कौन हैं DFO नेहा श्रीवास्तव जिन्होंने लगाए विधायक अनुभा मुंजारे पर वसूली के आरोप

Jitendra Shrivastava | Sept 03, 2025, 17:45 IST
Photograph: (THESOOTR)
नेहा श्रीवास्तव, जो 2015 UPSC IFS परीक्षा में 12वीं रैंक प्राप्त कर भारतीय वन सेवा (IFS) में डीएफओ बनीं, वर्तमान में बालाघाट की कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे पर वसूली के आरोप लगा रही हैं। जानिए उनकी कड़ी मेहनत, दृढ़ इच्छा शक्ति और सफलता की कहानी...

बालाघाट की कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजार पर वसूली के लिए धमकाने के आरोप लगाने वाली DFO नेहा श्रीवास्तव चर्चा में हैं। thesootr पर एक्सक्लुसिव खबर आने के बाद से ही लोग सोशल मीडिया पर उनके बारे में सर्च कर रहे हैं। तो आइए जानते हैं उनके बारे में सबकुछ…



12वीं रैंक पाकर बनीं हैं IFS

नेहा श्रीवास्तव ने 2015 में UPSC की भारतीय वन सेवा परीक्षा यानी IFS में 12वां स्थान प्राप्त किया था। उनकी कड़ी मेहनत और मजबूत तैयारी के कारण उन्होंने न केवल UPSC परीक्षा में सफलता पाई, बल्कि भारतीय वन सेवा में डीएफओ के रूप में महत्वपूर्ण पद पर भी काम कर रही हैं।



झारखंड की रहने वाली हैं नेहा श्रीवास्तव

DFO Neha Srivastava


नेहा श्रीवास्तव, झारखंड की एक लड़की, जिन्होंने 2015 UPSC भारतीय वन सेवा परीक्षा में 12वां स्थान प्राप्त किया, आज एक प्रेरणा बन चुकी हैं। उनकी कड़ी मेहनत और लीडरशीप ने उन्हें न केवल UPSC परीक्षा में सफलता दिलाई बल्कि भारतीय वन सेवा में भी उन्हें महत्वपूर्ण पदों तक पहुंचाया।



शिक्षा और शुरुआती जीवन

DFO Neha Srivastava (2)


नेहा श्रीवास्तव का जन्म झारखंड के हजारीबाग में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा आरके मिशन, देवघर से की। इसके बाद, उन्होंने मुंबई के पद्मश्री डीयू पटिल कॉलेज से जैव प्रौद्योगिकी में बी.टेक किया।



व्यक्तिगत जीवन और UPSC की ओर कदम

नेहा ने सबसे पहले अपने परिवार के व्यवसाय में शामिल होने का सोचा था, लेकिन बाद में उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करने का निर्णय लिया। उनके चाचा, जो एक सिविल सेवक हैं, ने उन्हें मार्गदर्शन दिया और यह सलाह दी कि वह सिविल सेवा परीक्षा के लिए तैयारी करें।



पढिए... क्या है DFO नेहा श्रीवास्तव और कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे विवाद

बालाघाट की कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे पर गंभीर आरोप लगे हैं कि उन्होंने वन मंडल अधिकारी (DFO) नेहा श्रीवास्तव से खुलेआम 2-3 लाख रुपए की डिमांड की। इतना ही नहीं डीएफओ से गाली- गलौज कर जिले से बाहर ट्रांसफर करवाने का भी आरोप है।



क्या है DFO नेहा श्रीवास्तव से पैसे मांगने का मामला

जब नेहा श्रीवास्तव ने मांग मानने से साफ इनकार किया, तो विधायक ने न केवल आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया बल्कि परिवार को टारगेट करने तक की धमकी दी। यही नहीं, उन्होंने सभा में मौजूद अन्य वन अधिकारियों और पूरे विभाग को अपमानित करते हुए चेतावनी दी कि कोई भी अधिकारी जिले में पदस्थ नहीं रह सकेगा।



