बाबा बागेश्वर के बयान के बाद बंगाल में बवाल, डेमेज कंट्रोल करने उतरे सीएम शिवेंदू
पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर बाबा बागेश्वर का बयान अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। एक तरफ बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने बाबा के बयान का सीधा विरोध कर दिया।
वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारीस्थिति को संभालने यानी डैमेज कंट्रोल करने के लिए खुद मैदान में उतर आए हैं। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को करारा जवाब देते हुए और स्थानीय परंपरा का पूरा मान रखते हुए कालीघाट मंदिर में मछली का भोग खाया। साथ ही बागेश्वर बाबा का भी समर्थन किया।
कालीघाट मंदिर में खाया मछली का भोग
बता दें कि कौशिकी अमावस्या के पावन मौके पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी कोलकाता के मशहूर कालीघाट काली मंदिर पहुंचे थे। वहां उन्होंने मां काली की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
पूजा पूरी होने के बाद वह मंदिर परिसर में जमीन पर बैठे और वहां तैयार किया गया पारंपरिक भोग ग्रहण किया। कालीघाट मंदिर में मुख्यमंत्री ने जो भोग खाया उसमें मछली का मूरा, तली हुई मछली, और बसंती पुलाव थे।
तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर वायरल
मुख्यमंत्री के इस भोग को खाने की तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं। बता दें कि पश्चिम बंगाल में मछली खान-पान का एक मुख्य हिस्सा है।
राज्य में दुर्गा पूजा के दिनों में भी लोग बड़े चाव से मछली खाते हैं और यहां के शक्तिपीठों व मंदिरों में देवी को मछली का भोग लगाने की बहुत पुरानी परंपरा रही है।
मैं सनातनी हिंदू हूं- शुभेंदु अधिकारी
कालीघाट में मछली का भोग खाने के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद को एक सच्चा सनातनी हिंदू बताया। उन्होंने अपने रोजमर्रा और पूजा-पाठ के खान-पान के नियमों को बहुत ही साफ शब्दों में सबके सामने रखा।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बताया कि...
- महाअष्टमी की पूजा के दिन: जब वह मां दुर्गा की पूजा करते हैं, तो पूरी तरह से सात्विक भोजन ही करते हैं।
- कार्तिक का महीना: पूरे कार्तिक महीने में वे सात्विक नियमों का कड़ाई से पालन करते हैं।
- मां काली की पूजा: इस दौरान वे मां काली को बलि चढ़ाए जाने वाले बकरे का प्रसाद यानी मांस भी खाते हैं।
- कालीघाट का पारंपरिक भोग: मंदिर में चढ़ाए गए भोग के तहत उन्होंने मछली का मूरा, तली मछली और बसंती पुलाव खाया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कालीघाट में देवी काली को मछली और मांस का भोग चढ़ाने की धार्मिक परंपरा है। उन्होंने मंदिर के इसी पारंपरिक नियम का आदर करते हुए यह भोग स्वीकार किया है।
बागेश्वर बाबा का किया बचाव
मुख्यमंत्री ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री का बचाव किया। उन्होंने कहा कि बाबा ने किसी पर अपनी बात जबरन थोपी नहीं थी, बल्कि सिर्फ अपनी व्यक्तिगत राय सामने रखी थी।
इससे पहले विधानसभा के विशेष सत्र में बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि जिन लोगों ने भवानीपुर थाने के बाहर बागेश्वर बाबा की तस्वीरें जलाई हैं, उनके खिलाफ तुरंत और सख्त कानूनी कदम उठाए जाएं।
अपमान बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं होगा
मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि एक संत हमारे राज्य में आए। उन्होंने अपने तरीके से देशभक्ति, राष्ट्रवाद और देश की संस्कृति की बात कही थी। जो लोग उनकी बातों को अपनाना चाहते हैं वे ऐसा कर सकते हैं, और जिन्हें उनकी बात नहीं माननी वे उसे अस्वीकार करने के लिए पूरी तरह आजाद हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने आगे कहा कि किसी भी संत का अपमान करना और थाने के सामने उनकी तस्वीरें जलाना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पश्चिम बंगाल में अब तुष्टीकरण की राजनीति का खेल पूरी तरह बंद होना चाहिए।
ये था बाबा का बयान...
दरअसल यह पूरा विवाद हावड़ा से शुरू हुआ। हाल ही में धीरेंद्र शास्त्री हावड़ा एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने लोगों से दुर्गा पूजा के दौरान नॉनवेज न खाने की अपील की थी। साथ ही शास्त्री ने ऐसा न करने वालों को पाखंडी तक बता दिया था। इसी के बाद से उनका यह बयान तेजी से वायरल हुआ और बंगाल की सियासत में हलचल मच गई।
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