उज्जैन में गेहूं बचाने वाली दवा बनी काल, दो मासूमों की मौत, 3 गंभीर
उज्जैन के त्रिवेणी हिल्स इलाके में रहने वाले लालचंद प्रजापत का घर खुशियों से भरा था। उनकी दोनों बेटियां पूजा और रीना अपने बच्चों के साथ गर्मी की छुट्टियां बिताने घर आई हुईं थीं। किसी ने सोचा भी नहीं था कि जिस घर में हंसी-ठिठोली गूंज रही है, वहां चंद घंटों में सन्नाटा पसर जाएगा।
सोमवार की रात पूरा परिवार एक ही कमरे में सो रहा था। उसी कमरे में करीब चार क्विंटल गेहूं की बोरियां भी रखी थीं। इस अनाज को कीड़ों से बचाने के लिए उसमें कीटनाशक दवा (सल्फास) की सात पुड़िया डाली गई थीं। रात के अंधेरे में इश सल्फास से जहरीली गैस निकलती रही, जिसे मासूम बच्चे अपनी सांसों के जरिए अंदर खींचते रहे। इस हादसे में एक डेढ़ महीने की मासूम सहित दो बच्चो की मौत हो गई।
सुबह जब आंख खुली तो मंजर खौफनाक था
मंगलवार सुबह करीब 9 बजे घर में चीख-पुकार मच गई। सबसे पहले डेढ़ महीने की मासूम त्रिशा की तबीयत बिगड़ी। उसके मुंह से झाग निकलने लगा। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन शाम होते-होते नन्हीं जान ने दम तोड़ दिया। अभी परिवार इस सदमे से उबरा भी नहीं था कि बुधवार सुबह 4 साल की अनिका (अन्नू) की भी मौत हो गई।
11 अप्रैल को ही अनिका का जन्मदिन बड़े धूमधाम से मनाया गया था। नानी कलाबाई का रो-रोकर बुरा हाल है। वे कहती हैं कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि अनाज बचाने वाली दवा उनके चिरागों को बुझा देगी।
अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे तीन और मासूम
हादसे की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक बच्ची, जेनिशा, की हालत इतनी नाजुक है कि उसे इंदौर रेफर करना पड़ा। वहीं रेहान और येशु का इलाज उज्जैन के स्थानीय अस्पताल में चल रहा है। डॉक्टरों की टीम उन्हें बचाने की पूरी कोशिश कर रही है। पुलिस और फॉरेंसिक (FSL) की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है।
क्या कहती है पुलिस और मेडिकल रिपोर्ट?
नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव के मुताबिक, कमरे में वेंटिलेशन (हवा आने-जाने का रास्ता) की कमी थी। रातभर सल्फास की पुड़िया से निकली फॉस्फिन गैस कमरे में भर गई। चूंकि बच्चों के शरीर छोटे और नाजुक होते हैं, वे इस जहरीली गैस का प्रभाव झेल नहीं पाए।
डॉक्टर जितेंद्र शर्मा ने बताया कि सल्फास हवा या नमी के संपर्क में आते ही 'फॉस्फिन' गैस छोड़ती है। यह गैस शरीर में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता को ब्लॉक कर देती है। अगर कमरा बंद हो, तो यह सीधा फेफड़ों और दिमाग पर असर करती है, जिससे मौत होना निश्चित है।
सल्फास: अनाज का रक्षक या जान का भक्षक?
सल्फास, जिसे वैज्ञानिक भाषा में 'एल्यूमिनियम फॉस्फाइड' कहते हैं, खेतों और घरों में अनाज सुरक्षित रखने के लिए इस्तेमाल होता है। यह एक बेहद खतरनाक जहरीला कीटनाशक है। लोग अक्सर इसे बिना किसी सुरक्षा उपाय के अनाज की बोरियों में डाल देते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि गेहूं में दवा डालने के बाद उस कमरे को पूरी तरह सील कर देना चाहिए। वहां किसी को भी नहीं सोना चाहिए। उज्जैन की इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि कीटनाशकों का इस्तेमाल करते समय बरती गई छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।
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