उज्जैन में बनेगा नमो घाट, शिप्रा किनारे लगेगी 182 फीट ऊंची श्रीकृष्ण प्रतिमा
समझें क्या है पूरा मामला
- उज्जैन में शिप्रा तट पर नमो घाट बनेगा।
- घाट वाराणसी के नमो घाट की तर्ज पर होगा।
- यहां कृष्ण की 182 फीट प्रतिमा लगेगी।
- हर शाम शिप्रा नदी की आरती होगी।
- यूडीए ने दो साल में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
कहां बनेगी प्रतिमा
यूडीए के अनुसार प्रतिमा हरिफाटक बायपास पर यूनिटी मॉल के पीछे क्षिप्रा नदी किनारे बनेगी। इसी क्षेत्र में घाटों का विकास भी किया जाएगा। मकसद है इस जगह को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों का बड़ा केंद्र बनाना। आने वाले समय में यह उज्जैन का नया आकर्षण बन सकता है। शहर में पहले से मौजूद मंदिरों और घाटों के साथ यह इलाका भी श्रद्धालुओं की सूची में जुड़ जाएगा।
कांस्य से बनेगी प्रतिमा
प्रतिमा में ब्रॉन्ज यानी कांस्य धातु का इस्तेमाल होगा। अंदरूनी ढांचा स्टेनलेस स्टील का बनाया जाएगा। इससे प्रतिमा मजबूत और सुरक्षित रहेगी। इसके स्ट्रक्चरल डिजाइन के लिए उस इंजीनियर की मदद ली गई है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल की विशाल प्रतिमा से भी जुड़े रहे हैं। यह जानकारी भरोसे और गुणवत्ता को लेकर अहम है। इतनी बड़ी प्रतिमा तैयार करने में तकनीकी अनुभव की भूमिका सबसे ज्यादा मानी जाती है।
हर शाम होगी आरती
नमो घाट पर हर शाम शिप्रा आरती और पूजन की व्यवस्था होगी। श्रद्धालु एक ही जगह भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप के दर्शन कर सकेंगे। साथ ही शिप्रा आरती में भी शामिल हो सकेंगे। यह अनुभव उज्जैन आने वाले पर्यटकों के लिए खास होगा। शाम के समय आरती होने से यह जगह रोज हजारों लोगों को आकर्षित कर सकती है।
यूडीए अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी के मुताबिक यह परियोजना मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप तैयार की जा रही है। करीब दो साल में पूरा काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्राधिकरण इसे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रहा है। प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करने के लिए अलग टीम भी बनाई जा सकती है।
यूनिटी मॉल के साथ विकास
जिस इलाके में प्रतिमा और घाट बन रहे हैं, वहीं करीब 260 करोड़ रुपए की लागत से यूनिटी मॉल भी बन रहा है। मॉल में देश-विदेश के उत्पादों के लिए जगह होगी। इसके अलावा कैफेटेरिया, होटल और कॉन्फ्रेंस हॉल जैसी सुविधाएं भी प्रस्तावित हैं। घाट, प्रतिमा और मॉल मिलकर इस क्षेत्र को नया रूप देंगे। इससे स्थानीय व्यापार और रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है।
घाट, प्रतिमा और मॉल को साथ विकसित करने की योजना है। इससे यह इलाका उज्जैन का नया धार्मिक-पर्यटन केंद्र बन सकता है। सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए शहर में नई सुविधाएं बनाई जा रही हैं। प्रशासन का फोकस पर्यटकों की संख्या बढ़ाने पर भी है। सिंहस्थ के दौरान करोड़ों श्रद्धालु उज्जैन आते हैं, इसलिए तैयारियां अभी से शुरू की गई हैं।
शहर का नया लैंडमार्क
182 फीट ऊंची यह प्रतिमा उज्जैन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी। महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल लोक के बाद क्षिप्रा तट का यह इलाका श्रद्धालुओं के लिए नया केंद्र बन सकता है। शहर में पर्यटकों की भीड़ लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यह प्रोजेक्ट शहर की पहचान को और मजबूत करेगा। पर्यटन बढ़ने से स्थानीय होटल, दुकानदार और परिवहन कारोबार को भी फायदा मिलेगा।
प्रदेश की बड़ी प्रतिमाओं में जगह
मध्य प्रदेश में पहले से कई विशाल प्रतिमाएं मौजूद हैं। ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की 108 फीट ऊंची प्रतिमा है। छिंदवाड़ा के रामेश्वरधाम में 81 फीट ऊंची शिव प्रतिमा है। जबलपुर की कचनार सिटी में 76 फीट ऊंची शिव प्रतिमा है। इन सबके मुकाबले उज्जैन की 182 फीट प्रतिमा प्रदेश में सबसे ऊंची और अलग पहचान वाली होगी। इससे प्रदेश की धार्मिक पर्यटन सूची में एक और बड़ा नाम जुड़ जाएगा।
शिव संग विष्णु परंपरा
डॉ. रवि सोलंकी के अनुसार महाकाल की नगरी में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की परंपरा को भी विस्तार देना इस परियोजना का मकसद है। प्रतिमा, नमो घाट, आरती स्थल और यूनिटी मॉल मिलकर इस पूरे इलाके को उज्जैन के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल कर सकते हैं। आने वाले वर्षों में यह जगह शहर की पहचान का अहम हिस्सा बन सकती है। फिलहाल प्रशासन जमीन और डिजाइन से जुड़ी तैयारियों में जुटा है।
उज्जैन पहले से ही देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए बड़ा धार्मिक केंद्र है। महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल लोक की वजह से यहां हर साल लाखों लोग आते हैं। नमो घाट और भगवान कृष्ण की विशाल प्रतिमा बनने से शहर में एक और बड़ा आकर्षण जुड़ जाएगा। इससे उज्जैन की पहचान सिर्फ शिव नगरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह विष्णु भक्ति का भी बड़ा केंद्र बन सकता है।
FAQ
- उज्जैन में कृष्ण प्रतिमा कितनी ऊंची होगी?
भगवान कृष्ण की यह प्रतिमा 182 फीट ऊंची होगी। यह प्रदेश की अब तक की सबसे ऊंची प्रतिमाओं में शामिल होगी। प्रतिमा में कांस्य धातु का इस्तेमाल किया जाएगा। - नमो घाट प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा?
यूडीए के अनुसार यह प्रोजेक्ट करीब दो साल में पूरा हो जाएगा। यह लक्ष्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप रखा गया है। घाट और प्रतिमा दोनों साथ तैयार होंगे।
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