उज्जैन शाही मस्जिद पर इंदौर हाईकोर्ट का आदेश: निगम के सभी आश्वासन अब बाध्यकारी, रिट अपील खारिज
हाईकोर्ट ने आदेश में यह लिखा
हाईकोर्ट ने लिखा है कि मामले में बताया गया है कि अपीलकर्ता और उज्जैन नगर निगम के बीच मामला सुलझ चुका है। हालांकि, समझौते का विवरण इस कोर्ट के पास नहीं है। फिर भी अपीलकर्ता के अधिवक्ता द्वारा किए गए अनुरोध पर विचार करते हुए और पक्षों के बीच हो चुके समझौते को देखते हुए अपील को वापस लिया हुआ मानकर खारिज किया जाता है।
उज्जैन निगम आश्वासन पूरा करेगा
आदेश में आगे लिखा गया है कि यह कहने की जरूरत नहीं है कि उज्जैन निगम द्वारा दिए गए आश्वासन, जिनका उल्लेख उनके जवाबों और नोटिस में भी किया गया है, वे सभी निगम पर बाध्यकारी होंगे। इसके साथ याचिका को खारिज किया जाता है।
निगम ने क्या किया है वादा
इस मामले में हाईकोर्ट में रिट अपील में इसका खुलासा नहीं किया गया है। यह बात जरूर मस्जिद पक्ष से सामने आई थी कि वह समझौते के तहत खुद ही बाधक हिस्सा हटा रहे हैं।
वहीं, रिट पिटीशन में जरूर उज्जैन निगम द्वारा विस्तृत जवाब दिया गया था। इसमें कहा गया कि मुआवजे के तौर पर एफएआर की पेशकश की गई है और वैकल्पिक रूप से टीडीआर की भी पेशकश की जा रही है। यह एरिया टीडीआर जनरेटिंग एरिया में घोषित है।
यानी जो बाधक हिस्सा हटाया जाएगा, उसके बदले में मस्जिद पक्ष को नियमानुसार एफएआर और टीडीआर मिलेगा।
खुद हटा रहे मस्जिद का हिस्सा
उज्जैन में कंठाल से गोपाल मंदिर मार्ग पर सड़क चौड़ीकरण के लिए छत्री चौक स्थित शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का काम मंगलवार सुबह से शांतिपूर्वक जारी है।
सहमति के बाद कमेटी के सदस्य और मुस्लिम समाज के लोग स्वयं ही अपने हाथों से प्रभावित निर्माणों को हटाने में जुट गए हैं। मस्जिद के नीचे संचालित हो रहीं करीब 10 दुकानों को भी देर रात खाली करा लिया गया था।
उधर, सोशल मीडिया पर शाही मस्जिद को लेकर कई भ्रामक वीडियो और रील्स प्रसारित की गई थीं। इस मामले में अफवाह फैलाने वाले साजिद खान, इमरान खान, गुलरेज खान और बिल्लू पठान के नाम भी सामने आए हैं।
इसी तरह पथराव करने के मामले में पुलिस ने बिलाल, तालू हेला, नदीम, शाकिर, तौफिक, सलीम, शाहनवाज, आर्षद दीवान, अल्तमस, अरबाज और वसीम मंसूरी सहित 15 लोगों पर भी कार्रवाई की गई।
इनके द्वारा लगाई गई थीं याचिकाएं
दो याचिकाएं थीं। एक शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान चाउ बाजार, उज्जैन की ओर से शीर अशफाक अहमद द्वारा लगाई गई थी।
दूसरी शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान म्यूनिसिपल, उज्जैन की ओर से अशफाक अहमद द्वारा लगाई गई थी।
इसमें पक्षकार मध्यप्रदेश शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, निगम बिल्डिंग ऑफिसर, कलेक्टर उज्जैन और सीईओ मध्यप्रदेश वक्फ बोर्ड को बनाया गया था।
बेवजह धार्मिक रंग दिया जा रहा- सिंगल बेंच
सिंहस्थ 2028 के लिए कोयला फाटक से गोपाल मंदिर तक रोड को 15 मीटर चौड़ा किया जाना है। यहां कुल 323 मकान और 15 धर्मस्थल चौड़ीकरण की जद में हैं।
कोयला फाटक से कंठाल चौराहे तक 8 धर्मस्थलों को शिफ्ट किया जा चुका है। लेकिन जब नगर निगम कंठाल से गोपाल मंदिर की ओर आगे बढ़ा और छत्री चौक पर शाही मस्जिद के बाधक हिस्से को हटाने की बात सामने आई, तब विवाद शुरू हुआ।
हाईकोर्ट रिट पिटीशन आदेश में 27 पेज के लंबे आदेश में कह चुका है कि इसे बेवजह धार्मिक रंग दिया जा रहा है। सभी पर समान कार्रवाई हो रही है और करोड़ों श्रद्धालुओं के सिंहस्थ में आवागमन को देखते हुए यह जरूरी है।
- इंदौर हाईकोर्ट ने उज्जैन शाही मस्जिद की रिट अपीलें क्यों खारिज कीं?
इंदौर हाईकोर्ट ने यह रिट अपीलें खारिज कर दीं क्योंकि अपीलकर्ता और नगर निगम के बीच मामला सुलझ चुका था और अपीलों को वापस लिया गया था। अदालत ने निगम के द्वारा दिए गए आश्वासनों को बाध्यकारी माना। - शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का कार्य कब और कैसे किया जा रहा है?
शाही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने का कार्य मंगलवार सुबह से शांतिपूर्वक जारी है, जिसमें मुस्लिम समाज के लोग स्वयं अपने हाथों से प्रभावित निर्माण को हटा रहे हैं। - नगर निगम के वादे (FAR और TDR) क्या हैं और ये कैसे कार्य करेंगे?
नगर निगम ने मुआवजे के बतौर एफएआर (Floor Area Ratio) और वैकल्पिक तौर पर टीडीआर (Transferable Development Rights) की पेशकश की है, जिसके तहत बाधक हिस्सा हटने के बाद मस्जिद पक्ष को निर्माण का अधिकार मिलेगा।