गृह मंत्री अमित शाह आज एमपी के गोशालाओं को देंगे 101 करोड़ की सौगात, 255 करोड़ के डेयरी प्लांट का भी करेंगे भूमिपूजन
उज्जैन डेयरी प्लांट की खासियत
मध्य प्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ उज्जैन डेयरी प्लांट बनाएगा। इसकी लागत 255 करोड़ रुपए है। अमित शाह का डेयरी प्लांट भूमिपूजन वर्चुअल (ऑनलाइन) होगा।
शुरुआत में रोज तीन लाख लीटर दूध प्रोसेसिंग होगा। बाद में क्षमता पांच लाख लीटर तक पहुंच सकेगी। इसके लिए राज्य सरकार 170 करोड़ रुपए देगी। साथ ही, दुग्ध संघ ऋण से 85 करोड़ रुपए जुटाएगा। लक्ष्य करीब दो साल में काम पूरा करने का है।
घी, दही और लस्सी भी बनेगी
प्लांट में कई उत्पाद बनेंगे। रोज 1.50 लाख लीटर पैक्ड दूध तैयार हो सकेगा। इसमें 25 हजार लीटर दही और 10 हजार लीटर लस्सी-छाछ बनेगी। साथ ही, 10 मीट्रिक टन रोज क्षमता का घी प्लांट भी होगा। योजना संग्रहण से मार्केटिंग तक पूरी शृंखला मजबूत करने की है।
यानी दूध से घी तक सब कुछ एक ही छत के नीचे बनेगा।
गोशालाओं को 101 करोड़ कैसे मिलेंगे?
राज्य की पंजीकृत गोशालाओं में गोवंश के रखरखाव के लिए अनुदान दिया जाता है। जुलाई-अगस्त 2026 की 101 करोड़ रुपए से अधिक राशि अब भेजी जाएगी। डीबीटी (DBT – Direct Benefit Transfer) से राशि सीधे संचालकों के खातों में जाएगी।
हर गोवंश पर 40 रुपए रोज
सरकार गोशालाओं में दर्ज हर गोवंश के लिए 40 रुपए प्रतिदिन देती है। सोचिए एक बार। 30 दिन में एक गोवंश पर 1200 रुपए। सम्मेलन में इस सहायता की प्रक्रिया और राशि का वितरण होगा।
गोपालक सम्मेलन में क्या खास?
सम्मेलन भेल दशहरा मैदान में दोपहर 12:05 से 1:05 बजे तक होगा। अमित शाह उत्कृष्ट काम करने वाली गोपालक दीदियों का सम्मान करेंगे। डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना के स्वीकृति पत्र बांटे जाएंगे।
उज्जैन में 16 करोड़ 80 लाख रुपए से बने फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट का लोकार्पण होगा। भोपाल में 12 करोड़ 40 लाख रुपए की आधुनिक प्रयोगशाला का लोकार्पण भी होगा। शिवपुरी के मिनी डेयरी संयंत्र का उद्घाटन होगा। भोपाल-इंदौर दुग्ध संघ के उत्पादकों को करीब 12 करोड़ रुपए बोनस मिलेगा।
लखपति गोपालक दीदी का गणित
लखपति गोपालक दीदी योजना में दो लाख से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं। इसमें उच्च आनुवंशिक क्षमता वाले सीमन से कृत्रिम गर्भाधान को प्रोत्साहन मिलता है। लक्ष्य बेहतर दुग्ध उत्पादन क्षमता वाले पशु तैयार करना है।
सरकारी आकलन में F1 नस्ल की बछिया मां से ज्यादा दूध देती है। यह मात्रा ढाई से तीन गुना तक बताई गई है। एक लैक्टेशन (दूध देने की अवधि) में 50-60 हजार रुपए अतिरिक्त आय अनुमानित है। पूरे जीवनकाल में यह अनुमान ढाई से तीन लाख रुपए है।
भौंरी में शिलान्यास और अनावरण
आईआईएसईआर भोपाल (IISER – Indian Institute of Science Education and Research) का अत्रि परिसर प्रस्तावित है। शाम को शाह भौंरी में इस परिसर का शिलान्यास करेंगे। वे स्वामी विवेकानंद की नई प्रतिमा का अनावरण भी करेंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधि रहेंगे।
52 एकड़ में बनेगा नया परिसर
राज्य सरकार ने नए परिसर के लिए 52 एकड़ जमीन दी है। यहां क्वांटम विज्ञान, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रोबोटिक्स पर काम की योजना है। उन्नत पदार्थ, सतत प्रणालियां और चिकित्सा तकनीक भी शामिल हैं।
परिसर में एकात्म पार्क बना है, जहां विवेकानंद की प्रतिमा लगी है। संस्थान के अनुसार पार्क का मकसद विद्यार्थियों में प्रेरणा और चिंतन जगाना है।
बैठक, ट्रैफिक और पूरा कार्यक्रम
अमित शाह भोपाल दौरा सिर्फ मंच तक सीमित नहीं है। होटल ताज में दोपहर 2:15 से 4:15 बजे तक बैठक तय है। केंद्र और राज्य के पुलिस अफसर दो घंटे चर्चा करेंगे।
इसके बाद 4:15 से 5:15 बजे तक नारकोटिक्स पर प्रेस वार्ता का समय है। शाह रात 7:50 बजे विशेष विमान से दिल्ली रवाना होंगे।
भेल दशहरा मैदान के आसपास मालवाहक, भारी और व्यावसायिक वाहनों का आवागमन प्रतिबंधित रहेगा। गोविंदपुरा टर्निंग, अन्ना नगर तिराहा, करियर कॉलेज और भेल गेट नंबर-6 पर ट्रैफिक रहेगा।
अब जरा पीछे चलते हैं।
पशुपालकों पर शाह का फोकस क्यों?
अप्रैल 2025 में एनडीडीबी (NDDB – National Dairy Development Board) के साथ करार हुआ था। इसमें मध्य प्रदेश स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन और छह दुग्ध संघ शामिल थे। एनडीडीबी को प्रबंधन और संचालन में भूमिका दी गई।
तब शाह ने पांच साल का लक्ष्य रखा था। लक्ष्य था कि प्रदेश के 50% गांवों में प्राथमिक डेयरी सहकारी समितियां बनें। अब देखना है कि गोपालकों तक यह मदद कितनी जल्दी पहुंचती है।
यह खबर क्यों जरूरी है
यह खबर सीधे गोपालकों, गोशाला संचालकों और दूध उत्पादकों से संबंधित है। गोवंश के रखरखाव की 101 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि खातों में पहुंचेगी। उज्जैन का प्लांट संग्रहण से मार्केटिंग तक शृंखला मजबूत करेगा। सहकारिता का यह मॉडल छोटे उत्पादकों को संगठित व्यवस्था से जोडता है। संविधान सामाजिक और आर्थिक न्याय की बात करता है। यानी योजनाओं का फायदा गांव के पशुपालक तक पहुंचना जरूरी है।