डिप्रेशन की गिरफ्त में एमपी की युवा पीढ़ी! करियर की अंधी दौड़ और टूटते दिल का दर्द बना कारण

Aman Vaishnav | May 17, 2026, 13:09 IST
youth depression mental health issues india
देश के युवाओं में मानसिक तनाव तेजी से बढ़ रहा है। पढ़ाई का प्रेशर और ब्रेकअप के कारण युवा डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं। मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर की मानसिक आरोग्यशाला से एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है।

आजकल हमारे देश में सिर्फ मौसम का पारा ही नहीं चढ़ रहा, बल्कि हमारे घर के बच्चों और युवाओं के मानसिक तनाव का ग्राफ भी बहुत तेजी से ऊपर जा रहा है। देश का भविष्य कहे जाने वाले हमारे युवा आज अंदर से बुरी तरह टूट रहे हैं और मानसिक उलझनों में फंसे हुए हैं।



मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर की मानसिक आरोग्यशाला से एक चौंकाने वाली हकीकत सामने आई है। यहां के अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या में 20 फीसदी से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।



इस अस्पताल में आने वाले सबसे ज्यादा मरीज 24 साल की उम्र के आसपास के युवा हैं। डॉक्टरों के अनुसार इन युवाओं के डिप्रेशन और एंग्जायटी की वजह हैरान कर देने वाली है।



डॉक्टरों का कहना है कि लव अफेयर का टूटना और प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव इसका सबसे बड़ कारण है। हर दिन अस्पताल आने वाले कुल मरीजों में से 20 प्रतिशत से ज्यादा युवा इन्हीं दो वजहों से परेशान हैं।



हाल ही में NEET परीक्षा कैंसिल होने के बाद देशभर से आत्महत्या के तीन मामले सामने आए हैं। ये यह साफ बताते हैं कि आज का युवा किस कदर मानसिक दबाव में जी रहा है।



youth-depression-mental-health-issues-india


24 की उम्र में अकेलापन और ब्रेक अप

ग्वालियर के अस्पताल पहुंच रहे युवाओं में एक बहुत बड़ी संख्या उन लड़के-लड़कियों की है, जिनकी लव लाइफ में कोई विवाद हुआ या फिर उनका रिश्ता टूट गया। अपने साथी से अलग होने के बाद ये युवा खुद को संभाल नहीं पा रहे हैं। इस अकेलेपन के कारण उनके व्यवहार में कई गंभीर लक्षण देखे जा रहे हैं।



  • हर वक्त चिड़चिड़ापन रहना।
  • लगातार उदास और गुमसुम बने रहना।
  • किसी भी काम में मन न लगना।
  • यहां तक कि खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करना।

चिंता की बात यह है कि ये सब 24 साल के आसपास के युवा हैं। इन्हें अपनी जिंदगी संवारनी थी, लेकिन वे आज अपने माता-पिता के साथ इलाज और काउंसलिंग के लिए डॉक्टरों के चक्कर काट रहे हैं।



youth-depression-mental-health-issues-india


करियर की अंधी दौड़ और पैनिक अटैक

एक तरफ जहां रिश्तों के टूटने का दर्द है। वहीं दूसरी तरफ करियर की ऐसी भागदौड़ है जिसे अंधी दौड़ कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा।



जैसे-जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तारीख नजदीक आती है, छात्रों के बीच पैनिक अटैक और गंभीर एंग्जायटी के मामले बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं।



नींद और भूख पर पड़ रहा असर

दिन-रात पढ़ाई करने का दबाव, परिवार के लोगों की उम्मीदें और परीक्षा में फेल होने का डर युवाओं के मानसिक संतुलन को बिगाड़ रहा है।



इसका सीधा असर उनकी सेहत पर दिख रहा है। युवाओं की रात की नींद उड़ चुकी है और उनकी भूख भी पूरी तरह प्रभावित हो गई है।



outh-depression-mental-health-issues-india


माता-पिता का दबाव

जानकारी के अनुसार अस्पताल की ओपीडी में ऐसे बहुत से छात्र भी आ रहे हैं, जिन्हें माता-पिता के दबाव में आकर अपनी पसंद के खिलाफ जाकर सब्जेक्ट चुनने पड़े हैं।



अपनी मर्जी के बिना पढ़ाई करने का यह आंतरिक दबाव उनके मानसिक तनाव को कई गुना बढ़ा रहा है।



क्या कहते हैं नेशनल और ग्लोबल आंकड़े?

