वीबी-जीरामजी योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा: मौत के सालों बाद भी लोग कर रहे मजदूरी!

Amresh Kushwaha | Aug 22, 2026, 10:56 IST
वीबी-जीरामजी योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा
मुरैना के इमलिया गांव में मनरेगा में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है। मृत हो चुके लोगों के जॉब कार्ड पर आज भी मजदूरी का भुगतान दर्ज हो रहा है। जिला पंचायत सीईओ ने जांच का भरोसा दिया है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मुरैना के इमलिया गांव में मनरेगा में बड़ा भ्रष्टाचार सामने आया है।
  • मृत लोगों के नाम पर आज भी मजदूरी का भुगतान हो रहा है।
  • मीडिया की पड़ताल में 3 मामले सामने आए हैं।
  • मरने के सालों बाद भी जॉब कार्ड सक्रिय पाए गए हैं।
  • जिला पंचायत सीईओ ने जांच का भरोसा दिया है।

मुरैना जिले के इमलिया गांव से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां मरने के बाद भी लोग सरकारी कागजों में मजदूरी कर रहे हैं। मीडिया की पड़ताल में मनरेगा के जॉब कार्ड और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की गई। इसमें कई मृत लोगों के नाम पर आज भी मजदूरी दर्ज पाई गई। यह पूरा मामला मनरेगा वीबी-जीरामजी यानी भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण से जुड़ा है।



गांव में सालों से चल रहा खेल

इमलिया ग्राम पंचायत में यह गड़बड़ी कोई नई बात नहीं है। सूत्रों के मुताबिक यहां सालों से यह खेल चल रहा है। मरने के बाद भी कई लोगों के नाम जॉब कार्ड से हटाए नहीं गए। इनमें से कुछ लोग 15 साल पहले दुनिया छोड़ चुके हैं। कुछ की मौत तीन से चार साल पहले हुई है। इसके बावजूद तालाब, सड़क और सीसी रोड जैसे कामों में इनके नाम पर मजदूरी भुगतान होता रहा।



केस नंबर 1:

दिलीप की मौत 2010 में, भुगतान 2026 तक

दिलीप का जॉब कार्ड साल 2008 में बनाया गया था। बीमारी के चलते साल 2010 में उनकी मौत हो गई। मौत के बाद भी उनका जॉब कार्ड बंद नहीं किया गया। इसमें किसी और का नाम भी नहीं जोड़ा गया। इसके बावजूद तालाब निर्माण, सीसी रोड और अन्य कामों में उनके कार्ड पर साल 2026 तक भुगतान दर्ज होता रहा। यह भुगतान उनकी मौत के करीब 16 साल बाद तक जारी रहा। परिवार के सदस्य धर्मेंद्र का कहना है कि उन्हें इस बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है। न ही उन्हें और न परिवार के किसी सदस्य को कभी यह पैसा मिला।



केस नंबर 2:

महाराज सिंह के नाम बेटों को भुगतान

महाराज सिंह का जॉब कार्ड 4 जनवरी 2008 को बनाया गया था। उनकी मौत 23 जनवरी 2023 को हो गई। इसके बाद उनके बेटों रामवीर और कमलेश के नाम कार्ड में जोड़ दिए गए। तालाब और सड़क निर्माण सहित कई कामों में मजदूरी उनके कार्ड पर दर्ज हुई। हैरानी की बात यह है कि उनके बेटों को इस भुगतान के बारे में कोई जानकारी नहीं है। मौत के करीब तीन साल बाद भी सबसे आखिरी भुगतान 25 मई 2026 का दर्ज मिला है। यानी मरने के बरसों बाद भी उनका कार्ड सक्रिय रहा।



केस नंबर 3:

दामोदर की मौत के बाद भी कार्ड सक्रिय

दामोदर बघेल का जॉब कार्ड 21 फरवरी 2018 को बना था। उनकी मौत 23 जुलाई 2022 को हुई। मौत के बाद उनके कार्ड में शुभम और विशन के नाम जोड़ दिए गए। तालाब और सड़क निर्माण सहित कई कामों में उनके नाम पर मजदूरी दर्ज होती रही। रिकॉर्ड के मुताबिक 25 मई 2026 तक भुगतान दर्ज मिला है। यानी उनकी मौत के करीब चार साल बाद भी उनका कार्ड सक्रिय बना रहा।



कैसे सामने आया पूरा मामला

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जॉब कार्ड और भुगतान रिकॉर्ड लेकर गांव का दौरा किया। एक-एक कर हर परिवार तक पहुंचकर पड़ताल की गई। इस दौरान चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। मृत लोगों के नाम कार्ड में जिंदा दिखाए गए और लगातार भुगतान होता रहा। मजदूरों की हाजिरी लगती रही, भुगतान होता रहा और काम भी दिखाया गया। दूसरी ओर परिवारों ने साफ कहा कि उन्हें जितनी मजदूरी दिख रही है, उतनी रकम कभी नहीं मिली।



जिला पंचायत सीईओ का वर्जन

मुरैना जिला पंचायत के सीईओ (Chief Executive Officer) कमलेश भार्गव ने इस पूरे मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि यदि ऐसा हो रहा है तो यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने भरोसा दिया कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। सीईओ के मुताबिक मृत लोगों के जॉब कार्ड तत्काल निरस्त होने चाहिए। उन्होंने कहा कि इसमें सरपंच, सचिव या अन्य जिम्मेदार लोग भी शामिल हो सकते हैं। उनके मुताबिक जांच पूरी होने के बाद ही साफ हो पाएगा कि असली दोषी कौन है।



क्यों गंभीर है यह मामला

यह मामला सिर्फ कागजी गड़बड़ी भर नहीं है। यह सीधे तौर पर गरीब मजदूरों के हक के पैसे से जुड़ा है। मनरेगा गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बनाई गई योजना है। यदि मृत लोगों के नाम पर पैसा निकाला जा रहा है तो यह सीधा भ्रष्टाचार है। इससे असली जरूरतमंद मजदूरों का हक मारा जा सकता है। सरकारी खजाने को भी इससे लगातार नुकसान पहुंच रहा है।



आगे क्या हो सकता है

अब सबकी नजर जिला प्रशासन की जांच पर टिकी है। सीईओ ने जांच का भरोसा तो दिया है, लेकिन कार्रवाई पर सवाल बने हुए हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी। मृत लोगों के सभी जॉब कार्ड जल्द रद्द करने की मांग भी उठ रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे हो सकते हैं।



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