नर्सिंग फर्जीवाड़ा: GNM के 2395 छात्र-छात्राओं को कोर्ट ने दी परीक्षा की अनुमति

Neel Tiwari | Aug 13, 2026, 22:21 IST
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मध्य प्रदेश नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले में 2395 जीएनएम छात्रों को राहत मिली। हाई कोर्ट ने उन्हें आगामी परीक्षा में शामिल करने का आदेश दिया। रुके परीक्षा परिणाम भी जारी होंगे। ग्वालियर-चंबल के कॉलेजों को फिलहाल राहत नहीं मिली।

ऐसे समझें क्या है पूरा मामला..

  • मध्य प्रदेश के नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता पर बड़ा विवाद है।
  • सीबीआई जांच में कई कॉलेज नियमों पर खरे नहीं उतरे।
  • ऐसे कॉलेजों के छात्रों को दूसरे कॉलेजों में भेजा जा रहा है।
  • अब 2395 जीएनएम छात्रों को परीक्षा में शामिल होने की राहत मिली।
  • ग्वालियर-चंबल के कुछ कॉलेजों को फिलहाल राहत नहीं मिली।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नर्सिंग छात्रों को बड़ी राहत दी है। मामला लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की जनहित याचिका से जुड़ा है। याचिका अध्यक्ष अधिवक्ता विशाल बघेल ने दायर की थी। गुरुवार को जस्टिस आनंद पाठक और जस्टिस बीपी शर्मा ने सुनवाई की। सुनवाई जबलपुर हाई कोर्ट की डिविजन बेंच में हुई। कोर्ट ने जीएनएम छात्रों के हित में अहम निर्देश दिए।



2395 छात्रों के लिए परीक्षा का रास्ता साफ

सुनवाई के दौरान नर्सिंग काउंसिल की जानकारी कोर्ट में रखी गई। सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने पक्ष रखा। उप महाधिवक्ता अभिजीत अवस्थी ने भी जानकारी दी। बताया गया कि 4475 छात्र ट्रांसफर के लिए पात्र मिले। इनमें 2813 छात्रों ने शिफ्टिंग के लिए पंजीकरण कराया। 2619 छात्रों ने कॉलेज चुनने की प्रक्रिया पूरी की। इनमें 2395 छात्र सफलतापूर्वक दूसरे कॉलेज भेजे गए। कोर्ट ने यह जानकारी रिकॉर्ड में ले ली।



रुके हुए परीक्षा परिणाम भी जारी होंगे

हाई कोर्ट ने प्रभावित छात्रों के लिए राहत का रास्ता साफ किया। इन छात्रों को आगामी परीक्षा में शामिल किया जाएगा। रुके हुए परीक्षा परिणाम भी जारी करने के निर्देश दिए गए। इससे छात्रों की पढ़ाई पर पड़ा संकट कम होगा। कई छात्र परीक्षा और परिणाम को लेकर परेशान थे। अब उनके आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ी है।



ग्वालियर-चंबल के कॉलेजों को राहत क्यों नहीं मिली

ग्वालियर-चंबल के कुछ कॉलेजों के छात्रों ने भी राहत मांगी। छात्रों ने अपनी पुरानी जांच को इसका आधार बनाया। उन्होंने कहा कि उनकी जांच पहले ही हो चुकी है। यह जांच 2021 में बनी दस सदस्यीय टीम ने की थी। छात्रों के अनुसार कॉलेज उस जांच में सही मिले थे। इसी आधार पर परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी गई।



फैकल्टी डुप्लीकेसी पर उठे गंभीर सवाल

सुनवाई में कॉलेजों की पुरानी जांच पर सवाल उठे। बताया गया कि उस जांच में फैकल्टी डुप्लीकेसी नहीं देखी गई। आरोप है कि कई कॉलेजों ने डुप्लीकेट फैकल्टी दिखाई थी। इसी आधार पर मान्यता लेने का भी आरोप लगा। यह मुद्दा जबलपुर हाई कोर्ट में भी सामने आया था। सरकार ने भी इन कॉलेजों को लेकर आपत्ति जताई।



