उज्जैन सिंहस्थ 2028 : शिप्रा किनारे रिसॉर्ट बनाने के अरमानों पर फिरा पानी, हाई कोर्ट ने लगाई पाबंदी
सिंहस्थ महाकुंभ 2028, जो हर 12 वर्ष में उज्जैन में आयोजित होता है, का आयोजन वर्ष 2028 में होगा। यह एक प्रमुख हिन्दू धार्मिक आयोजन है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शिप्रा नदी में स्नान करने आते हैं। इस आयोजन को लेकर प्रशासन और सरकार तैयारियों में जुटी हुई है। इन तैयारियों के साथ ही नदी किनारे रिसॉर्ट व होटल बनाए जा रहे थे। लेकिन हाल ही में हाई कोर्ट का एक आदेश ने एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए शिप्रा के 200 मीटर के दायरे में चल रहे निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी है।
कोर्ट का फैसला
हाई कोर्ट ने शिप्रा नदी के 200 मीटर के दायरे में होने वाले व्यावसायिक निर्माण पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि नदी के किनारे किसी भी प्रकार के रिसॉर्ट या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती है। यह फैसला एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। उज्जैन निवासी सत्यनारायण ने नदी के आसपास हो रहे अवैध निर्माणों के खिलाफ याचिका दायर की थी।
अवैध निर्माण पर कार्रवाई
कोर्ट ने नगर निगम और राज्य सरकार से आदेश दिए थे कि वे शिप्रा नदी के 200 मीटर क्षेत्र में हो रहे अवैध और अनधिकृत निर्माणों पर कार्रवाई करें। इसके बाद नगर निगम ने कोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की और बताया कि कुछ अवैध निर्माण हटा दिए गए हैं, जबकि अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं।
नदी तट पर विकास की योजना
सुनवाई के दौरान शिप्रा नदी के तट को सुंदर बनाने और जल संरक्षण के लिए एक विकास योजना का भी उल्लेख हुआ। इसके तहत नदी के 100 मीटर के दायरे में घाटों का विकास और सुंदरीकरण किया जाएगा। इसके अलावा 100 से 200 मीटर के दायरे में आश्रम, मठ, धर्मशालाएं और प्रवचन हाल जैसे धार्मिक गतिविधियों को संचालित करने की योजना है, लेकिन व्यावसायिक गतिविधियों को अनुमति नहीं दी जाएगी।
पर्यावरण और आस्था की जीत
शिप्रा नदी सिर्फ एक जलधारा नहीं है, करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। यदि नदी के ठीक बगल में रिसॉर्ट बनेंगे, तो वहां का गंदा पानी और कचरा सीधे नदी में जाएगा। सिंहस्थ जैसे पावन मौके पर जब साधु-संत और भक्त डुबकी लगाएंगे, तो उन्हें साफ जल मिलना चाहिए। कोर्ट का यह फैसला पर्यावरण की रक्षा और सिंहस्थ की पवित्रता बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
अब सबकी नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। क्या सरकार कोर्ट को मना पाएगी या फिर शिप्रा के किनारे सिर्फ मठ और आश्रम ही दिखेंगे? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल कोर्ट ने भू-माफियाओं के अरमानों पर पानी फेर दिया है।
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