करोड़ों का कोयला घोटाला! उमरिया कोल माइंस में मिला रहे मिट्टी, पीएम तक पहुंची शिकायत
News in Short
- उमरिया के नौरोजाबाद कोल माइंस में कोयले में मिट्टी मिलाने का मामला सामने आया है।
- मिलावटी कोयला रेलवे द्वारा बिना गुणवत्ता परीक्षण के सप्लाई किया जा रहा है।
- अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है, खासकर साइड इंचार्ज और सेल्स मैनेजर की।
News in Detail
उमरिया जिले के जोहिला क्षेत्र स्थित नौरोजाबाद कोल माइंस में मिलावट का मामला सामने आया है। आरोप है कि यहां कोयले में जेसीबी से मिट्टी मिलाई जा रही है। मिलावट का उद्देश्य कोयले का वजन बढ़ाना और अधिक मुनाफा कमाना है। यह मामला अब उच्चतम स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। इसकी शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय तक भेजी गई है।
मिलावटी कोयला देशभर में सप्लाई
इस मिलावटी कोयले को बिना किसी गुणवत्ता परीक्षण के रेलवे द्वारा रैक में लोड करके देशभर में सप्लाई किया जा रहा है। यह न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि कोयला आपूर्ति नेटवर्क की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते हैं। इस घोटाले के कारण अन्य राज्यों के उद्योगों को भी नुकसान हो सकता है। मिलावटी कोयला उनके उपकरणों को नुकसान पहुंचा सकता है और उत्पादन क्षमता में गिरावट ला सकता है।
अधिकारियों की संलिप्तता की आशंका
उमरिया बीजेपी जिला अध्यक्ष दिलीप पांडे ने अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि यह कार्य किसी एक व्यक्ति का नहीं हो सकता। इसके लिए कई अधिकारियों की मिलीभगत की संभावना जताई जा रही है। विशेष रूप से साइड इंचार्ज और सेल्स मैनेजर की भूमिका को संदिग्ध बताया गया है। इसके अलावा, बिलासपुर जोन के अधिकारियों की संलिप्तता को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने मिलावट की इस प्रक्रिया को अनदेखा किया और इसमें शामिल रहे।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो ने इस मामले को और भी गंभीर बना दिया है। इन वीडियो में जेसीबी मशीनों से कोयले में मुरूम मिलाने की प्रक्रिया दिखाई जा रही है। इसके बावजूद, अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। यह कोल माइंस प्रबंधन की निष्क्रियता को दर्शाता है और सवाल उठाता है कि क्या इसे जानबूझकर संरक्षण दिया जा रहा है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
दिलीप पांडे की शिकायत में तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं। पहली, पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी से उच्चस्तरीय जांच की जाए। दूसरी, दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों का तत्काल निलंबन किया जाए और उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। तीसरी, भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पारदर्शी मॉनिटरिंग सिस्टम लागू किया जाए। यह शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उमरिया कलेक्टर को भी भेजी गई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर मामले में क्या कदम उठाता है।
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