महिला आरक्षित सीटों पर बदलेगा कांग्रेस का खेल: अब “परिवार नहीं, कार्यकर्ता” बनेगी प्राथमिकता
News In Short
- महिला आरक्षित सीटों पर अब परिवारवाद नहीं, सक्रिय कार्यकर्ता को मिलेगा टिकट।
- कांग्रेस ने महिला आरक्षण को वास्तविक भागीदारी बनाने का फैसला लिया।
- प्रदेश में संगठन विस्तार और महिला कांग्रेस की सक्रिय भागीदारी पर फोकस।
- हरीश चौधरी ने भाजपा पर महिला आरक्षण का विरोध करने का आरोप लगाया।
- जीतू पटवारी ने परिवार के लिए भी पार्टी में सक्रियता की शर्त रखी।
News In Detail
मध्यप्रदेश कांग्रेस ने महिला राजनीति को लेकर बड़ा और स्पष्ट फैसला लिया है। अब किसी भी चुनाव में महिला आरक्षित सीटों पर नेताओं के परिवार की महिलाओं को टिकट नहीं दिया जाएगा। पार्टी ने साफ कर दिया है कि टिकट सिर्फ उन महिलाओं को मिलेगा, जो संगठन में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।
परिवारवाद पर ब्रेक, कार्यकर्ता को मौका
कांग्रेस की इस रणनीति का मकसद महिला आरक्षण को “वास्तविक भागीदारी” में बदलना है। लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि आरक्षित सीटों पर नेताओं की पत्नी, बहन या बेटी को ही टिकट मिलता है। अब पार्टी इस छवि को बदलने की तैयारी में है।
बैठक में लिया गया बड़ा निर्णय
प्रदेश महिला कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक में यह निर्णय लिया गया। इसमें साफ किया गया कि आगे से टिकट वितरण का आधार सिर्फ संगठन में काम और जमीनी सक्रियता होगा, न कि पारिवारिक पहचान।
हरीश चौधरी का भाजपा पर हमला
बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश प्रभारी महासचिव हरीश चौधरी ने कहा कि महिला आरक्षण का विचार सबसे पहले कांग्रेस ने ही रखा था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भाजपा और अन्य दलों ने समर्थन नहीं दिया। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बुलाया गया विशेष सत्र राजनीतिक मकसद से प्रेरित है और इसका संबंध चुनावी रणनीति से है।
जीतू पटवारी का साफ संदेश
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस फैसले को और सख्ती से लागू करने की बात कही। उन्होंने कहा कि अगर मेरे परिवार की कोई महिला भी चुनाव लड़ना चाहती है, तो उसे पहले महिला कांग्रेस में काम करना होगा।” इस बयान से पार्टी ने साफ संकेत दिया है कि अब टिकट “रिश्तों” नहीं बल्कि “योग्यता और मेहनत” के आधार पर मिलेगा।
संगठन विस्तार पर फोकस
महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बौरासी सेतिया ने संगठन को मजबूत करने का रोडमैप पेश किया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य है—हर बूथ और हर गांव तक महिला कांग्रेस की पहुंच बनाना। साथ ही, राजनीतिक और सामाजिक आंदोलनों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
जिला स्तर पर नई जिम्मेदारियां
बैठक में संगठन को मजबूत करने के लिए कुछ अहम फैसले भी लिए गए। प्रदेश पदाधिकारियों को अलग-अलग जिलों का प्रभारी बनाया जाएगा। हर प्रभारी को महीने में कम से कम 10 दिन अपने जिले में देना होगा। जिला अध्यक्ष के लिए 3 नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। विधानसभा स्तर पर भी महिला कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त होंगे।
मुख्य बातें...
- महिला आरक्षित सीटों पर अब “परिवारवाद” खत्म करने की कोशिश सिर्फ सक्रिय महिला कार्यकर्ताओं को मिलेगा टिकट।
- संगठन विस्तार और जमीनी पकड़ मजबूत करने पर जोर।
- जिला और विधानसभा स्तर पर नई नियुक्तियां होंगी। चुनावी रणनीति में महिलाओं की सीधी भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य।
यह फैसला सिर्फ टिकट वितरण का बदलाव नहीं, बल्कि कांग्रेस की महिला राजनीति को नए ढंग से परिभाषित करने की कोशिश माना जा रहा है। आने वाले चुनावों में इसका असर कितना दिखेगा, यह देखना दिलचस्प होगा।
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