MP हाईकोर्ट में वक्फ बोर्ड की एंट्री, कहा- बिना सुने कोई फैसला न हो
समझें क्या है पूरा मामला
- MP वक्फ बोर्ड में नियुक्तियों पर विवाद जारी है।
- दो गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर सवाल उठे।
- आरिफ मसूद ने सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही।
- वक्फ बोर्ड ने जबलपुर हाईकोर्ट में केविएट लगाई।
- बोर्ड ने पहले अपना पक्ष सुनने की मांग की।
विधायक के ऐलान के बाद उठाया कदम
वक्फ बोर्ड अध्यक्ष सनवर पटेल ने मीडिया से बातचीत में इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि केविएट दाखिल करने की वजह किसी आशंका से ज्यादा आरिफ मसूद का सार्वजनिक बयान है। मसूद ने खुले तौर पर कहा था कि वे एमपी हाईकोर्टजाएंगे। इसी के बाद बोर्ड ने वैधानिक प्रक्रिया के तहत केविएट दायर की।
सिर्फ एहतियाती कानूनी कदम
पटेल ने साफ किया कि केविएट का मकसद किसी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट जाने से रोकना नहीं है। इसका उद्देश्य सिर्फ यह सुनिश्चित करना है कि बोर्ड का पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश पारित न हो। उनके मुताबिक अगर कोई कोर्ट जाता है, तो संबंधित पक्ष की बात भी सुनी जानी चाहिए।
आरिफ मसूद ने पहले क्या कहा था
इससे पहले कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि वक्फ बोर्ड में दो हिंदू सदस्यों को शामिल करने के फैसले को वे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। उनका कहना था कि मामला पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए नए बोर्ड के गठन में जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए थी।
मसूद ने यह भी आरोप लगाया था कि सरकार ने दो अन्य समाज के सदस्यों के स्थान पर तीन गैर-मुस्लिम प्रतिनिधियों को शामिल किया है। उनके मुताबिक इसकी वजह यह है कि आयुक्त भी अन्य समुदाय से हैं।
विवाद के बीच बढ़ी कानूनी हलचल
वक्फ बोर्ड के गठन के बाद से प्रदेशभर में विरोध जारी है। कई मुस्लिम संगठनों ने प्रदर्शन किए हैं और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजे हैं। कई उलेमा ने भी सार्वजनिक रूप से इस फैसले का विरोध किया। निकाह काजी मोहम्मद मआज खान ने तो दो पदों से इस्तीफा भी दे दिया था। अब हाईकोर्ट में केविएट दाखिल होने के बाद यह विवाद कानूनी मोर्चे पर भी सक्रिय हो गया है।
क्या होती है केविएट
केविएट अदालत में दायर किया जाने वाला एक एहतियाती कानूनी आवेदन होता है। इसके जरिए संबंधित पक्ष अदालत से अनुरोध करता है कि यदि मामले में कोई याचिका दायर हो, तो उसका पक्ष सुने बिना कोई अंतरिम आदेश पारित न किया जाए। वक्फ बोर्ड का कहना है कि उसने इसी कानूनी प्रावधान का इस्तेमाल कर अपना पक्ष सुरक्षित रखा है।
FAQ
- वक्फ बोर्ड ने केविएट क्यों दाखिल की?
कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के सुप्रीम कोर्ट जाने के ऐलान के बाद बोर्ड ने यह कदम उठाया। बोर्ड चाहता है कि किसी भी याचिका पर आदेश से पहले उसका पक्ष भी सुना जाए। यह एक एहतियाती कानूनी कदम है। - केविएट का क्या मतलब होता है?
केविएट एक एहतियाती कानूनी आवेदन है। इसके जरिए पक्ष अदालत से मांग करता है कि उसे सुने बिना कोई अंतरिम आदेश पारित न हो। वक्फ बोर्ड ने इसी प्रावधान का उपयोग किया है।
ये भी पढ़ें...
MP वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिमों की एंट्री पर बवाल, सड़क पर उतरा मुस्लिम समाज
स्वामी कैलाशानंद का वक्फ बोर्ड पर बड़ा बयान, सरकार की मॉनिटरिंग को बताया सही
वक्फ बोर्ड विवाद और गहराया, भोपाल के निकाह काजी नदवी का इस्तीफा, मुफ्ती भी नाराज
कौन हैं वक्फ बोर्ड के गैर-मुस्लिम सदस्य मनोज मालपानी और अनिमेश भार्गव?