सीबीआई जांच के बिना राहत से हाई कोर्ट का इनकार

हाई कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनीं। इसके बाद कॉलेजों को फिलहाल राहत देने से इनकार किया। कोर्ट ने कॉलेजों को लेकर अपना रुख साफ रखा। सिर्फ जांच के बाद सही मिले कॉलेज ही चल सकेंगे। ऐसे कॉलेजों को ही परीक्षा कराने का अधिकार होगा। इससे ग्वालियर-चंबल के कई छात्रों को झटका लगा। हालांकि छात्रों के लिए आगे का रास्ता खुला है। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट जाने की छूट दी है।



नर्सिंग फर्जीवाड़े में करीब 600 कॉलेज जांच में फंसे

लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन की याचिका में बड़ा मामला उठाया गया था। याचिका में 2020-21 में खुले कॉलेजों पर सवाल उठे। हाई कोर्ट की सख्ती के बाद सीबीआई जांच हुई। जांच में करीब 800 कॉलेजों को देखा गया था। इनमें करीब 600 कॉलेज अनुपयुक्त या कमियों वाले मिले। कई कॉलेजों में जरूरी सुविधाएं नहीं मिलीं। भवन, लैब और लाइब्रेरी की कमी भी सामने आई। कई कॉलेजों में अनुभवी शिक्षक भी नहीं थे।



कई कॉलेजों में अस्पताल की सुविधा भी नहीं मिली

नर्सिंग पढ़ाई में अस्पताल की सुविधा बेहद जरूरी होती है। छात्रों को पढ़ाई के साथ मरीजों का प्रशिक्षण भी चाहिए। जांच में कई कॉलेजों में यह व्यवस्था कमजोर मिली। 100 बिस्तरों वाले अस्पताल की शर्त भी अहम थी। कई संस्थानों में ऐसी सुविधा नहीं होने की बात सामने आई। इससे कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया पर सवाल उठे।



एक शिक्षक कई कॉलेजों में दिखाने का आरोप

जांच में फैकल्टी को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। कई कॉलेजों में एक ही शिक्षक दिखाने की बात सामने आई। कुछ शिक्षकों को कई कॉलेजों में साथ दिखाया गया। ऐसे मामलों ने मान्यता प्रक्रिया पर सवाल बढ़ाए। इस पूरे विवाद में छात्रों को नुकसान उठाना पड़ा। अब हाई कोर्ट ने छात्रों के भविष्य को राहत दी है।



कॉलेजों की संख्या घटकर करीब 200 रह गई

हाई कोर्ट की सख्ती के बाद जांच आगे बढ़ी। इसके बाद कई कॉलेजों पर कार्रवाई हुई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 200 कॉलेज ही बचे। इन कॉलेजों को नियमों के आधार पर आगे बढ़ना है। दूसरी ओर अनुपयुक्त कॉलेजों के छात्रों की समस्या बनी रही। ताजा आदेश से बड़ी संख्या में छात्रों को राहत मिली है।



ग्वालियर-चंबल के छात्रों के सामने अब क्या रास्ता

ग्वालियर-चंबल के छात्रों को इस सुनवाई में राहत नहीं मिली। हाई कोर्ट ने उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाने की छूट दी है। वहां लंबित मामले में वे अपनी मांग रख सकते हैं। हाई कोर्ट ने जांच के बिना कॉलेजों को मान्यता नहीं दी। इसलिए छात्रों का अगला कदम सुप्रीम कोर्ट में होगा।



नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामला छात्रों के भविष्य से जुड़ा

यह पूरा विवाद हजारों छात्रों के भविष्य से जुड़ा है। छात्र कॉलेजों की गलतियों का नुकसान नहीं चाहते। दूसरी ओर नियमों से समझौता करना भी आसान नहीं है। नर्सिंग शिक्षा सीधे मरीजों की सुरक्षा से जुड़ी है। इसलिए कॉलेजों की गुणवत्ता पर ध्यान देना जरूरी है। ताजा आदेश छात्रों और नियमों के बीच संतुलन दिखाता है।



अब विस्तृत आदेश का इंतजार

2395 जीएनएम छात्रों के लिए परीक्षा का रास्ता खुल गया है। रुके परिणाम जारी होने से उनकी पढ़ाई आगे बढ़ेगी। ग्वालियर-चंबल कॉलेजों का विवाद अभी जारी रहेगा। इन छात्रों के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का विकल्प है। मामले में विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है। आदेश आने के बाद स्थिति और साफ होगी।



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