ममता बनर्जी गुट को एक और झटका, नंदीग्राम उपचुनाव से प्रत्याशी ने शुभेंदु अधिकारी से मिलने के बाद छोड़ा मैदान
समझें क्या है पूरा मामला...
- ममता गुट को नंदीग्राम उपचुनाव में लगा बड़ा झटका, प्रत्याशी ने नाम वापस लिया।
- TMC नाम फ्रीज होने के बाद अब नंदीग्राम में हार का भी डर।
- शुभेंदु से मुलाकात के बाद प्रत्याशी ने चुनावी मैदान छोड़ा।
- शिक्षिका से प्रत्याशी बनीं संचिता ने बड़ा फैसला लिया।
- फलता के बाद नंदीग्राम में भी तृणमूल प्रत्याशी ने खींचे हाथ।
नंदीग्राम उपचुनाव में ममता बनर्जी नीत कालीघाट तृणमूल को बड़ा झटका लगा है। पार्टी की प्रत्याशी संचिता प्रधान दे ने अपना नामांकन वापस ले लिया। यह फैसला चुनाव आयोग द्वारा TMC का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज किए जाने के एक दिन बाद आया है। नाम वापस लेने से पहले संचिता ने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। नंदीग्राम वही सीट है, जहां 2021 में ममता बनर्जी को हार मिली थी।
ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले कालीघाट तृणमूल गुट को 24 घंटे के भीतर एक और बड़ा झटका लगा है। तृणमूल के दोनों गुटों के बीच अधिकार की लड़ाई जारी है। इसी बीच चुनाव आयोग ने पार्टी का नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज कर दिया था। इसके एक दिन बाद ही नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले कालीघाट तृणमूल की प्रत्याशी संचिता प्रधान दे ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया।
नंदीग्राम वही विधानसभा क्षेत्र है, जहां 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस से तत्कालीन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा था। उन्हें उनके पूर्व सहयोगी और तब विपक्ष के नेता रहे शुभेंदु अधिकारी ने हराया था। तब से यह सीट दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक टकराव का केंद्र बनी हुई है।
शुभेंदु अधिकारी से हुई मुलाकात
नाम वापस लेने से ठीक पहले संचिता प्रधान दे ने दोपहर में शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी। संचिता अपने पति के साथ कोलकाता के मैदान इलाके में स्थित पीडब्ल्यूडी टेंट पहुंचीं। वहां उन्होंने शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की।
इस मुलाकात के कुछ ही देर बाद उनके नाम वापस लेने की खबर सामने आई। मुलाकात के बाद उनके हवाले से कहा गया कि वह आशीर्वाद लेने के लिए वहां पहुंची थीं। इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी।
शिक्षक भर्ती मामले से जुड़ा है नाम
नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर लंबे समय से यह चर्चा थी कि क्या ममता बनर्जी खुद इस सीट से चुनाव लड़ेंगी। इसी बीच उनके गुट ने रविवार को संचिता प्रधान दे को प्रत्याशी घोषित किया था। यह घोषणा राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बनी थी।
संचिता नंदीग्राम के बोयाल प्राथमिक विद्यालय में शिक्षिका थीं। शिक्षक भर्ती मामले में 26,000 शिक्षकों की नियुक्तियां रद होने के बाद उनकी नौकरी भी चली गई थी। इसके बाद उन्हें प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर काफी चर्चा हुई थी।
दोनों गुटों को मिले अलग नाम और चिह्न
हाल ही में तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दोनों गुटों के बीच विवाद गहरा गया था। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम और प्रतीक आवंटित किए। ममता बनर्जी के गुट को कालीघाट तृणमूल नाम मिला है।
इस गुट को फुटबाल खिलाड़ी चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं ऋतब्रत बनर्जी गुट को गणतांत्रिक तृणमूल कांग्रेस नाम और खाम चुनाव चिह्न मिला है। ऐसे समय में नंदीग्राम से प्रत्याशी का नाम वापस लेना कालीघाट तृणमूल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
फलता में भी हट गया था प्रत्याशी
इससे पहले कुछ माह पहले राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के बाद एक और घटना हुई थी। दक्षिण 24 परगना जिले की फलता सीट पर पुनर्मतदान से ठीक एक दिन पहले तृणमूल प्रत्याशी जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से हटने की घोषणा की थी। इस घोषणा ने सबको चौंका दिया था।
इसके बाद उस सीट पर भाजपा प्रत्याशी ने रिकार्ड मतों से जीत दर्ज की थी। पहले यह सीट तृणमूल कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी। अब फलता जैसी स्थिति नंदीग्राम में भी बनती दिख रही है, और आगे के घटनाक्रम पर सबकी नजरें टिकी हैं।