उज्जैन के नागचंद्रेश्वर के दर्शन को उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 10 लाख भक्त पहुंचे
उज्जैन में सोमवार को अद्भुत नजारा देखने को मिला। श्रावण का तीसरा सोमवार और नागपंचमी एक साथ पड़े। यह मौका सालों बाद बना। इसी वजह से महाकाल मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।
ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर परिसर में स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट साल में सिर्फ एक बार खुलते हैं। यह मौका नागपंचमी के दिन ही मिलता है। इस बार 10 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन किए। वहीं शाम को महाकाल की तीसरी सवारी निकली, जिसमें दो लाख से अधिक भक्त शामिल हुए।
24 घंटे चला दर्शन
दर्शन का सिलसिला रविवार-सोमवार की मध्यरात्रि से शुरू हुआ। यह सोमवार रात 12 बजे तक लगातार चला। पूरे 24 घंटे मंदिर के पट खुले रहे।
होल्डिंग क्षेत्र और सुरक्षा
करीब तीन किलोमीटर के दायरे में अलग-अलग होल्डिंग क्षेत्र बनाए गए। इनमें श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से रोका गया। पुलिस, प्रशासन और सुरक्षा गार्डों ने चलायमान दर्शन व्यवस्था संभाली। सुबह के समय भारी भीड़ के कारण कुछ देर के लिए व्यवस्था बिगड़ी। इस दौरान कुछ लोग घायल भी हुए।
मंदिर की परंपरा के अनुसार दोपहर 12 बजे भगवान नागचंद्रेश्वर की शासकीय पूजा हुई। शाम 7:30 बजे महाकाल की संध्या आरती के बाद पुजारियों ने पूजा-अर्चना की। रात 12 बजे महानिर्वाणी अखाड़े की पूजा के साथ मंदिर के पट फिर एक साल के लिए बंद कर दिए गए।
नागपंचमी के मौके पर महानिर्वाणी अखाड़े ने मंदिर के शिखर पर नया ध्वज भी चढ़ाया। यह परंपरा हर साल इसी दिन निभाई जाती है। इस बार भी यह आयोजन का अहम हिस्सा रहा।
महाकाल की तीसरी सवारी
श्रावण के तीसरे सोमवार पर महाकाल की तीसरी सवारी निकली। इस बार यह नागपंचमी के महासंयोग में निकली, इसलिए इसका महत्व और बढ़ गया। दोपहर 3:30 बजे सभा मंडपम में रजत मुखारविंदों का पूजन हुआ। इसके बाद सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई।
सवारी में तीन स्वरूप शामिल रहे। चंद्रमौलेश्वर स्वरूप चांदी की पालकी में विराजित था। मनमहेश स्वरूप सुमा हाथी पर सवार था। शिवतांडव स्वरूप गरुड़ रथ पर था।
मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र बल की टुकड़ी ने भगवान महाकाल को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। इसके बाद सवारी कोट मोहल्ला, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी से होते हुए रामघाट पहुंची। वहां शिप्रा जल से भगवान का अभिषेक किया गया।
पूजन के बाद सवारी शाम करीब सात बजे मंदिर लौटी। सेना, पुलिस और महाकालेश्वर बैंड ने रास्ते भर प्रस्तुतियां दीं। पांच किलोमीटर लंबे इस मार्ग पर करीब चार घंटे तक भक्ति का माहौल छाया रहा।
नागचंद्रेश्वर की कथा
नागचंद्रेश्वर मंदिर साल में सिर्फ नागपंचमी पर ही 24 घंटे के लिए खुलता है। इसके पीछे एक पुरानी मान्यता जुड़ी है। कहा जाता है कि नागराज तक्षक ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी।
शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए। उन्होंने तक्षक को अमरत्व का वरदान दिया। इसके बाद तक्षक ने शिव के पास ही रहने की इच्छा जताई। मान्यता है कि तभी से तक्षक नाग महाकाल वन में इसी स्थान पर निवास करते हैं।
उनकी एकांत साधना में विघ्न न हो, इसलिए मंदिर पूरे साल बंद रखा जाता है। सिर्फ नागपंचमी पर ही श्रद्धालुओं को उनके दर्शन का मौका मिलता है। यही वजह है कि इस दिन देशभर से भक्त उज्जैन पहुंचते हैं।
अब आगे क्या होगा
मंदिर के पट अब अगले साल नागपंचमी तक बंद रहेंगे। इस दौरान महानिर्वाणी अखाड़े के साधु-संत मुख्य द्वार पर नियमित प्रतीकात्मक पूजा करेंगे। यह क्रम पूरे साल चलता रहेगा।
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