वक्फ बोर्ड की नियुक्ति से गरमाई सियासत, कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने खोला मोर्चा

Sandeep Kumar | Jul 06, 2026, 18:34 IST
वक्फ बोर्ड की नियुक्ति से गरमाई सियासत
मध्य प्रदेश सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। नए बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को जगह दी गई है। इसे लेकर कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने विरोध जताया है। उनका कहना है कि यह मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन हुआ।
  • नए बोर्ड में दो हिंदू सदस्य शामिल किए गए।
  • कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने विरोध जताया।
  • मसूद ने मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित बताया।
  • उन्होंने सुप्रीम कोर्ट जाने का ऐलान किया।

दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की एंट्री

राज्य सरकार ने नए वक्फ (Waqf) कानून के प्रावधानों के तहत मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन किया है। ऐसा करने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है।



नए गठित 10 सदस्यीय बोर्ड में पहली बार दो गैर-मुस्लिम विशेषज्ञ शामिल किए गए हैं। इसके साथ ही चार महिला सदस्यों को भी जगह मिली है। यह बदलाव बोर्ड की पूरी संरचना को नया रूप देता है।



सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है मामला

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB – All India Muslim Personal Law Board) के सदस्य और कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इस पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का मुद्दा उन मुख्य बिंदुओं में शामिल है, जिनकी जांच सुप्रीम कोर्ट कर रहा है। मसूद के मुताबिक यह फैसला सही समय पर नहीं लिया गया। जब मामला अदालत में है, तब ऐसा कदम जल्दबाजी भरा लगता है।



विधायक ने बताया गलत फैसला

आरिफ मसूद ने कहा कि वक्फ बोर्ड में दूसरे समुदाय के सदस्यों को शामिल करना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने खुद दो मुद्दों पर संज्ञान लिया था। इनमें एक मुद्दा यही था कि दूसरे समुदाय का कोई व्यक्ति बोर्ड में शामिल नहीं होना चाहिए।


उन्होंने यह भी बताया कि कोर्ट की यह टिप्पणी पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य याचिकाकर्ताओं की दलीलों पर आधारित थी।



सरकार पर लगाया जल्दबाजी का आरोप

मसूद ने सवाल उठाया कि जब पूरी प्रक्रिया अदालत में लंबित है तो सरकार ने इतनी जल्दी फैसला क्यों लिया। उन्होंने कहा कि देश की बाकी राज्य सरकारें ऐसा कोई कदम नहीं उठा रही हैं। उनका आरोप है कि प्रावधान में केवल दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की बात थी। लेकिन सरकार ने तीन सदस्य नियुक्त कर दिए। मसूद ने इसे नियमों का उल्लंघन बताते हुए सुप्रीम कोर्ट जाने की बात दोहराई।



कोर्ट ने रोक नहीं लगाई है

मसूद ने यह भी साफ किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक इस पर कोई रोक नहीं लगाई है। उन्होंने बताया कि अटॉर्नी जनरल ने कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि जरूरत पड़ने पर सरकार सुधार करेगी। इसके लिए सरकार ने समय भी मांगा था।



सनवर पटेल बने अध्यक्ष

मध्य प्रदेश सरकार ने नवगठित वक्फ बोर्ड में सनवर पटेल को अध्यक्ष नियुक्त किया है। इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी गई है। बोर्ड में शामिल दोनों हिंदू सदस्य मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव हैं। बता दें कि 5 अप्रैल 2025 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ संशोधन बिल को मंजूरी दी थी। यह बिल संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस के बाद पारित हुआ था। इसके खिलाफ ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड पहले ही सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है।



FAQ

  1. एमपी वक्फ बोर्ड में कितने गैर-मुस्लिम सदस्य शामिल हैं?
    नए बोर्ड में दो हिंदू सदस्य मनोज मालपानी और अनिमेष भार्गव शामिल हैं। विधायक आरिफ मसूद का दावा है कि कुल तीन गैर-मुस्लिम सदस्य नियुक्त किए गए हैं। बोर्ड में कुल 10 सदस्य हैं।
  2. वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन कब हुआ?
    मध्य प्रदेश सरकार ने हाल ही में नए वक्फ कानून के तहत बोर्ड का पुनर्गठन किया है। इसमें सनवर पटेल को अध्यक्ष बनाया गया है। एमपी ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना है।

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