नीचे: वह पत्र जो DFO नेहा श्रीवास्तव ने अपने विभाग को लिखा था


DFO नेहा श्रीवास्तव की चिट्ठी का हिंदी अनुवाद पढ़ें…



आदरणीय महोदय,

मैं पूरी गंभीरता के साथ दिनांक 16.08.2025 (सार्वजनिक अवकाश) को वन विश्राम गृह, बालाघाट में माननीय विधायक (बालाघाट) श्रीमती अनुभा मुंजारे से संबंधित एक घटना को दर्ज करना चाहती हूं।

लगभग शाम 4 बजे, मुझे एफआरएच में उनसे मिलने के लिए बुलाया गया। मेरे पहुंचने पर, अपने निजी कर्मचारियों, सुरक्षाकर्मियों और एक अन्य महिला की मौजूदगी में, उन्होंने मुझसे सीधे तौर पर "2-3 पेटी" की अवैध राशि की माँग की। उन्होंने आगे कहा कि चूँकि उनके निजी सहायक के माध्यम से उनके बार-बार भेजे गए संदेशों पर ध्यान नहीं दिया गया, इसलिए उन्होंने मुझसे व्यक्तिगत रूप से भिड़ने का फैसला किया।

जब मैंने मना कर दिया और दोहराया कि इस तरह की प्रथाओं की अनुमति नहीं है, तो उन्होंने शत्रुतापूर्ण व्यवहार किया। उन्होंने न केवल मेरे लिए, बल्कि मेरे परिवार के लिए भी असंयमित और अपमानजनक भाषा (गाली- गलौज) का प्रयोग किया, और स्पष्ट रूप से धमकी दी कि मुझे देख लेंगी और मुझे जिले से हटवा देंगी। उन्होंने प्रशासन पर अपनी माँगें मनवाने के लिए दबाव बनाने हेतु भोपाल मुख्यालय पर भूख हड़ताल और धरना देने की भी धमकी दी।

यह ध्यान देने योग्य है कि मेरा विभाग माननीय विधायक के निर्वाचन क्षेत्र में नहीं आता। फिर भी, मैं उनके कहने पर बैठक में शामिल हुई, क्योंकि यह वन विश्राम गृह में आयोजित की गई थी और मुझे पूरा विश्वास था कि चर्चा आधिकारिक मामलों से संबंधित होगी। ऐसे निमंत्रण को सीधे तौर पर अस्वीकार करना अहंकार या जनप्रतिनिधि के साथ असहयोग के रूप में आसानी से गलत समझा जा सकता है।

एक प्रभागीय वन अधिकारी होने के नाते, मेरे पास यह मानने के पूरे कारण थे कि वन विश्राम गृह में किसी निर्वाचित प्रतिनिधि के साथ बैठक आधिकारिक मामलों से संबंधित होगी। इसलिए मैंने उचित शिष्टाचार और पेशेवर व्यवहार के साथ इसमें भाग लिया, जिसका दुर्भाग्य से धमकाने और दबाव बनाने के लिए दुरुपयोग किया गया।
ये धमकियाँ और आपत्तिजनक टिप्पणियाँ बाद में एफआरएच के बरामदे में, विभागीय कर्मचारियों की मौजूदगी में, ज़ोर-ज़ोर से दोहराई गईं, जिससे अपमान किया गया। इस घटना के दौरान, उन्होंने बालाघाट के सभी आईएफएस अधिकारियों के लिए अपमानजनक और अभद्र भाषा का प्रयोग किया और पूरी सेवा के खिलाफ व्यापक और अपमानजनक बयान दिए।

बातचीत के दौरान, उनके निजी सहायक ने भी अभद्र व्यवहार किया। जब मैंने उनसे शिष्टाचार बनाए रखने का अनुरोध किया, तो उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वह सिर्फ़ उनके निजी सहायक ही नहीं, बल्कि उनके भतीजे भी हैं। मैंने स्पष्ट कर दिया कि मेरी आधिकारिक बातचीत निर्वाचित प्रतिनिधि के संवैधानिक पद पर रहते हुए थी, उनके दल के सदस्यों के साथ नहीं।

