हेरिटेज ट्री हंट: MP में WWF खोज रहा पुराने पेड़, 30 जून तक करें रजिस्ट्रेशन
समझें क्या है पूरा मामला...
- आपके गांव का पुराना पेड़ बन सकता है हेरिटेज ट्री।
- 50 साल पुराने पेड़ की खोजें और जीतें इनाम।
- WWF ला रहा MP-CG में 'ट्री डिटेक्टिव' बनने का मौका।
- बरगद-पीपल की कहानी अब होगी दुनिया के सामने।
- 30 जून से पहले करें रजिस्ट्रेशन, बिल्कुल मुफ्त है।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इंडिया ने मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में हेरिटेज ट्री हंट प्रतियोगिता शुरू की है। इसमें 50 साल से पुराने पेड़ों की खोज, पहचान और दस्तावेजीकरण किया जाएगा।
प्रतिभागियों को जियो-टैग्ड तस्वीरें और पेड़ से जुड़ी जानकारी जमा करनी होगी। 18 साल से अधिक उम्र का कोई भी नागरिक निःशुल्क भाग ले सकता है। पंजीकरण की आखिरी तारीख 30 जून 2026 है।
आपके घर के पास, खेत के कोने में या मोहल्ले की गली में कोई बूढ़ा बरगद खड़ा है? कोई पीपल जिसकी छाया में पीढ़ियां बड़ी हुई हों? तो यह खबर आपके लिए है।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ ( WWF–World Wildlife Fund ) इंडिया ने एक अनोखी प्रतियोगिता शुरू की है। इसका नाम है हेरिटेज ट्री हंट। यह मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए है। इसमें लोग खुद 'ट्री डिटेक्टिव' बनकर पुराने पेड़ों की खोज करेंगे।
क्या होता है हेरिटेज ट्री?
हर पुराना पेड़ हेरिटेज नहीं होता। इसके लिए दो शर्तें हैं।
पहली शर्त यह है कि पेड़ की उम्र 50 साल या उससे अधिक हो। दूसरी शर्त यह है कि पेड़ के तने का घेरा कम से कम 40 सेंटीमीटर हो।
ऐसे पेड़ सिर्फ हरियाली नहीं होते। वे किसी गांव की यादें, किसी समाज की परंपराएं और किसी क्षेत्र की पहचान होते हैं।
ट्री डिटेक्टिव कैसे बनें?
प्रतियोगिता में हिस्सा लेने के लिए आपको एक हेरिटेज ट्री की पहचान करनी होगी। इसके बाद उसकी तीन जियो-टैग्ड तस्वीरें खींचनी होंगी।
साथ में यह जानकारी भी देनी होगी
पेड़ की प्रजाति क्या है। उसकी अनुमानित उम्र कितनी है। वह किस जगह पर है। तने का घेरा कितना है।
बस इतना काफी नहीं है। आपको अपने मोहल्ले के बुजुर्गों से, गांव के पुराने लोगों से उस पेड़ की कहानियां भी इकट्ठा करनी होंगी। उससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं, लोककथाएं और ऐतिहासिक यादें भी दर्ज करनी होंगी। इन सबके आधार पर उस पेड़ का एक पूरा दस्तावेज तैयार किया जाएगा।
सिर्फ पेड़ नहीं, कहानियां बचाने की कोशिश
यह प्रतियोगिता केवल पेड़ गिनने की कवायद नहीं है। इसका असली मकसद उन कहानियों को सहेजना है जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी मुंह से मुंह तक चलती आई हैं।
किसी पेड़ के नीचे कभी पंचायत बैठती थी। किसी के तले गांव की बेटियां फेरे लेती थीं। किसी को सूखे में जानवरों ने बचाया था। ये कहानियां कहीं लिखी नहीं हैं। लेकिन ये जीवित हैं, लोगों की यादों में। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इन्हें दर्ज करना चाहता है।
कौन ले सकता है हिस्सा?
18 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी भारतीय नागरिक इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकता है। भागीदारी पूरी तरह निःशुल्क है। प्रतियोगिता मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए है।
जरूरी तारीखें
पंजीकरण की आखिरी तारीख 30 जून 2026 है। प्रतियोगिता 1 जुलाई से शुरू होकर 22 जुलाई 2026 तक चलेगी। भागीदारी बिल्कुल मुफ्त है।
नागरिक वैज्ञानिक की भूमिका
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इस प्रतियोगिता के जरिए आम नागरिकों को वैज्ञानिक शोध में शामिल करना चाहता है। इसे 'सिटीजन साइंस' कहा जाता है।
यानी आप कोई वैज्ञानिक नहीं हैं, लेकिन आप विज्ञान के काम में योगदान दे सकते हैं। आप अपने आसपास की प्राकृतिक विरासत को पहचानने और बचाने में मदद कर सकते हैं।
कौन से पेड़ हो सकते हैं हेरिटेज?
बरगद और पीपल तो सबसे आम उदाहरण हैं। लेकिन नीम, आम, खजूर और चिरौंजी के पेड़ भी इस श्रेणी में आ सकते हैं।
शर्त बस यही है कि उनकी उम्र 50 साल से ज्यादा हो और तना काफी मोटा हो। अगर आपके इलाके में ऐसा कोई पेड़ है तो उसकी कहानी दुनिया के सामने लाने का यह शायद पहला मौका है।
FAQ
- हेरिटेज ट्री हंट में कैसे भाग लें?
18 साल या उससे अधिक उम्र का कोई भी नागरिक 30 जून 2026 से पहले मुफ्त रजिस्ट्रेशन करके इस प्रतियोगिता में शामिल हो सकता है। इसके बाद 1 से 22 जुलाई 2026 के बीच पुराने पेड़ की जियो-टैग्ड तस्वीरें और जानकारी जमा करनी होगी। - हेरिटेज ट्री किसे कहते हैं?
जिस पेड़ की उम्र 50 साल या उससे अधिक हो और तने का घेरा कम से कम 40 सेंटीमीटर हो, उसे हेरिटेज ट्री माना जाता है। बरगद, पीपल, नीम, आम, चिरौंजी जैसे देसी पेड़ इस श्रेणी में आ सकते हैं। - यह प्रतियोगिता किन राज्यों के लिए है?
WWF-इंडिया की हेरिटेज ट्री हंट प्रतियोगिता मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए है। भागीदारी निःशुल्क है और इसका मकसद पुराने पेड़ों की पहचान और दस्तावेजीकरण करना है।
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