैन की बारी

उत्तरप्रदेश में वाराणसी ने पहले यह कदम उठाया था। वहां मांस की दुकानों को शहर सीमा से बाहर करने की पहल हुई। अब मध्यप्रदेश की महाकाल नगरी उज्जैन में भी यही बहस शुरू हो गई है।



महापौर मुकेश टटवाल ने नगर निगम आयुक्त को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि नीति-नियमों के तहत प्रस्ताव तैयार किया जाए। यह प्रस्ताव महापौर परिषद एमआइसी के सामने रखा जाएगा। महापौर का कहना है कि शहर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान सर्वोपरि है। इसी को ध्यान में रखते हुए दुकानें शहर सीमा से बाहर करने पर विचार हो रहा है।



उज्जैन की धार्मिक अहमियत

उज्जैन देश की प्रमुख धार्मिक नगरियों में से एक है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु महाकालेश्वर के दर्शन और शिप्रा नदी में स्नान के लिए आते हैं। सीएम मोहन यादव का गृहनगर भी उज्जैन ही है। सिंहस्थ-2028 की तैयारियां शहर में शुरू हो चुकी हैं। महाकाल लोक के विकास के बाद यहां श्रद्धालुओं की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। इन्हीं वजहों से शहर की धार्मिक छवि और पवित्रता को लेकर नई बहस छिड़ गई है।



सैकड़ों दुकानें, कई के पास लाइसेंस नहीं

अभी शहर में सैकड़ों से अधिक मटन-चिकन की दुकानें और होटल संचालित हैं। इनमें से बड़ी संख्या के पास वैध लाइसेंस नहीं होने की बात सामने आती रही है। महाकाल मंदिर से करीब 500 मीटर दूर तोपखाना और आसपास के इलाकों में मांस का कारोबार होता है। पहले भी प्रशासन मंदिर के 200 मीटर दायरे से मांस और अंडे की कई दुकानें हटवा चुका है। व्यापारियों को मांस ढंककर बेचने के निर्देश भी दिए गए थे। अब महापौर के रुख से साफ है कि केवल ढंककर बिक्री काफी नहीं मानी जाएगी।



एमआईसी बैठक में होगा फैसला

मंगलवार को होने वाली एमआईसी बैठक में इस विषय पर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है। बैठक के नतीजे तय करेंगे कि आगे क्या नीति बनेगी।



सिंहस्थ 2028 से पहले नई नीति की तैयारी

सिंहस्थ-2028 को देखते हुए प्रशासन और नगर नियोजन विशेषज्ञ दीर्घकालिक नीति पर काम कर रहे हैं। प्रमुख धार्मिक क्षेत्रों के आसपास विशेष पवित्र परिधि तय करने का प्रस्ताव सामने आ सकता है। इस परिधि में मांस और मछली के क्रय-विक्रय को प्रतिबंधित करने की योजना है। धर्माचार्यों और मंदिर प्रबंधन से जुड़े लोगों का मत है कि महाकाल नगरी को पूरी तरह मीट-फ्री जोन बनाया जाना चाहिए।



व्यापारियों की मांग: पहले जगह दो

मीट व्यापारियों ने भी अपना पक्ष रखा है। उनका कहना है कि शहर से बाहर भेजने से पहले वैकल्पिक जगह दी जाए। साथ ही बुनियादी सुविधाएं और व्यवस्थित बाजार भी उपलब्ध कराना होगा। व्यापारियों की मांग है कि उनकी आजीविका प्रभावित न हो। बिना पर्याप्त व्यवस्था के स्थानांतरण से उन पर आर्थिक संकट आ सकता है।



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