‘नागरिकता से पहले मतदाता बनीं सोनिया गांधी’, मदन राठौड़ ने SIR के विरोध पर कांग्रेस को घेरा

Raghvendra Singh Rathore | Oct 06, 2026, 17:25 IST
सोनिया गांधी की नागरिकता और वोटर लिस्ट पर मदन राठौड़ का बयान, SIR को लेकर कांग्रेस पर निशाना
राजस्थान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने सोनिया गांधी की नागरिकता और पुरानी मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि सोनिया गांधी भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता बन गई थीं और इसे “वोट चोरी” बताया। इससे जुड़ा मामला दिल्ली की अदालत में विचाराधीन है और सोनिया गांधी आरोपों को गलत और भ्रामक बता चुकी हैं।

राजस्थान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने सोनिया गांधी की नागरिकता और वोटर लिस्ट को लेकर सवाल उठाए हैं। जयपुर स्थित बीजेपी मुख्यालय में मंगलवार को मदन राठौड़ ने दावा किया कि सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिकता मिलने से पहले ही मतदाता सूची में जुड़ गया था। उन्होंने इसे ‘वोट चोरी’ बताते हुए कहा कि उस समय एसआईआर होती तो उनका नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं होता।



देश में चुनाव आयोग और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर को लेकर विपक्ष के विरोध के बीच मदन राठौड़ का यह बयान सामने आया है। उन्होंने एसआईआर की प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कांग्रेस पर भी निशाना साधा।



मदन राठौड़ बोले- यही वोट चोरी है

मदन राठौड़ ने सोनिया गांधी की नागरिकता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि वह पहले मतदाता बनीं और बाद में देश की नागरिक बनीं। उन्होंने कहा कि एसआईआर के जरिए मतदाता सूची में इसी तरह की गड़बड़ियों को ठीक किया जा रहा है।



मदन राठौड़ ने सवाल उठाया कि कोई व्यक्ति देश का नागरिक बने बिना मतदाता कैसे बन सकता है। उन्होंने कहा कि अगर उस समय एसआईआर की प्रक्रिया होती तो ऐसा नाम वोटर लिस्ट में शामिल नहीं होता।



सोनिया गांधी की नागरिकता को लेकर क्या है विवाद

सोनिया गांधी की नागरिकता और पुरानी वोटर लिस्ट को लेकर यह मामला कानूनी विवाद का विषय भी रहा है। एक शिकायत में आरोप लगाया गया कि उनका नाम 1980 की मतदाता सूची में था, जबकि उन्हें 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता मिली।



सितंबर 2026 में दिल्ली की सेशंस कोर्ट ने पहले के मजिस्ट्रेट आदेश को रद्द कर मामले पर नए सिरे से सुनवाई का रास्ता खोला था। हालांकि, इस आदेश से सोनिया गांधी के खिलाफ वोटर फ्रॉड या फर्जीवाड़े का आरोप साबित नहीं होता है।




सोनिया गांधी ने आरोपों को बताया था गलत

इस मामले में सोनिया गांधी का पक्ष भी सामने आ चुका है। उनकी ओर से कोर्ट में इन आरोपों का विरोध किया गया था। आरोपों को गलत, भ्रामक और अटकलों पर आधारित बताया गया था।



इससे पहले सितंबर 2025 में मजिस्ट्रेट कोर्ट ने एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली शिकायत खारिज कर दी थी। बाद में सितंबर 2026 में सेशन कोर्ट ने मामले को दोबारा विचार के लिए भेज दिया।



SIR के विरोध पर कांग्रेस को घेरा

मदन राठौड़ ने एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के विरोध पर भी सवाल उठाए। राजस्थान बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष ने कहा कि विपक्ष इस मुद्दे पर देश में गलत धारणा पैदा कर रहा है।



उन्होंने कहा कि पहले यह तय होना चाहिए कि मतदाता कौन होगा। मतदाता सूची में पात्र भारतीय नागरिकों का नाम होना चाहिए। मदन राठौड़ ने एसआईआर को वोटर लिस्ट की शुद्धता से जोड़ते हुए विपक्ष से चुनावी प्रक्रिया का सम्मान करने की बात कही।




‘देश के वंशज को मिले वोट का अधिकार’

मदन राठौड़ ने कहा कि जिसकी जड़ें देश में हैं और जो भारत को अपनी मातृभूमि, पितृभूमि और पुण्यभूमि मानता है, उसे मतदान का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने बाहर से भारत आने वाले लोगों को मतदान का अधिकार देने पर सवाल उठाया।



हालांकि, कानूनी रूप से मतदाता बनने की पात्रता केवल ‘वंशज’ होने से तय नहीं होती। भारतीय नागरिकता मतदाता पंजीकरण की प्रमुख शर्तों में शामिल है। सोनिया गांधी से जुड़े विवाद में भी सवाल उनके भारतीय नागरिक बनने और वोटर लिस्ट में नाम दर्ज होने के समय को लेकर उठाया गया है।




राजस्थान में भी SIR को लेकर प्रक्रिया

राजस्थान में एसआईआर के बाद वोटर लिस्ट से छूटे पात्र मतदाताओं को जोड़ने की प्रक्रिया भी चल रही है। राजस्थान में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से छूटे पात्र लोगों को जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की तैयारी है। राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन के अनुसार इसमें पात्र मतदाताओं के साथ युवा और पहली बार वोट देने वाले मतदाताओं पर भी फोकस रहेगा।



Tags:
  • मदन राठौड़
  • सोनिया गांधी
  • चुनाव आयोग
  • BJP
  • SIR
  • बीजेपी
  • दिल्ली
  • एसआईआर
  • नागरिकता
  • सोनिया गांधी की नागरिकता