बीजेपी नेता दानिश अंसारी का बड़ा बयान: यूपी में भी लागू हो एमपी का वक्फ मॉडल

Manya Jain | Jul 09, 2026, 16:50 IST
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बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष दानिश अंसारी ने मध्य प्रदेश के वक्फ बोर्ड मॉडल का समर्थन किया। कहा, यूपी में भी यही व्यवस्था लागू हो सकती है। सपा ने इसका विरोध करते हुए इसे ध्यान भटकाने की कोशिश बताया।

उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन की चर्चा तेज हो गई है। बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष दानिश अंसारी ने मध्य प्रदेश के नए वक्फ मॉडल का समर्थन किया है। उनका कहना है कि यही व्यवस्था यूपी में भी लागू हो सकती है।



मध्य प्रदेश पहले ही इस मॉडल पर वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कर चुका है। वहीं समाजवादी पार्टी ने इस कदम का कड़ा विरोध जताया है।



वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के लागू होने के बाद से देश के कई राज्यों में वक्फ बोर्ड के पुनर्गठन को लेकर चर्चा चल रही है। मध्य प्रदेश इस दिशा में पहला कदम उठाने वाला राज्य बन चुका है। अब उत्तर प्रदेश में भी इसी तर्ज पर बदलाव की संभावना पर विचार हो रहा है।



दानिश अंसारी ने किया मॉडल का समर्थन

बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष दानिश अंसारी ने कहा कि वक्फ संशोधन अधिनियम का मकसद सिर्फ बोर्ड की संरचना बदलना नहीं है। उनके अनुसार, इसका असली उद्देश्य वक्फ संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।



उन्होंने बताया कि नए कानून के तहत बनने वाले वक्फ बोर्ड में पिछड़े और पसमांदा मुस्लिम समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा। महिलाओं और अन्य वर्गों को भी बोर्ड में जगह दी जाएगी। इसके साथ ही दो गैर-मुस्लिम सदस्यों का नामांकन भी इस कानून का एक अहम हिस्सा है।



दानिश अंसारी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार के प्रावधानों के अनुरूप ही मध्य प्रदेश में वक्फ बोर्ड का गठन हुआ है। उनके मुताबिक अन्य राज्यों में भी इसी मॉडल पर बोर्ड गठित करने का प्रस्ताव है। उनका दावा है कि इससे वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन ज्यादा प्रभावी और जवाबदेह बनेगा।



पहले भी उठा चुके हैं यह मुद्दा

दानिश अंसारी इससे पहले भी वक्फ संशोधन कानून के समर्थन में बयान दे चुके हैं। उनका कहना रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए इस कानून का मकसद वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण करना है।



इसके अलावा इस कानून के जरिए वक्फ संपत्तियों का ऑनलाइन रिकॉर्ड तैयार करने की बात कही गई है। अवैध कब्जों को हटाना और दस्तावेजों को व्यवस्थित करना भी इसके उद्देश्यों में शामिल है। नियमित ऑडिट के जरिए इन संपत्तियों से होने वाली आय बढ़ाने का लक्ष्य भी रखा गया है।



समाजवादी पार्टी ने जताया विरोध

वहीं समाजवादी पार्टी ने सरकार के इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताया है। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि बीजेपी असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह मुद्दा उठा रही है।



उन्होंने वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने के फैसले पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि सरकार हर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रही है। सपा नेताओं के अनुसार यह फैसला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।



मध्य प्रदेश में क्या बदलाव हुआ

मध्य प्रदेश वक्फ (संशोधन) अधिनियम, 2025 के तहत वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करने वाला देश का पहला राज्य बन चुका है। वहां बने 10 सदस्यीय बोर्ड में पहली बार दो हिंदू सदस्यों को भी शामिल किया गया है। यह बदलाव नए कानून के प्रावधानों के तहत किया गया है।



इस मॉडल को अब अन्य राज्यों में भी लागू करने की चर्चा शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश में इस पर विचार जारी है, लेकिन अभी सरकार की ओर से कोई अंतिम फैसला नहीं आया है।



आगे क्या होगा

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से इस मामले में जल्द फैसला आने की उम्मीद है। यह देखना अहम होगा कि क्या राज्य मध्य प्रदेश के मॉडल को पूरी तरह अपनाता है या इसमें कुछ बदलाव करता है। सपा जैसे विपक्षी दलों का विरोध इस मुद्दे को आगे भी राजनीतिक बहस का केंद्र बनाए रख सकता है।



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