गौरतलब है कि माननीय विधायक ने आक्रामक तेवरों, सुनियोजित मीडिया अभियानों और विधानसभा सहित सार्वजनिक मंचों पर लगाए गए निराधार आरोपों के ज़रिए अधिकारियों पर दबाव बनाने की अपनी छवि बना ली है। ज़िले में अन्य विभागों के अधिकारियों को परेशान करने के ऐसे ही उदाहरण जगज़ाहिर हैं।

इसलिए, यह घटना धमकी, दबाव और वैध सरकारी कामकाज में बाधा डालने का गंभीर प्रयास है।

मैं औपचारिक रूप से यह मामला आपके ध्यान में ला रही हूं तथा सेवा की गरिमा की रक्षा करने, मेरी व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा विभागीय जिम्मेदारियों में आगे आने वाली बाधाओं को रोकने के लिए उचित हस्तक्षेप का अनुरोध करती हूं।

नेहा श्रीवास्तव,
वन मंडल अधिकारी उत्तर बालाघाट संभाग

निज सहायक पर भी धमकाने का आरोप

पत्र के अनुसार, विधायक के निजी सहायक ने भी DFO नेहा श्रीवास्तव से बदसलूकी की। निज सहायक विधायक का भतीजा भी बताया जाता है। जब अधिकारी ने उसे शालीनता बनाए रखने की हिदायत दी, तो स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।



विधायक पर आरोप है कि वह अपने राजनीतिक रसूख का इस्तेमाल दबाव और ब्लैकमेल की रणनीति के लिए करती रही हैं। प्रशासन को डराने के लिए उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर उनकी बातें नहीं मानी गईं, तो वह भोपाल मुख्यालय में धरना और भूख हड़ताल करेंगी।



मामले में 'द सूत्र' ने की मुंजारे के बेटे से बात

'द सूत्र' ने इस मामले में विधायक अनुभा मुंजारे का पक्ष जानने के लिए उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उनसे बात नहीं हो पाई। हालांकि विधायक के बेटे शांतनु ने द सूत्र से कहा, मुझे फिलहाल इस मामले में कोई जानकारी नहीं है, मम्मी से बात करके बताएंगे।



शिकायत झूठी, DFO के पति हैं नशेड़ी

वन विभाग ने बनाई दो सदस्यीय जांच समिति

वनमंडल अधिकारी (DFO) नेहा श्रीवास्तव द्वारा विधायक अनुभा मुंजारे पर रुपए मांगने और धमकी देने के आरोपों के बाद वन विभाग ने इस संवेदनशील मामले की जांच के लिए आधिकारिक समिति गठित कर दी है।



जारी आदेश के मुताबिक, राज्य शासन ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। इनमें अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (APCCF) कमलिका मोहंता (IFoS 1997 बैच) और वन संरक्षक (CF) अंजना सुचिता तिर्की (IFoS 2010 बैच) शामिल हैं।



दोनों अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे अगले दो हफ्तों के भीतर जांच पूरी कर प्रतिवेदन राज्य शासन को सौंपें। वन विभाग ने आदेश में साफ किया है कि जांच निष्पक्ष, तथ्यात्मक और निर्धारित समयसीमा में पूरी की जाएगी।




DFO नेहा श्रीवास्तव ने शिकायत दर्ज कर स्पष्ट मांग की है कि

  • विभागीय और सरकारी मर्यादा से खिलवाड़ बर्दाश्त न किया जाए,
  • उनकी और उनके परिवार की सुरक्षा तुरंत सुनिश्चित की जाए,
  • और भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि द्वारा दबाव व धमकी की गुंजाइश हमेशा के लिए खत्म करने हेतु कठोर कदम उठाए जाएं।

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