उज्ज्वला योजना पर करोड़ों खर्च, फिर भी सिलेंडर रीफिल नहीं करवा पा रहे लोग, एमपी भी लिस्ट में शामिल
सरकार ने चूल्हे के धुएं से मुक्ति दिलाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी चौंकाने वाली नजर आती है। आरटीआई की रिपोर्ट ने उज्ज्वला योजना की सफलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण एलपीजी का संकट बहुत बढ़ गया है। इस बीच केंद्र से आरटीआई में मिली जानकारी ने सबको चौंका दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले पांच सालों में उज्ज्वला योजना पर 17 हजार 522 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हो चुके हैं।
करोड़ों लोगों ने नहीं किया सिलेंडर रीफिल
इसमें एक हैरान करने वाली बात यह सामने आई है कि, इस दौरान 3.46 करोड़ लोगों ने अपने एलपीजी सिलेंडर का रीफिल ही नहीं कराया है। मध्य प्रदेश में इन लाभार्थियों की संख्या लगभग 38 लाख रही है।
आरटीआई से मिले जवाब में सामने आया है कि, उज्ज्वला योजना के तहत देशभर के करोड़ों गरीब परिवारों को एलपीजी गैस कनेक्शन दिए गए थे। इससे वे धुएं वाले चूल्हों से छुटकारा पा सकें। अब जो असली आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे ये बताते हैं कि कई लोग सिलेंडर को फिर से नहीं भरवा पा रहे हैं।
गैस रीफिल नहीं कराने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही
मध्यप्रदेश में गैस रीफिल नहीं कराने वालों की संख्या पिछले वित्तीय वर्षों से लगातार बढ़ रही है। 2020-21 में यह संख्या 19 हजार 717 थी। यही संख्या 2021-22 में बढ़कर 7 लाख 54 हजार 110 हो गई थी।
इसके बाद 2022-23 में यह संख्या 9 लाख 93 हजार 274 तक पहुंच गई थी। साथ ही 2023-24 में यह 10 लाख 29 हजार 952 तक पहुंच गई थी। इसके अलावा 2024-25 में यह आंकड़ा 11 लाख 36 हजार 951 रहा है।
ये भी जानें..
देशभर में बढ़ती रसोई गैस की मांग और कालाबाजारी की शिकायतों के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में नया LPG सिलेंडर 45 दिनों में बुक होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, गैस की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि रसोई गैस की डिमांड संतुलित रखने के लिए शहरी इलाकों में गैस सिलेंडर बुकिंग के बीच 25 दिन का अंतर होगा। ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में यह अंतर 45 दिन होगा।
इस फैसले का असर मध्य प्रदेश के लाखों ग्रामीण गैस उपभोक्ताओं पर होगा। उज्जवला योजना और सामान्य कनेक्शन के तहत कई परिवार LPG गैस पर निर्भर हैं। अब ग्रामीण परिवारों को एक सिलेंडर मिलने के बाद अगला सिलेंडर बुक करने के लिए 45 दिन का इंतजार करना होगा।
गैस बुकिंग नियम में लगातार बदलाव
गैस बुकिंग के नियमों में लगातार बदलाव हो रहे हैं। पहले सिलेंडर के बीच कोई समय सीमा नहीं थी। 6 मार्च को पहली बार 21 दिन का गैप तय किया गया था। इसके बाद गैप को बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया था। अब ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 45 दिन का लॉक-इन समय तय किया गया है। शहरी उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल यह अवधि 25 दिन है।
हाल के दिनों में LPG सिलेंडरों की ज्यादा बुकिंग और जमाखोरी बढ़ी है। एमपी में कई गोदामों पर छापे मारे गए हैं। देशभर के कई राज्यों से जमाखोरी की खबरें भी सामने आई हैं। लोग जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक करने लगे थे। इससे वास्तविक जरूरत वाले उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर नहीं मिल पा रहे थे। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई की समस्या को देखते हुए सरकार ने यह कदम उठाया है।
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