खड़े हनुमान विवाद पर उमा भारती की एंट्री, CM मोहन यादव को लिखा खत
समझें क्या है पूरा मामला
- एमपी की पूर्व सीएम उमा भारती ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखा है।
- पत्र में खड़े हनुमान मंदिर विवाद का समाधान सुझाया है।
- उमा ने कमलापति पार्क का उदाहरण देकर रास्ता बताया है।
- उज्जैन में सिंहस्थ 2028 के लिए सड़क चौड़ीकरण चल रहा है।
- मंदिर हटाने की कोशिश के बाद विरोध तेज हुआ है।
भाजपा नेता उमा भारती ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखा है। पत्र उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर विवाद पर लिखा गया है। उन्होंने भोपाल के कमलापति पार्क का उदाहरण दिया है। वहां सड़क चौड़ीकरण में मस्जिद को छुए बिना रास्ता निकाला गया था। उमा भारती ने कहा है कि यही तरीका खड़े हनुमान मंदिर पर भी अपनाया जा सकता है।
170 साल पुराना खड़े हनुमान मंदिर
उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी काम की जद में करीब 170 साल पुराना खड़े हनुमान मंदिर आ गया है। प्रशासन ने प्रतिमा को दूसरी जगह शिफ्ट करने की कोशिश शुरू की थी। इसके बाद शहर में भारी विरोध शुरू हो गया। यही विवाद अब प्रदेश की सियासत में भी पहुंच गया है।
उमा भारती ने अपने पत्र में लिखा है कि मुख्यमंत्री खुद उज्जैन से हैं। उनके मुताबिक शहर और धार्मिक स्थलों की गरिमा को सीएम से बेहतर कोई नहीं समझ सकता। पत्र में उन्होंने भरोसा जताया है कि सीएम खुद इस मामले का हल सोच रहे होंगे। यह पत्र 10 सितंबर 2026 को भोपाल से भेजा गया है।
पत्र में क्या लिखा उमा भारती ने
पत्र में उमा भारती ने शिवराज सरकार के दौर का एक उदाहरण दिया है। उनके अनुसार भोपाल में कमलापति पार्क के आगे सड़क चौड़ीकरण के समय एक मस्जिद आ रही थी। उस समय मस्जिद को हाथ नहीं लगाया गया था। इसके बजाय पूरा सड़क प्लान ही बदल दिया गया था।
पत्र में लिखा है कि यह इसलिए हुआ क्योंकि सरकार विकास और आस्था दोनों को साथ लेकर चलती है। उमा भारती ने इसी मॉडल को खड़े हनुमान मंदिर के लिए भी सुझाया है। उनका कहना है कि सड़क का प्लान बदलकर मंदिर को बचाया जा सकता है।
पत्र औपचारिक भाषा में लिखा गया है और सीधे मुख्यमंत्री को संबोधित है। पत्र में कहीं भी प्रशासन या अधिकारियों पर सीधा आरोप नहीं लगाया गया है। पूरा लहजा सुझाव और भरोसे का है, विरोध का नहीं।
क्या है पूरा विवाद
उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ी की जा रही है। इसी रास्ते में खड़े हनुमान मंदिर की प्राचीन प्रतिमा आ गई है। प्रशासन ने मंदिर भवन और चारदीवारी हटा दी थी। लेकिन गर्भगृह की प्रतिमा को हिलाया नहीं जा सका।
क्रेन और जेसीबी जैसी मशीनों से भी प्रतिमा को शिफ्ट नहीं किया जा सका। इसके बाद श्रद्धालुओं की भीड़ मंदिर तक बड़ी संख्या में पहुंचने लगी। कई हिंदू संगठनों ने भी विरोध में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। मामला जल्द ही राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में भी आ गया।
प्रशासन का रुख बदला
बढ़ते विरोध के बाद जिला प्रशासन ने अपना रुख बदला है। प्रशासन ने साफ किया कि श्रद्धालुओं की भावनाओं का पूरा सम्मान किया जाएगा। बिना संतों और स्थानीय प्रतिनिधियों की सहमति के कोई फैसला नहीं लिया जाएगा। विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे कदम उठाया जाएगा।
मामले पर बढ़ी सियासत
इस विवाद पर कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के विधायक समर्थकों के साथ मंदिर पहुंचे और हनुमान चालीसा का पाठ किया। अब उमा भारती के पत्र ने इस मुद्दे को भाजपा के भीतर भी चर्चा का विषय बना दिया है। देखना होगा कि सरकार इस सुझाव पर आगे क्या कदम उठाती है।
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