सेवाधाम आश्रम में बच्चों की मौत की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश, तत्काल मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं
NEWS IN SHORT
- सेवाधाम आश्रम में 1056 दिव्यांग और बेसहारा लोग बेहद खराब परिस्थितियों में रह रहे हैं।
- रिपोर्ट के अनुसार आश्रम में इमरजेंसी मेडिकल सुविधा और स्थायी डॉक्टर मौजूद नहीं हैं।
- मानसिक रोगियों की सात लाख 70 हजार रुपए की दवाओं का प्रस्ताव अब तक मंजूरी का इंतजार कर रहा है।
- कई दिव्यांगों के पास आयुष्मान और आधार कार्ड न होने से सरकारी इलाज नहीं मिल पा रहा है।
News In Detail
इंदौर के युगपुरुष आश्रम में 10 बच्चों की मौत के बाद, उज्जैन के सेवाधाम आश्रम भेजे गए बच्चों की मौत का मामला अब हाई कोर्ट में पहुंच चुका है। इस मामले में इंदौर खंडपीठ (हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ) में ने आखिरी रिपोर्ट पेश की गई है।
आश्रम में तत्काल मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं
रिपोर्ट में कहा गया है कि सेवाधाम आश्रम में 1056 दिव्यांग और परित्यक्त लोग रह रहे हैं। वहां उनकी तत्काल मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसे एक बड़ी कमी माना गया है। इस मामले पर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।
अधिकारियों का आश्रम दौरा
जानकारी के अनुसार 7 मार्च को वरिष्ठ वकील अमित एस. अग्रवाल और उप महाधिवक्ता सुदीप भार्गव ने आश्रम का दौरा किया था। इस दौरे में प्रशासनिक अधिकारी भी शामिल थे। साथ ही कलेक्टर और एसपी भी मौजूद थे।
रिपोर्ट में कई बड़ी कमियां सामने आईं
रिपोर्ट में कई बड़ी कमियां सामने आई है। आश्रम में 1000 से ज्यादा दिव्यांग और परित्यक्त लोग रह रहे हैं। इलाज के लिए यहां कोई स्थायी मेडिकल वार्ड या इमरजेंसी सुविधा नहीं है। इतने बड़े आश्रय गृह में कोई नियमित डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ नहीं है। इससे बीमार आश्रितों को तुरंत इलाज मिलने में मुश्किल होती है।
मानसिक रोगियों के इलाज के लिए 23 तरह की दवाओं का प्रस्ताव भेजा गया था। इसकी लागत करीब सात लाख 70 हजार रुपए है। अब तक इसे मंजूरी नहीं मिली है। आश्रम में रहने वाले कई लोगों के यूडीआईडी, आधार और आयुष्मान कार्ड नहीं बन पाए हैं। इस कारण उन्हें सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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