उज्जैन शाही मस्जिद विवाद ने बढ़ाई कांग्रेस की टेंशन, AIMIM खुलकर उतरी, विधायक आरिफ मसूद के साथ कोई नहीं
स्थानीय कांग्रेस नेताओं और विधायकों के नहीं आने पर मसूद ने कहा कि यह अफसोस की बात है। इसकी शिकायत प्रदेश अध्यक्ष से की जाएगी। इंचार्ज जनरल सेक्रेटरी को भी इसकी जानकारी देंगे। इसी मुद्दे को असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने भी उठाया। पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष मोहसिन अली मौके पर पहुंचे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें डिटेन कर लिया।
मुस्लिम वोट को अपने साथ करने में जुटी AIMIM
विधानसभा चुनाव 2023 में AIMIM ने चार सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इसमें जबलपुर पूर्व के साथ इंदौर विधानसभा एक और पांच व बुरहानपुर सीट थी। इन चारों सीटों पर AIMIM को 38 हजार 616 वोट मिले थे। यह कुल वोटों का 0.09 फीसदी था।
अब ओवैसी की पार्टी की नजर 2028 के विधानसभा चुनाव पर है। इसके लिए मुस्लिम वोट बैंक को कांग्रेस से अपनी ओर शिफ्ट करने की तैयारी में जुट गई है।
इसके लिए पार्टी ने मुस्लिम समुदाय से जुड़े मुद्दों पर खुलकर उतरने की रणनीति बना ली है। खासकर उन मुद्दों पर फोकस किया जा रहा है जिनसे कांग्रेस दूरी बना रही है।
क्या बोल रहे प्रदेशाध्यक्ष
AIMIM के प्रदेशाध्यक्ष मोहसिन अली ने द सूत्र से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पार्टी इस विधानसभा चुनाव में ज्यादा सीटों पर उतरेगी। अली के मुताबिक बीजेपी कभी मुस्लिमों के साथ नहीं रही। अब कांग्रेस भी मुस्लिम मुद्दों से दूरी बना रही है।
उन्होंने उज्जैन शाही मस्जिद विवाद का भी जिक्र किया। अली ने कहा कि कांग्रेस का कोई नेता विधायक मसूद के साथ नहीं गया। उनका आरोप है कि सभी दल मुस्लिम वोट चाहते हैं लेकिन उनके लिए सामने नहीं आते।
मोहसिन अली ने वंदे मातरम और यूसीसी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इन मामलों में मुस्लिम हित की बात नहीं की।
अली ने वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सनवर पटेल पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पटेल अब मुस्लिम हित की बात नहीं कर रहे। अली का आरोप है कि शाही मस्जिद मामले में भी अलग बातें फैलाई जा रही हैं। इससे मुस्लिम युवाओं को गुमराह किया जा रहा है।
वंदेमातरम विवाद से पहले ही नाराजगी
इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम विवाद के बाद कांग्रेस में नाराजगी दिख रही है। खासकर मुस्लिम पार्षद पार्टी से नाराज हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस को उनसे सिर्फ वोट चाहिए।
कांग्रेस पार्षद रूबीना इकबाल खान ने भी खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने पार्टी के रवैये पर सवाल उठाए। वहीं शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे ने और आग में घी का काम किया। उन्होंने कहा कि रूबीना को पार्टी से बाहर ही समझें।
चौकसे ने यह भी कहा कि वंदे मातरम पूरा गाया जाएगा। जो इसे नहीं गा सकता वह कांग्रेस के आयोजन में न आए।
दिग्विजय सिंह के साथ भी नहीं आए थे नेता
एक साल पहले इंदौर के शीतलामाता बाजार में विवाद हुआ था। उस समय विधायक पुत्र एकलव्य गौड़ ने कहा था कि कोई मुस्लिम कारीगर काम नहीं करेगा। इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह बाजार पहुंचे थे। उनके दौरे के दौरान कांग्रेस का अंदरूनी विवाद भी दिखा। शहराध्यक्ष चिंटू चौकसे और दूसरे नेताओं ने दौरे से दूरी बना ली थी।
कांग्रेस को वोट बैंक, कहां जाएगा
अल्पसंख्यक वोट बैंक को कांग्रेस का कोर वोट बैंक माना जाता है। इसकी हिस्सेदारी करीब 18 से 20 फीसदी है। बीजेपी के इंदौर पांच के विधायक महेंद्र हार्डिया भी कह चुके हैं कि हम उनके लिए काम करते हैं। फिर भी मुस्लिम हमें वोट नहीं देते। यानी यह वोट बैंक कांग्रेस के साथ माना जाता है।
हाल में कांग्रेस की नीति से इन्हें झटका लग रहा है और AIMIM इस बात को महसूस करते हुए अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करने में जुट गई है। इनके द्वारा दो अक्टूबर को इंदौर में उलेमाओं को एकजुट करने के लिए भी मीटिंग बुलाई थी हालांकि प्रशासन ने इसकी मंजूरी नहीं दी।