धार भोजशाला मंदिर है : हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, मस्जिद के लिए कही ये खास बात
मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित प्रसिद्ध भोजशाला विवाद का फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने आदेश में भोजशाला को मंदिर घोषित कर दिया है। हिंदू पक्ष की मांग को मान लिया है। मस्जिद के लिए अलग से जमीन अलॉट की जाएगी।
हिंदू फ्रंट की याचिका मान्य, मस्जिद के लिए अलग जमीन
धार भोजशाला पर हिंदू फ्रंट की याचिका मान्य हो गई है। बेंच ने यह भी कहा कि एएसआई (ASI survey in Bhojshala) का इसमें पूरा कंट्रोल और मॉनिटरिंग रहेगी। वह 1958 एक्ट के तहत इसे संभालेगा। यहां वाग्देवी की प्रतिमा को लाकर स्थापित करने के लिए भी केंद्र सरकार द्वारा कदम उठा जाएं। इन सभी की मांग हिंदू फ्रंट और कुलदीप तिवारी की याचिका में थी।
वहीं जैन समाज और मुस्लिम पक्ष को लेकर कहा है कि प्रशासन इन्हें धार जिले में अन्य जगह जमीन अलॉट करे। सामुदायिक भावना बनाए रखने के लिए मस्जिद के लिए अलग से जगह दी जाएगी।
अयोध्या राम मंदिर फैसले का हवाला
Indore High Courtने इसमें अयोध्या के राम मंदिर फैसले का हवाला दिया गया। विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है। कोर्ट में बेंच ने 3 मिनट अपना आदेश पढ़कर सुनाया।
ASI की रिपोर्ट बनी आधार
हाईकोर्ट के इस फैसले का आधार एएसआई की 2100 पन्नों की रिपोर्ट बनी। इसके लिए 98 दिन तक परिसर का वैज्ञानिक तरीके से सर्वे हुआ था। हाईकोर्ट ने फैसले में लिखा कि इस सर्वे की रिपोर्ट में कई तथ्य सामने आए हैं, जो वैज्ञानिक तरीके से हुआ था।
इसमें बताया गया है कि राजा भोज के समय पर बनी संरचना है। इस संबंध में कई तथ्य सामने आए हैं। भोजशाला को भले ही हिंदुओं की माना गया है, लेकिन मॉनिटरिंग और पूरा कंट्रोल एएसआई को दिया गया है। साथ ही प्रशासन को अन्य व्यवस्थाएं करने के लिए कहा गया है।
जानिए पूरी टाइमलाइन...
1034 – स्थापना और निर्माण
राजा भोज ने ज्ञान की साधना और मां सरस्वती की आराधना के लिए भोजशाला का निर्माण करवाया।
संरचना और विश्वविद्यालय
भोजशाला नालंदा और तक्षशिला की तरह विशाल आवासीय संस्कृत विश्वविद्यालय था।
सजावट और मूर्तिकला
सैकड़ों अलंकृत लाल स्तंभों पर आधारित सभा भवन की छत और दीवारों पर देवी-देवताओं की मूर्तियां उकेरी गई थीं।
शिक्षक और अध्ययन केंद्र
भवन में माध, वाणभट्ट, कालिदास, भवभूति, भास्कर भट्ट, धनपाल, मानतुजाचार्य जैसे विद्वान अध्ययन करते थे।
यज्ञकुंड और प्रतिमा स्थापना
भवन के मध्य में विशाल यज्ञकुंड था। 1035 में मां सरस्वती की सुंदर प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा वसंत पंचमी के दिन हुई।
महाराजा भोज के पास था आयुध विज्ञान
भोज 72 कलाओं और 36 तरह के आयुध विज्ञान में निपुण थे। उन्होंने 1065 तक शासन किया और मंदिर, तालाब, घाट व विद्यालयों का निर्माण करवाया।
1305 – अलाउद्दीन खिलजी का आक्रमण
अलाउद्दीन खिलजी ने मालवा पर आक्रमण कर इस्लामी राज्य की स्थापना की। भोजशाला सहित कई ऐतिहासिक स्थलों को ध्वस्त किया गया।
भोजशाला पर बाद के प्रभाव
1401 में दिलावर खां गौरी ने विजय मंदिर को नष्ट किया। 1514 में मेहमूद शाह खिलजी ने भोजशाला को मस्जिद में बदलने का प्रयास किया। कमाल मौलाना की याद में 204 वर्ष बाद मकबरा बनवाया गया।
हिंदू और मुस्लिम पक्ष में विवाद
इसके बाद से ही धार भोजशाला पर हिंदू और मुस्लिम पक्ष के बीच विवाद चल रहा था।
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