शिप्रा आरती पर विवाद: पुरोहित बोले-आरती हम ही करेंगे, प्रशासन अपना काम करें
समझें क्या है पूरा मामला...
- उज्जैन के रामघाट पर होने वाली शिप्रा आरती विवाद में फंस गई है।
- 11 साल से पुरोहित यह आरती कराते आ रहे थे।
- अब महाकाल मंदिर समिति ने बटुकों को जिम्मेदारी सौंप दी है।
- गुरुवार को दोनों पक्षों ने अलग-अलग जगह आरती की।
- शुक्रवार शाम को भी टकराव की आशंका बनी हुई है।
उज्जैन के रामघाट पर होने वाली शिप्रा आरती अचानक विवाद का विषय बन गई है। यह आरती करीब 11 साल से तीर्थ पुरोहित कराते आ रहे थे।
वहीं अब महाकाल मंदिर समिति ने यह जिम्मेदारी बटुकों को सौंप दी है। इस फैसले के बाद पुरोहित और प्रशासन आमने-सामने आ गए हैं।
गुरुवार, 06 अगस्त को भी रामघाट पर दोनों पक्षों ने अलग-अलग जगह आरती की। शिप्रा नदी और रामघाट उज्जैन की धार्मिक पहचान का अहम हिस्सा हैं। यही वजह है कि यह विवाद चर्चा का विषय बन गया है।
गुरुवार को क्या हुआ रामघाट पर
बता दें कि गुरुवार शाम उज्जैन महाकाल मंदिर समिति के बटुक शिप्रा आरती करने रामघाट पहुंचे। उसी समय पंडा समिति के पुरोहित भी वहां आ गए।
स्थिति तनावपूर्ण होती देख एसडीएम एलएन गर्ग ने पुरोहितों से आरती न करने की अपील की। साथ ही उन्होंने पुरोहितों को बटुकों के साथ शामिल होने को भी कहा। पुरोहित इस पर राजी नहीं हुए।
आखिरकार दोनों पक्षों ने अलग-अलग स्थानों पर आरती की। बटुकों ने रामघाट के एक हिस्से में आरती की। पुरोहितों ने अपनी तय जगह पर परंपरा निभाई।
शुक्रवार को फिर जुटे पुरोहित
बता दें कि शुक्रवार को तीर्थ पुरोहित एक बार फिर रामघाट पर एकत्रित हुए। उन्होंने साफ कहा कि शाम की आरती वे खुद कराएंगे।
दूसरी ओर प्रशासन की टीम भी शाम को रामघाट पहुंचने वाली है। दोनों पक्ष अपनी बात पर अड़े हैं। ऐसे में विवाद और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
पुरोहितों का सवाल
पंडा समिति के पदाधिकारी राजेश त्रिवेदी ने प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 से पुरोहित लगातार शिप्रा आरती कराते आ रहे हैं।
इन वर्षों में आरती का स्वरूप भी भव्य बनाया गया। त्रिवेदी ने कहा कि अचानक जिम्मेदारी बदलना पुरोहितों को बाहर करने जैसा है।
त्रिवेदी ने यह भी कहा कि पुरोहित हर हाल में आरती करेंगे। मंदिर समिति को आरती नहीं करने दी जाएगी, यह बात उन्होंने साफ शब्दों में कही।
प्रशासन से राजेश त्रिवेदी ने अपना काम करने और पुरोहितों को उनका काम करने देने की अपील की। जरूरत पड़ने पर कार्रवाई का सामना करने से भी पीछे न हटने की बात उन्होंने दोहराई।
प्रशासन का पक्ष
वहीं एसडीएम एलएन गर्ग ने प्रशासन का पक्ष रखा। उनके अनुसार पुरोहितों को बटुकों के साथ मिलकर आरती करने का प्रस्ताव दिया गया था। इससे दोनों पक्ष मिलकर परंपरा निभा पाते लेकिन पुरोहित इसके लिए तैयार नहीं हुए।
एसडीएम ने बताया कि अब रोजाना आरती महाकाल मंदिर समिति की ओर से ही कराई जाएगी। शुक्रवार शाम भी रामघाट पर आरती तय कार्यक्रम के अनुसार होगी।
रामघाट की परंपरा
बता दें कि रामघाट शिप्रा नदी के किनारे स्थित प्रमुख घाटों में से एक है। यहां रोजाना होने वाली आरती देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उज्जैन सिंहस्थ कुंभ के दौरान भी रामघाट की भूमिका अहम रहती है।
यही कारण है कि आरती की जिम्मेदारी को लेकर उठा विवाद संवेदनशील माना जा रहा है। धार्मिक परंपराओं से जुड़े मामलों में प्रशासनिक फैसले अक्सर विरोध का सामना करते हैं।
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