एक रुपए में वेब सीरीज दिखाने के नाम पर साइबर फ्रॉड, इंदौर में महीने भर में 72 लोग हो चुके ठगी का शिकार

Sept 22, 2026, 10:57 IST
वेब सीरीज के नाम पर साइबर फ्रॉड
एमपी में केवल 1 रुपए में वेब सीरीज दिखाने के नाम पर साइबर ठग लोगों के बैंक खाते खाली कर रहे हैं। जालसाज सोशल मीडिया पर फर्जी लिंक भेजकर लोगों के बैंक खाते, कार्ड और यूपीआई की जानकारी चुरा रहे हैं। पिछले एक महीने के अंदर इंदौर क्राइम ब्रांच में इस तरह की 72 शिकायतें दर्ज हुई हैं।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • इंदौर में साइबर ठग केवल 1 रुपए में लोकप्रिय वेब सीरीज दिखाने का झांसा दे रहे हैं।
  • पिछले एक महीने के अंदर इंदौर क्राइम ब्रांच में इस तरह की 72 शिकायतें दर्ज हुई हैं।
  • जालसाज सोशल मीडिया पर फर्जी लिंक भेजकर लोगों के बैंक खाते, कार्ड और यूपीआई की जानकारी चुरा रहे हैं।
  • अविनाश शास्त्री नाम के व्यक्ति के खाते से ऐप डाउनलोड करते ही 10 हजार रुपए उड़ गए।
  • एमबीए के छात्र अनिकेत के गूगल-पे पर धोखे से हर महीने कटने वाला ऑटो-पे चालू कर दिया गया।

1 रुपए का लालच और खाली खाता

मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में साइबर अपराधियों ने लोगों की जेब पर डाका डालने का एक बेहद चालाक रास्ता निकाला है। आजकल लोगों में नई वेब सीरीज और सीरियल्स देखने का जबरदस्त क्रेज है। इसी दीवानगी का फायदा उठाकर ठग इंटरनेट पर बेहद सस्ता ऑफर पेश कर रहे हैं। वे दावा करते हैं कि आप महज 1 रुपए खर्च करके अपने पसंदीदा शो का नया एपिसोड देख सकते हैं।



जैसे ही कोई यूजर इस सस्ते ऑफर के चक्कर में आता है, वह ठगों के बुने जाल में बुरी तरह उलझ जाता है। इंदौर क्राइम ब्रांच के पास बीते एक महीने में इस तरह की ठगी की 72 शिकायतें पहुंच चुकी हैं। पुलिस अब इन सभी मामलों की गहराई से पड़ताल कर रही है।




ठग कैसे फंसा रहे अपना शिकार?

साइबर अपराधी सोशल मीडिया पर बहुत सोच-समझकर काम कर रहे हैं। वे ऐसे शोज और वेब सीरीज को चुनते हैं, जिन्हें दर्शक सबसे ज्यादा देखना पसंद करते हैं।



  • आकर्षक पोस्ट बनाना: वे सोशल मीडिया पर वीडियो क्लिप डालते हैं और उस पर न्यू एपिसोड आउट नाउ लिख देते हैं।
  • चंद सेकंड का वीडियो: लोगों का भरोसा जीतने और उत्सुकता बढ़ाने के लिए पोस्ट के साथ कुछ सेकंड का वीडियो टीजर जोड़ते हैं।
  • फर्जी लिंक शेयर करना: वीडियो के ठीक नीचे 1 रुपए में पूरा शो देखने का लिंक दिया जाता है।
  • पर्सनल डिटेल मांगना: जैसे ही कोई यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है, एक नया पेज खुल जाता है। वहां सब्सक्रिप्शन पूरा करने के नाम पर बैंक खाते का नंबर, यूपीआई आईडी और डेबिट कार्ड की निजी जानकारी भरने को कहा जाता है।
  • खाते से रकम कटना: जानकारी डालते ही या तो बैंक खाते से एकमुश्त पैसे कट जाते हैं या फिर हर महीने पैसे कटने का ऑटो-पे (Auto-Pay) सिस्टम शुरू हो जाता है।

केस 1: ऐप डाउनलोड करते ही उड़ गए 10 हजार रुपए

पीड़ित अविनाश शास्त्री ने इंदौर क्राइम ब्रांच को अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया स्क्रॉल करते समय उन्हें 1 रुपए में लेटेस्ट वेब सीरीज देखने का एक ऑफर दिखा। उन्होंने जैसे ही दिए गए लिंक पर क्लिक किया, फोन में एक नई ऐप खुल गई।



उस ऐप को डाउनलोड करते ही अविनाश के बैंक अकाउंट की पूरी डिटेल ठगों के पास पहुंच गई। कुछ ही पलों के अंदर उनके खाते से 10 हजार रुपए कटने का मैसेज आ गया। नुकसान होते ही अविनाश तुरंत बैंक पहुंचे और अपना खाता ब्लॉक कराया। इसके बाद उन्होंने क्राइम ब्रांच में जाकर शिकायत दर्ज कराई।




केस 2: एमबीए छात्र के गूगल-पे पर शुरू हुआ ऑटो-पे

दूसरा मामला एमबीए की पढ़ाई कर रहे छात्र अनिकेत का है। अनिकेत के मोबाइल पर लोकप्रिय टीवी शो क्राइम पेट्रोल जैसा एक शॉर्ट वीडियो आया था। उस वीडियो पर लिखा था कि 1 रुपए देकर पूरा एपिसोड देखा जा सकता है।



अनिकेत ने बिना सोचे-समझे लिंक पर क्लिक कर दिया। लिंक पर क्लिक करते ही उनके गूगल-पे अकाउंट पर ऑटो-पे की सर्विस एक्टिवेट हो गई। इसके बाद हर महीने उनके खाते से अपने-आप पैसे कटने लगे। अनिकेत को काफी समय तक इसका अहसास ही नहीं हुआ। जब उन्होंने अपना बैंक स्टेटमेंट चेक किया, तब जाकर इस फर्जीवाड़े की पोल खुली। इसके बाद उन्होंने तुरंत इस ऑटो-पे सिस्टम को बंद कराया और पुलिस को खबर दी।



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