सिंहस्थ 2028 की तैयारियों में ढिलाई, अधर में लटके 12 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट्स
सिंहस्थ 2028 शुरू होने में अब सिर्फ 21 महीने बचे हैं। लेकिन उज्जैन में होने वाले बड़े काम लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं। बता दें कि 10 विभागों के लगभग 12 हजार करोड़ रुपए के काम देरी से चल रहे हैं। 23 काम अभी टेंडर प्रक्रिया में ही उलझे हैं। जानकारी के अनुसार इस देरी को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त नाराजगी जताई है।
सिंहस्थ को लेकर उज्जैन में बड़े पैमाने पर निर्माण काम चल रहे हैं। लेकिन समय पर ये काम पूरे होंगे या नहीं, इस पर अब सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार उच्च स्तर पर 7 जून 2026 की अपडेट रिपोर्ट मांगी गई थी। इस रिपोर्ट में सामने आया कि कई बड़े प्रोजेक्ट्स तो अभी शुरुआती चरण में ही हैं।
जिन कामों को 8 महीने में पूरा होना है वहां अभी टेंडर ही चल रहा है। कुछ जगहों पर तो काम शुरू भी नहीं हुआ है। इससे प्रशासन की चिंता बढ़ गई है।
किन विभागों के काम अटके
जल संसाधन, ऊर्जा, पीडब्ल्यूडी, पर्यटन, संस्कृति, गृह, नगरीय विकास, हेल्थ, आयुष और पंचायत एवं एमपी ग्रामीण विकास विभाग को मिलाकर कुल 166 काम होने हैं।
इनमें से 148 काम की प्रगति 10 दिन पहले देखी गई थी। तब पता चला कि सिर्फ 115 काम ही शुरू हो पाए हैं। बाकी काम अभी टेंडर या मंजूरी की प्रक्रिया में ही फंसे हैं।
सबसे ज्यादा काम नगरीय विकास विभाग के हैं। इस विभाग के पास कुल 60 काम हैं। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री ने इस देरी पर कड़ा रुख अपनाया है।
नए बंगले और पुलिस आवास
जानकारी के अनुसार उज्जैन नगर निगम के महापौर, अध्यक्ष, कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर के लिए नए बंगले बनेंगे। इस पर 31 करोड़ 74 लाख रुपए खर्च होंगे। यह राशि सिंहस्थ बजट से ही आएगी।
साथ ही स्टाफ के लिए क्वार्टर भी बनाए जाएंगे। इसके लिए जमीन चिन्हित कर ली गई है। डीपीआर तैयार की जा रही है।
इसके अलावा उज्जैन में नए थाने भी बनेंगे। साथ ही लगभग 600 करोड़ रुपए की लागत से 1500 से ज्यादा पुलिस आवास बनाए जा रहे हैं। राजपत्रित अधिकारियों के निवास का काम भी इसी राशि से होगा। यह काम तेजी से आगे बढ़ रहा है।
कौन सा काम किस हाल में है
रिपोर्ट के मुताबिक कई बड़े प्रोजेक्ट अभी अटके हुए हैं। खंडवा में बनने वाला नया झूला पुल 48 करोड़ 37 लाख रुपए का है। इसे 8 महीने में पूरा होना है। ओंकारेश्वर में नया पुल भी इसी समयसीमा में बनना है। इसकी लागत 60 करोड़ रुपए है।
वहीं क्षिप्रा नदी के घाटों के उन्नयन का काम 84 करोड़ रुपए का है। इस पर टेंडर की कार्यवाही जारी है। उज्जैन-जावरा 4 लेन सड़क सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है। यह 98.41 किलोमीटर लंबी है। इसकी लागत पांच हजार 17 करोड़ रुपए है। इस पर अभी काम शुरू ही नहीं हुआ है।
इंदौर-उज्जैन 4 लेन सड़क के हाल
इंदौर-उज्जैन 4 लेन सड़क भी शुरू नहीं हुई है। यह 49 किलोमीटर लंबी है। इसकी लागत एक हजार 89 करोड़ रुपए है। इंदौर गेट के पास बनने वाला फ्लाईओवर भी अभी अटका है। इस पर 945 करोड़ 20 लाख रुपए खर्च होने हैं।
होटल अवंतिका के लिए जमीन संबंधी कार्यवाही चल रही है। इसमें 100 कमरे बनेंगे और इस पर 100 करोड़ रुपए खर्च होंगे। ग्रैंड होटल उज्जैन का काम भी शुरू नहीं हुआ है। इस पर 40 करोड़ रुपए लगेंगे।
नीलकंठ द्वार से महाकाल चौराहे तक का मार्ग भी अभी शुरू नहीं हुआ है। इसकी लागत 28 करोड़ रुपए है। मेला क्षेत्र में 50 किलोमीटर लंबी अधोसंरचना का निर्माण होना है। इसकी लागत एक हजार 786 करोड़ रुपए है और इस पर टेंडर परीक्षण जारी है।
देवास में मल्टीमॉडल ट्रांजिट हब बनना है। इस पर 500 करोड़ रुपए खर्च होंगे और टेंडर चल रहा है। क्षिप्रा नदी के पूर्वी भाग में 6.1 किलोमीटर सड़क बनेगी। इसकी लागत 82 करोड़ रुपए है। कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का काम भी 139 करोड़ रुपए का है और इस पर टेंडर चल रहा है।
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