छिंदवाड़ा बस हादसा : नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का सरकार पर हमला, मुआवजा राशि पर उठाए सवाल
News in Short
- उमंग सिंघार ने बढ़ती दुर्घटनाओं और मुआवजा नीति पर सरकार को घेरा।
- मुआवजे की असमानता पर सवाल उठाया, विभिन्न घटनाओं में अलग-अलग राशि दी जाती है।
- छिंदवाड़ा हादसे में सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया।
- सिंघार ने सिंगल विंडो सिस्टम लागू करने की मांग की, पीड़ितों को तुरंत मुआवजा मिले।
- मध्यप्रदेश में दुर्घटनाओं के आंकड़े चिंताजनक, 2024 में 14,791 मौतें हुईं।
News in Detail
मध्यप्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने राज्य में बढ़ती दुर्घटनाओं और हाल ही में छिंदवाड़ा हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान स्थिति 'इमरजेंसी' जैसी हो गई है। सिंघार ने सरकार की मुआवजा नीति पर सवाल उठाए और कहा कि मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजा तुरंत और सही तरीके से मिलना चाहिए।
सिंघार ने सरकार की नीति पर उठाए सवाल
सिंघार ने सरकार पर आरोप लगाया कि गरीबों को मुआवजा देने के लिए सरकारी दफ्तरों में भटकना पड़ता है, जबकि उद्योगपतियों के लिए सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है, जिससे उन्हें सभी सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं। सिंघार ने सरकार से मांग की कि मृतकों के परिजनों को 24 घंटे के भीतर सिंगल विंडो सिस्टम के तहत मुआवजा मिलना चाहिए।
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छिंदवाड़ा हादसा- एक दुखद उदाहरण
सिंघार ने छिंदवाड़ा बस हादसे का जिक्र करते हुए कहा कि इस हादसे में 10 लोग मारे गए और 40 घायल हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार और प्रशासन ने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग किया था। जनपद पंचायत के सीईओ ने कर्मचारियों और ग्रामीणों को सभा में भाग लेने की धमकी दी थी, जिससे यह हादसा हुआ।
मुआवजा नीति में भेदभाव
सिंघार ने मध्यप्रदेश में विभिन्न दुर्घटनाओं के लिए दिए गए मुआवजे की असमानता पर सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि भागीरथपुरा कांड में 2 लाख रुपए दिए गए, वहीं छिंदवाड़ा कफ सिरप कांड में 4 लाख रुपए दिए गए। उन्होंने सरकार से एक समान और स्पष्ट नीति बनाने की मांग की, ताकि सभी दुर्घटनाओं के पीड़ितों को बराबरी का मुआवजा मिले।
सरकार की आपातकालीन प्रतिक्रिया पर सवाल
सिंघार ने सरकार की ओर से दुर्घटनाओं और सुरक्षा के मुद्दों पर कोई ठोस कदम न उठाए जाने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि पिछले पांच वर्षों में मध्यप्रदेश में 65,000 दुर्घटनाएं हुईं और केवल 2024 में 14,791 मौतें हो चुकी हैं, बावजूद इसके सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाए।
गैस संकट पर चिंता
सिंघार ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान-अमेरिका तनाव के संदर्भ में गैस संकट पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि 80% तेल और गैस इसी मार्ग से आता है। अगर युद्ध बढ़ता है, तो क्या सरकार ने इसके लिए पर्याप्त रिजर्व रखे हैं? उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में 1.75 करोड़ गैस कनेक्शन हैं, जिनमें से 88 लाख उज्ज्वला योजना के तहत हैं।
सिंघार की कार्रवाई की अपील:
अंत में सिंघार ने सरकार से बेहतर सुरक्षा उपायों और मुआवजा प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग की, ताकि गरीब और दुर्घटनाओं का शिकार हुए लोग जल्दी से राहत पा सकें।
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