व्यापमं घोटाले में स्टॉक गवाह, पुताई करने वाला ही बना 847 आरोपियों का साक्षी
समझें क्या है पूरा मामला...
- सुनील कुशवाहा व्यापमं घोटाले के 10 मामलों में 847 आरोपियों के खिलाफ गवाह हैं।
- सुनील कुशवाहा को आरोपियों के बयानों की पुष्टि करने के लिए गवाह के तौर पर पेश किया था।
- सुनील कुशवाहा ने शुरुआत में सरकार के पक्ष में बयान दिए थे।
- सुनील का आरोप है कि पुलिस कई बार सिर्फ हस्ताक्षर करने के लिए बुलाती थी।
- एक ही गवाह को बार-बार पेश करने के मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जताई है।
मध्य प्रदेश के व्यापमं घोटाले से जुड़ा एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इसे सुनकर कोई भी हैरान रह जाएगा। भोपाल के कोटरा सुल्तानाबाद में रहने वाले सुनील कुशवाहा पेशे से पुताई का काम करते हैं।
दिखने में सुनील बेहद साधारण से लगते हैं। वहीं सुनील की हकीकत यह है कि वे व्यापमं घोटाले में एक-दो नहीं, बल्कि पूरे 847 आरोपियों के खिलाफ अकेले गवाह हैं।
STF ने 10 मामलों में आरोपियों के बयानों की पुष्टि करने के लिए सुनील कुशवाहा को गवाह बनाया है। इतने आरोपियों के खिलाफ गवाह होने के बावजूद सुनील को कोई सुरक्षा नहीं दी गई है।
हालांकि उन्होंने खुद भी कभी सुरक्षा की मांग नहीं की। इस पूरे मामले पर एसटीएफ के एडीजी डी श्रीनिवास वर्मा का कहना है कि ये मामले काफी पुराने हैं। इसलिए वे पूरी जानकारी जुटाने के बाद ही इस पर कुछ कह पाएंगे।
अदालत में बदल गए गवाह के बयान
इस मामले में सबसे दिलचस्प मोड़ तब आया जब सुनील कुशवाहा ने अदालत में मुख्य परीक्षण के दौरान अपने बयान बदल दिए। इससे पहले शुरुआती जांच में उन्होंने शासन यानी पुलिस के पक्ष में ही बयान दिए थे।
सुनील ने अदालत को बताया कि साल 2013 से ही एसटीएफ थाने में उन्हें बुलाया जाता था। कभी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए, कभी सामान की जब्ती तो कभी उनके बयानों को दर्ज करने जैसी कार्रवाइयों के लिए बुलाया जाता था।
कई बार तो उनके सामने कार्रवाई होती थी, लेकिन कई बार ऐसा भी हुआ कि पुलिस ने कागजात पहले ही तैयार कर लिए थे। बाद में उन्हें सिर्फ साइन करने के लिए बुलाया।
सुनील ने पीपीजी 2012 के एक मामले की सुनवाई का भी जिक्र किया। सुनील ने कहा कि पूछताछ के दौरान जो आरोपी बताते थे उसे टाइप किया जाता था।
सुनील ने बताया कि इसके बाद वे खुद आरोपी और पुलिस अधिकारी उस पर हस्ताक्षर करते थे। सुनील के मुताबिक किस आरोपी से कब पूछताछ हुई, इनमें से कुछ बातें तो उन्हें याद हैं और कुछ बातें वे भूल चुके हैं।
स्टॉक गवाहों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
एक ही गवाह को बार-बार कई मामलों में इस्तेमाल करने को स्टॉक गवाह कहा जाता है। इस व्यवस्था पर अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कड़ा रुख अपनाया है।
बता दें कि हाल ही में मध्य प्रदेश के मऊगंज और इंदौर से ऐसे मामले सामने आए थे, जहां 100 से 150 केसों में एक ही गवाह को पेश किया जा रहा था।
सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई थी। इसके बाद ऐसे गवाहों पर नजर रखने के लिए एक विशेष कमेटी का गठन किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की नाराजगी के बाद जस्टिस विवेक अग्रवाल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। यह कमेटी इस तरह के स्टॉक गवाहों के मामलों की निगरानी करेगी।
आपराधिक मामले मेमोरेंडम गवाह
रिटायर्ड जस्टिस दीपक अग्रवाल ने बताया कि मेमोरेंडम गवाह किसी भी आपराधिक मामले में बेहद अहम होता है। आरोपी इसी गवाह के सामने अपना अपराध कबूल करता है। वहीं यदि यह गवाह बाद में अपने बयान से मुकर जाए, तो केस पर बड़ा असर पड़ सकता है।
जस्टिस अग्रवाल ने कहा कि मेमोरेंडम गवाह होने से यह भी साबित होता है कि पुलिस किसी व्यक्ति को मनमाने तरीके से आरोपी नहीं बना सकती। अदालत में यही गवाह बताता है कि आरोपी ने उसके सामने अपना जुर्म स्वीकार किया था।
FAQ
- स्टॉक गवाह क्या होते हैं ?
जब पुलिस या जांच एजेंसियां अपने मामलों को साबित करने के लिए बार-बार एक ही व्यक्ति को कई अलग-अलग केसों में गवाह बनाती हैं, तो उन्हें स्टॉक गवाह कहा जाता है। - मेमोरेंडम गवाह क्या होता है।
कानूनी प्रक्रिया में मेमोरेंडम गवाह या मेमो गवाह उस व्यक्ति को कहा जाता है जो पुलिस द्वारा की गई किसी विशेष कार्रवाई, जैसे कि जब्ती, गिरफ्तारी, या पंचनामा का गवाह बनता है।
ये खबरें भी पढ़िए...
मध्य प्रदेश व्यापमं घोटाला, 122 आरोपियों पर 10 साल बाद होंगे आरोप तय
जिन छात्रों को व्यापमं घोटाला में बर्खास्त किया, उन्हें ही चुपचाप बांट दी डिग्री
व्यापमं घोटाला में बड़ा फैसला : पुलिस कॉन्स्टेबल साजन सिंह ठाकुर को CBI कोर्ट ने दी क्लीन चिट
व्यापमं घोटाला : मध्य प्रदेश सरकार और सीबीआई को सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस