उज्जैन शाही मस्जिद ने दायर की रिट अपील, हाईकोर्ट ने नहीं रोकी थी रिमूवल कार्रवाई
Indore. उज्जैन शाही मस्जिद के रिमूवल नोटिस पर विवाद हुआ था। फिर मामला इंदौर हाईकोर्ट पहुंचा। इसमें नौ सितंबर को हाईकोर्ट इंदौर ने रिमूवल की कार्रवाई को सही बताते हुए लंबा आदेश जारी किया था। अब इस आदेश को चुनौती देते हुए फिर रिट अपील दायर हुई है। हालांकि शुक्रवार को सुनवाई नहीं हो सकी और अब केस 30 सितंबर को लगा है।
27 पेज का लंबा आदेश हुआ था
हाईकोर्ट इंदौर सिंगल बेंच ने इसके पहले 27 पेज का लंबा स्पीकिंग आर्डर जारी किया था। इसमें याचिकाकर्ताओं को फटकार भी लगाई गई थी।
यह है मामला
कंथाल चौराहा से गोपाल मंदिर की 1.50 लंबी रोड़ के लिए उज्जैन नगर निगम ने मस्जिद प्रबंधन को नोटिस दिया। निगम ने बताया कि यह रोड सिंहस्थ और शाही मार्ग के लिए काफी अहम है। यह रोड आगे गोपाल मंदिर से महाकाल मंदिर को कनेक्ट करता है। इस नोटिस के खिलाफ दो याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर हुई और यह रिमूवल कार्रवाई को भेदभाव पूर्ण और गलत बताया गया। कहा गया कि अन्य संपत्तियां भी है लेकिन उन्हें छुआ तक नहीं गया और जानबूझकर मस्जिद पर कार्रवाई की जा रही है।।
मस्जिद का यह हिस्सा रिमूवल में जाने की बात
याचिकाकर्ताओं ने कहा कि इस 15 मीटर रोड़ चौड़ी करने के लिए मस्जिद का एक हिस्सा रिमूवल में जा रहा है। इस तोड़-फोड़ की कार्रवाई में मस्जिद के प्रार्थना कक्ष (जमात खाना) का एक हिस्सा, 120 फुट ऊँची मीनार और मजहर चौक शाही को गिरा दिया जाएगा। प्रार्थना हमारे धर्म का एक अहम हिस्सा है।
इस पर हाईकोर्ट ने यह की थी टिप्पणी
जस्टिस संदीप भट्ट ने इस मामले में दोनों याचिकाएं खारिज की थी। उन्होंने शासन और उज्जैन निगम द्वारा दी गई जानकारी पर कहा कि शहर भर में लगभग 80 धार्मिक संरचनाओं को स्थानांतरित/हटाया जा रहा है।
इसके अलावा, संबंधित सड़क पर पहले से ही 11 धार्मिक संरचनाएं - 10 मंदिर और 1 मस्जिद - हटाई जा चुकी हैं। फैसले में लिखा गया कि- ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता सड़क चौड़ी करने की प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहे हैं। वे धार्मिक स्थल को विशेष दर्जा देने के बहाने या यह मानकर कि उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है, कोई न कोई विवाद खड़ा कर रहे हैं। ऐसे तर्क गलत पाए गए हैं।
सिहंस्थ के लिए यह जरूरी है
सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए - जिसमें करोड़ों श्रद्धालुओं की उम्मीदों का ख्याल रखना जरूरी है, साथ ही बेहतर सुविधाएं देने और ऐसे आयोजनों में ट्रैफ़िक को संभालने की जरूरत भी है। समय के साथ शहर की आबादी बढ़ी है। उज्जैन विकास योजना, 2035 के प्रावधानों को देखते हुए, उज्जैन निगम ज़रूरी कानूनी प्रावधानों का पालन करते हुए कार्रवाई करने के लिए अधिकृत है।
इनके द्वारा लगाई गई थीं याचिकाएं
एक याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंचायत मोचियान प्रतिनिधि अशफाक अहमद और शाही मस्जिद इंतजामिया कमेटी वक्फ पंच मोचियान प्रतिनिधि वाइस चेयरमैन अशफाक अहमद की ओर से लगी। इसमें मप्र शासन, ज्वाइंट डायरेक्टर टीएंडसीपी, उज्जैन नगर निगम, बिल्डिंग ऑफिसर और कलेक्टर उज्जैन को पक्षकार बनाया गया था। वहीं, दूसरी याचिका शाही मस्जिद वक्फ पंच मोचियान प्रेसीडेंट अरशान हुसैन की ओर से लगी। इसमें मप्र शासन, उज्जैन निगम व मप्र वक्फ बोर्ड को पक्षकार बनाया गया था।
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