उज्जैन की 100 साल पुरानी शाही मस्जिद तोड़ने की कार्रवाई पर नहीं हुआ स्टे, याचिकाएं खारिज

Sanjay Gupta | Sept 09, 2026, 17:31 IST
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उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के तहत सड़क चौड़ीकरण के दायरे में सौ साल पुरानी शाही मस्जिद भी आ रही है। उज्जैन नगर निगम द्वारा रिमूवल का नोटिस दिया गया है। इसके खिलाफ दो याचिकाएं हाईकोर्ट इंदौर में लगीं। ये बुधवार को खारिज हो गईं।

Indore. उज्जैन सिंहस्थ 2028 को लेकर गोपाल मंदिर वाली रोड चौड़ी करने में एक बड़ा फैसला हुआ है। मार्ग में आ रही 100 साल पुरानी शाही मस्जिद तोड़ने के लिए उज्जैन नगर निगम द्वारा नोटिस दिया गया है। इस कार्रवाई के खिलाफ मुस्लिम समाज विरोध में है। वहीं, इसे लेकर दो याचिकाएं इंदौर हाईकोर्ट में दायर हुईं।



इनके द्वारा लगाई गई याचिकाएं

एक याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान प्रतिनिधि अशफाक अहमद और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी वक्फ पंच मोचियान प्रतिनिधि वाइस चेयरमैन अशफाक अहमद की ओर से लगी। इसमें मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, बिल्डिंग ऑफिसर और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया।



वहीं, दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान प्रेसीडेंट अरशान हुसैन की ओर से लगी। इसमें मप्र शासन, उज्जैन निगम व मप्र वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया।



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दोनों याचिकाएं खारिज, आदेश आना बाकी

दोनों ही मामलों में एक साथ बुधवार को जस्टिस संदीप एन. भट्ट की बेंच में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया गया। हालांकि, अभी औपचारिक आदेश आना बाकी है। वहीं, याचिकाकर्ता के अधिवक्ता सैय्यद अशहर अली वारसी ने कहा कि विस्तृत आदेश बाकी है। हालांकि, याचिकाएं निरस्त की गई हैं। हम अपील में जाएंगे।



मस्जिद प्रबंधन की यह है आपत्ति

शहर काजी, शाही वक्फ पंचायत सहित मुस्लिम समाज द्वारा नोटिस पर आपत्ति जताई जा रही है। शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान ने नगर निगम के भवन अधिकारी द्वारा जारी सूचना पत्र को अपूर्ण, अस्पष्ट और अवैधानिक बताते हुए आपत्ति दर्ज कराई है।



पंचायत ने ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि शाही मस्जिद 100 वर्ष से अधिक पुरानी और मुगलकालीन मस्जिद है। पंचायत के अनुसार, 17 मार्च 1925 को सिंधिया राजघराने के चेयरमैन, टाउन इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट, ग्वालियर सरकार लश्कर की ओर से शहर काजी को पत्र जारी किया गया था। इसमें कुछ भूमि अधिग्रहित किए जाने के बाद शेष मस्जिद को यथावत रखा गया था।



पंचायत ने यह भी बताया कि 13 सितंबर 1985 के मध्यप्रदेश शासन के राजपत्र में मस्जिद और उसकी पैमाइश का स्पष्ट उल्लेख है। इसके अलावा, वर्ष 1975 में आवागमन सुगम बनाने के लिए मस्जिद की ओर से स्वेच्छा से भूमि दिए जाने का भी दावा किया गया है।



पंचायत का कहना है कि उस समय सामने स्थित मकान से कोई भूमि अधिग्रहित नहीं की गई। वर्तमान में सड़क लगभग 40 फीट चौड़ी है और आवागमन में कोई बाधा नहीं है। पंचायत ने आरोप लगाया कि केवल धार्मिक स्थल को हटाने के उद्देश्य से कार्रवाई की जा रही है और इसे द्वेषपूर्ण बताया।



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