यह समस्या सिर्फ ग्वालियर या मध्य प्रदेश की नहीं है बल्कि पूरे देश की तस्वीर बेहद चिंताजनक है। अलग-अलग रिपोर्ट्स और सर्वे के आंकड़े इस साइलेंट पेंडेमिक यानी अंदर ही अंदर फैलती महामारी की गवाही दे रहे हैं।



देश में ट्रीटमेंट गैप की भयावह स्थिति

हमारे देश में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मानसिक समस्याओं से जूझ रहे 83% से 85% लोगों को सही समय पर सही इलाज या काउंसलिंग मिल ही नहीं पाती है। इसी अंतर को ट्रीटमेंट गैप कहा जाता है।



मेट्रो शहरों और शहरी इलाकों में यह दर 8.1 फीसदी है, जो ग्रामीण इलाकों के मुकाबले बहुत ज्यादा है।



रिपोर्ट्स में सामने आया डरावना सच

NCRB रिपोर्ट 2025 (एक्सीडेंटल डेथ एंड सुसाइड्स इन इंडिया)

भारत में 15-29 साल के युवाओं में सुसाइड के मामले भी बढ रहे हैं। इसका मुख्य कारण परीक्षाओं का दबाव, करियर की चिंता और लव अफेयर या ब्रेकअप के विवाद हैं।



IPSOS ग्लोबल माइंड हेल्थ रिपोर्ट 2024-25

भारत में करीब 31 फीसदी लोग दो हफ्ते या उससे ज्यादा समय से लगातार उदासी, निराशा और डिप्रेशन से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा दुनिया के औसत से बहुत ज्यादा है।



IPSOS रिपोर्ट

भारत दुनिया के उन शीर्ष देशों में शामिल है, जहां लोग काम या पढ़ाई से मानसिक तनाव और डिप्रेशन के कारण सबसे ज्यादा छुट्टियां लेते हैं।



ग्लोबल माइंड हेल्थ प्रोजेक्ट (84 देशों का सर्वे)

18-34 साल के युवाओं के मानसिक सूचकांक के मामले में भारत का स्थान 60वां है। यह दिखाता है कि हमारी युवा पीढ़ी कितनी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है।



UNICEF और NCERT सर्वे (2022)

भारत में हर सात में से एक किशोर (10-19 साल) डिप्रेशन और एंग्जायटी से पीड़ित है। NCERT के सर्वे के अनुसार 43% स्टूडेंट्स पढ़ाई और परीक्षा के कारण गंभीर मूड स्विंग्स और घबराहट का सामना करते हैं।



NIMHANS और टेली मानस (2026)

NIMHANS के अनुसार देश में 85% लोगों में ट्रीटमेंट गैप है। सरकार की टेली मानस हेल्पलाइन के 2026 के आंकड़ों के अनुसार युवाओं में यह समस्या अब बेहद भयावह रूप ले चुकी है।



इंफ्रास्ट्रक्चर और डॉक्टरों की भारी कमी

जब देश में मानसिक बीमारियां इतनी तेजी से बढ़ रही हैं। तब हमारे पास डॉक्टरों की भारी कमी है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के नियम के अनुसार हर एक लाख की आबादी पर कम से कम 1 साइकियाट्रिस्ट होना जरूरी है।



भारत में स्थिति यह है कि यहां प्रति एक लाख की आबादी पर केवल 0.3 से 0.75 साइकियाट्रिस्ट ही उपलब्ध हैं। यह जानकारी खुद स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा 2023-2025 के बीच संसद में दिए गए लिखित जवाबों में सामने आई है।



संकट के समय टेली मानस बना सहारा

इस बढ़ते मानसिक संकट को देखते हुए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई राष्ट्रीय हेल्पलाइन TELE MANAS देश के युवाओं के लिए एक बड़ा सहारा बनी है।



  • इस राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर पर अब तक 28 लाख से ज्यादा कॉल्स आ चुकी हैं।
  • इससे यह साफ पता चलता है कि देश का युवा अब अपनी मानसिक हालत और उलझनों पर खुलकर बात करना चाहता है, उसे बस एक सही सहारे और मदद की तलाश है।

झाड़-फूंक नहीं, इलाज चुनें

ग्वालियर के मानसिक आरोग्यशाला के संचालक डॉ. संजय लहारिया बताते हैं कि आजकल एक बहुत गलत ट्रेंड देखने को मिल रहा है। लोग अपने बच्चों या परिवार के सदस्यों की ऐसी मानसिक स्थिति को देखकर उन्हें डॉक्टर के पास ले जाने के बजाय झाड़-फूंक करवाने लगते हैं। वे बाबाओं और ओझाओं के चक्कर में पड़कर समय बर्बाद करते हैं।



ये खबरें भी पढ़िए...

एमपी में बढ़ रहे बीपी के पेशेंट, हर चौथा व्यक्ति हाई बीपी का शिकार, हार्ट पर पड़ रहा असर



अश्लीलता, भ्रूण हत्या और महिलाओं से अत्याचार में नंबर एक पर एमपी, एनसीआरबी रिपोर्ट में खुलासा



एमपी में आज भी बोझ हैं बेटियां! बच्चों को त्यागने और भ्रूण हत्या के मामले में मध्यप्रदेश नंबर एक पर



MP में हर दिन 90 से ज्यादा महिलाएं बन रहीं अपराध का शिकार, एनसीआरबी की रिपोर्ट में खुलासा



Tags:
  • मध्य प्रदेश
  • ग्वालियर
  • सुसाइड
  • डिप्रेशन
  • ब्रेकअप
  • एंग्जायटी
  • मानसिक तनाव