विश्व आदिवासी दिवस पर एमपी में सड़कों पर उतरा समाज, इंदौर से जबलपुर तक जमकर थिरके लोग
रविवार को विश्व आदिवासी दिवस पर मध्यप्रदेश के कई शहरों में बड़ी रैलियां निकलीं। इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर में आदिवासी समाज सड़कों पर उतरा। हजारों युवा पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ नृत्य किया गया। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी भोपाल के सम्मेलन में हिस्सा लिया।
इंदौर में जुलूस का रूट
इंदौर में जुलूस सुबह छह बजे लालबाग परिसर से शुरू हुआ। इसके बाद यह कलेक्टोरेट चौराहा और पलसीकर चौराहा से होकर गुजरा। आगे सोनकर धर्मशाला, सिंधी कॉलोनी और टावर चौराहा से होते हुए भंवरकुआं चौराहे पहुंचा। अंत में जुलूस राजीव गांधी चौराहे पर जाकर समाप्त हुआ।
रैली में शामिल युवाओं के हाथों में झंडे और पारंपरिक वाद्ययंत्र थे। उरांव समाज के लोग धनुष-बाण लेकर नृत्य करते हुए चले। वनांचल के वाद्ययंत्रों की धुन पर युवक-युवतियां लोकगीत गाते नजर आए।
भोपाल में 22 संगठन शामिल
भोपाल में रैली माता मंदिर चौराहे से शुरू हुई। इसमें 22 से अधिक आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए। ढोल-मांदल की थाप के साथ रैली दसहरा मैदान पहुंची। वहां विशाल आदिवासी सम्मेलन आयोजित किया गया।
सम्मेलन में पारंपरिक नृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां हुईं। रंग-बिरंगे परिधानों ने पूरे आयोजन को खास बना दिया। मंच से आदिवासी संस्कृति और गौरव का संदेश दिया गया।
सिंघार का बड़ा बयान
मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष उमंग सिंघार ने सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वे नेता प्रतिपक्ष नहीं, बल्कि समाज के सदस्य के तौर पर आए हैं। सिंघार ने कहा कि प्रदेश में आदिवासी आबादी 22 प्रतिशत से अधिक है। उनके अनुसार, समाज को अब भी उसके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासी पहचान मिटाने की कोशिशें हो रही हैं। सिंघार ने समाज से एकजुट होकर अपनी संस्कृति बचाने की अपील की।
ग्वालियर में डीजे पर धनुष-संधान
ग्वालियर में चल समारोह फूलबाग मैदान से शुरू हुआ। यह रेलवे स्टेशन, गांधी रोड और थाटीपुर से होते हुए अजाक्स कार्यालय पहुंचा। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने समारोह का स्वागत किया।
आदिवासी युवाओं ने डीजे पर पारंपरिक वाद्ययंत्र बजाए। साथ ही धनुष पर तीर संधान का प्रदर्शन भी किया गया। अजाक्स कार्यालय पहुंचकर भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया। दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
समिति सचिव रामेश्वर राम पटेल ने बताया कि यह आयोजन दो संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है।
जबलपुर में हुई देवस्थल पूजा
जबलपुर में सर्व जनजाति सेवा संघ ने धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए। शुरुआत राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद रैली मदन महल किले तक पहुंची।
किला परिसर स्थित साजा वृक्ष के पास धर्मध्वजा फहराई गई। वहां बड़ा देव का गोंगो पाठ और विशेष पूजन हुआ। संघ ने साजा वृक्ष को आदिवासी समाज के लिए देवतुल्य बताया।
आयोजकों ने मांग रखी कि इस दिन को राष्ट्रीय पर्व की तरह अवकाश घोषित किया जाए। उन्होंने समाज से अपनी पहचान और संस्कृति बचाए रखने का आह्वान किया।
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