विजय शाह से जज ने पूछा- किसी का उपहास इसलिए क्योंकि वह मुस्लिम है, पढ़ें कोर्ट का पूरा आदेश
मंत्री विजय शाह की विवादित टिप्पणी के मामले में जबलपुर हाईकोर्ट मे स्वत: संज्ञान लेकर जो कुछ सुनाया वो भारत की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी बातें हैं। मामले की सुनवाई कर रहे जज अतुल श्रीधरन ने जो-जो बातें कहीं, वे न सिर्फ सेना के सम्मान के लिए बेहद अहम हैं, बल्कि भारत के हर समुदाय को यह भरोसा भी दिलाती हैं कि देश में कानून का राज है। आप भी कोर्ट की इस सुनवाई को पढ़ें। आपकी सुविधा के लिए कानूनी शब्दों को सरल भाषा में किया गया है।
जस्टिस अतुल श्रीधरन ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस अदालत को विभिन्न समाचार पत्रों और डिजिटल मीडिया में प्रकाशित एक घटना के कारण इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेने के लिए बाध्य होना पड़ा है। यह घटना सोमवार को महू के अंबेडकर नगर के रायकुंडा गांव में एक सार्वजनिक समारोह में हुई। मध्य प्रदेश सरकार के एक मौजूदा मंत्री श्री विजय शाह ने भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है।
सेना को बताया सबसे भरोसेमंद
जज अतुल श्रीधरन ने आगे कहा कि सशस्त्र बल, शायद इस देश में मौजूद अंतिम संस्था है, जो ईमानदारी, उद्योग, अनुशासन, त्याग, निस्वार्थता, चरित्र, सम्मान और अदम्य साहस को दर्शाती है। इससे देश का कोई भी नागरिक जो इनका सम्मान करता है, खुद को जोड़ सकता है। श्री विजय शाह ने इसी को निशाना बनाया है, जिन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया है।
श्रीधरन ने कहा कि यहां उल्लेख किया जाना चाहिए कि कर्नल सोफिया कुरैशी, विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ, सशस्त्र बलों का चेहरा थीं, जो मीडिया और राष्ट्र को पाकिस्तान के खिलाफ हमारी सशस्त्र बलों द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन सिंदूर की प्रगति के बारे में जानकारी दे रही थीं।
कर्नल सोफिया पर ही मंत्री ने टिप्पणी की…
टिप्पणियां सेना के लिए अपमानजनक और खतरनाक
कोर्ट ने कहा कि इसके अलावा, अखबारों की रिपोर्ट और इंटरनेट पर उपलब्ध डिजिटल सामग्री का एक ढेर है जिसमें मंत्री का भाषण स्पष्ट है। उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री, श्री नरेंद्र मोदी को आतंकवादियों को छांटने के लिए आतंकवादियों की बहन को भेजने के लिए संदर्भित किया है। उनकी टिप्पणियां न केवल अधिकारी के लिए, बल्कि सशस्त्र बलों के लिए भी अपमानजनक और खतरनाक हैं।
भारत की एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला कार्य
इस अदालत के सामने जो पहला प्रावधान आया, वह भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 152 (BNS) थी। यह भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता को खतरे में डालने वाला एक कार्य है। यह इस प्रकार है: "152. जो कोई भी, जानबूझकर या जानबूझकर, शब्दों से, चाहे बोले गए या लिखित, या संकेतों से, या दृश्य प्रतिनिधित्व से, या इलेक्ट्रॉनिक संचार से या वित्तीय साधन के उपयोग से, या अन्यथा, अलगाव या सशस्त्र विद्रोह या विध्वंसक गतिविधियों को उत्तेजित करता है या उत्तेजित करने का प्रयास करता है, या अलगाववादी गतिविधियों की भावनाओं को प्रोत्साहित करता है या भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालता है; या इस तरह के किसी भी कार्य में लिप्त होता है या करता है, तो उसे आजीवन कारावास या कारावास से दंडित किया जाएगा जो सात साल तक बढ़ सकता है। जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
मंत्री का बयान अलगाववादी
जस्टिस अतुल श्रीधरन ने आगे कहा कि प्रथम दृष्टया, मंत्री का यह बयान कि कर्नल सोफिया कुरैशी उस आतंकवादी की बहन हैं जिसने पहलगाम में हमला किया था, अलगाववादी गतिविधियों की भावनाओं को प्रोत्साहित करता है। यह भारत की संप्रभुता या एकता और अखंडता को खतरे में डालता है। इस प्रकार, यह अदालत, प्रथम दृष्टया, संतुष्ट है कि मंत्री के खिलाफ बनाया गया पहला अपराध बीएनएस की धारा 152 के तहत था। इसके बाद, दूसरी धारा जिसके तहत मंत्री पर, प्रथम दृष्टया, मुकदमा चलाया जाना बाध्य है। यह भारतीय दंड संहिता की धारा 196 के तहत है, जो धर्म, जाति, जन्म स्थान, निवास, भाषा आदि के आधार पर विभिन्न लोगों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना और सद्भाव बनाए रखने के लिए प्रतिकूल कार्य करना है। आरोपी तीन साल तक की सजा, जुर्माना या दोनों का दंड हो सकता है।
क्या किसी का इसलिए उपहास किया जा सकता है, क्योंकि वह मुस्लिम है
धारा 197 की उप-धारा (1) का खंड (ग) व्यक्तियों के किसी भी वर्ग के दायित्व के संबंध में किसी भी दावे, सलाह, याचिका या अपील को प्रकाशित करने के कार्य को आपराधिक बनाता है, उनके किसी धार्मिक, नस्लीय, भाषाई या क्षेत्रीय समूह या जाति या समुदाय का सदस्य होने के कारण, और ऐसा दावा, सलाह, याचिका या अपील ऐसे सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच वैमनस्य या शत्रुता या घृणा या दुर्भावना की भावनाएं पैदा करता है या करने की संभावना है। मंत्री विजय शाह द्वारा दिए गए बयान में प्रथम दृष्टया मुस्लिम धर्म के सदस्यों और अन्य व्यक्तियों के बीच जो उसी धर्म से संबंधित नहीं हैं, वैमनस्य और शत्रुता या घृणा या दुर्भावना की भावनाएं पैदा करने की प्रवृत्ति है।
आज शाम तक करें FIR
जस्टिस अतुल श्रीधरन ने आगे कहा कि उपरोक्त में जो कुछ भी देखा गया है, उसके आधार पर यह न्यायालय मध्य प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को मंत्री विजय शाह के खिलाफ बी.एन.एस. की धारा 152, 196(1)(ख) और 197(1)(ग) के तहत अपराधों के लिए तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देता है। यह आज शाम तक किया जाना चाहिए, ऐसा न करने पर, कल जब मामला सूचीबद्ध होता है, तो न्यायालय राज्य के पुलिस महानिदेशक के खिलाफ इस आदेश की अवमानना की कार्यवाही करने पर विचार कर सकता है। इस आदेश को तत्काल राज्य के पुलिस महानिदेशक के कार्यालय को प्रेषित किया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि यह किया जाए। इस मामले को कल 15 मई की सूची में सबसे ऊपर सूचीबद्ध करें।