उज्जैन की वैश्य टेकरी में दबा सांची से भी बड़ा स्तूप! अब खुलेगा 2200 साल पुराना राज

Aman Vaishnav | Aug 13, 2026, 13:46 IST
उज्जैन की वैश्य टेकरी
उज्जैन की वैश्य टेकरी में सांची से भी बड़ा 2200 साल पुराना बौद्ध स्तूप दबा है। उस समय गैस लीक के कारण खुदाई रोक दी गई थी। अब इसे ASI और राज्य सरकार फिर से शुरू करने जा रही है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • उज्जैन की वैश्य टेकरी में सांची स्तूप से भी बड़ा बौद्ध स्तूप दबा हुआ है।
  • यह स्तूप करीब 2200 साल पुराना बताया जाता है।
  • इसका संबंध सम्राट अशोक के काल से जोड़ा जाता है।
  • 1939 में यहां पहली खुदाई हुई थी, जो गैस रिसाव के कारण रुक गई थी।

वैश्य टेकरी का इतिहास

बता दें कि उज्जैन से करीब 236 किलोमीटर पश्चिम में वैश्य टेकरी स्थित है। यह एक बड़ा गोलाकार टीला है। इसके चारों तरफ एक आयताकार गड्ढा भी बना हुआ है। ब्रिटिशकालीन रिपोर्टों में इसका जिक्र मिलता है।



रिपोर्ट के अनुसार इस स्तूप का व्यास करीब 350 फीट रहा होगा। ऊंचाई कम से कम 100 फीट आंकी गई थी। यह आकार में सांची के स्तूप से कहीं ज्यादा बड़ा है।



सांची से भी बड़ा स्तूप

जानकारी के अनुसार सांची का प्रसिद्ध स्तूप 120 फीट व्यास और 54 फीट ऊंचाई का है। वैश्य टेकरी का स्तूप इससे लगभग तीन गुना बड़ा माना जाता है। यही वजह है कि यह खोज पुरातत्व जगत के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।



विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्तूप तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व का हो सकता है। यानी इसकी उम्र करीब 2200 साल आंकी गई है।



अशोक से जुड़ा कनेक्शन

ASI के अधीक्षण पुरातत्वविद् शिवकांत बाजपेई के मुताबिक कुछ रिकॉर्ड इसे सम्राट अशोक के दौर से जोड़ते हैं। मान्यता है कि अशोक जब उज्जैन के गवर्नर थे, तब उनकी पत्नी देवी की प्रेरणा से यह स्तूप बनवाया गया था।



देवी विदिशा के एक नगरश्रेष्ठी यानी वैश्य की पुत्री थीं। इसी वजह से इस स्थान का नाम वैश्य टेकरी पड़ा।



इसके अलावा इसका संबंध प्राचीन बौद्ध साहित्य के कनकगिरि विहार से भी जोड़ा जाता है। चीनी यात्री ह्वेनसांग ने भी अपने विवरण में एक विशाल स्तूप का जिक्र किया था। हालांकि इस संबंध की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।



1939 की अधूरी खुदाई

वैश्य टेकरी में पहली खुदाई 1938-39 में शुरू हुई थी। उस दौरान मुख्य स्तूप के साथ दो छोटे स्तूपों के अवशेष भी मिले थे। लेकिन खुदाई के दौरान गैस लीक होने से कुछ मजदूर बेहोश हो गए। इसके बाद यह काम बीच में ही रोकना पड़ा।



लगभग नौ दशक तक यह जगह वैसे ही पड़ी रही। अब लंबे इंतजार के बाद इस पर फिर काम शुरू होने जा रहा है।



अब फिर शुरू होगी खुदाई

मुख्यमंत्री मोहन यादव की पहल पर राज्य सरकार और ASI ने मिलकर नई खुदाई की योजना बनाई है। उज्जैन के संभागायुक्त आशीष सिंह ने बताया कि प्रशासन हर संभव मदद देने को तैयार है। जल्द ही व्यवस्थित तरीके से खुदाई शुरू की जाएगी।



मिट्टी और ईंटों का राज

1939 की खुदाई में पता चला था कि स्तूप के कोर में स्थानीय मुरम का इस्तेमाल हुआ था। बाहरी हिस्से में बड़ी ईंटें लगाई गई थीं। समय के साथ ऊपरी हिस्सा नष्ट हो गया और कई ईंटें भी गायब हो गईं।



इस वजह से स्तूप का मूल स्वरूप अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। पुरातत्व विभाग का मानना है कि नई वैज्ञानिक खुदाई से ही इसकी असली बनावट सामने आ सकती है। इससे प्राचीन बौद्ध वास्तुकला की भी बेहतर समझ बनेगी।



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