100 साल पुरानी व्यायामशाला पर भू-माफिया की नजर, फर्जी दस्तावेजों के सहारे कब्जा करने की साजिश
News In Short
- 100 साल पुरानी व्यायामशाला पर भू-माफिया की नजर टिकी।
- फर्जी दस्तावेजों के सहारे इस पर कब्जा करने का प्रयास।
- राजगढ़ पालिका अधिकारियों की मिलीभगत से पट्टा हथियाने की शुरू की प्रक्रिया।
- ओसवाल समुदाय ने दर्ज कराई आपत्ति, दावा—यह सार्वजनिक हेरिटेज संपत्ति।
- नगर पालिका से पट्टा लेने की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त किया जाए।
News In Detail
Churu: राजस्थान में चूरू जिले के राजगढ़ में एक ऐतिहासिक संपत्ति को हड़पने का गंभीर मामला सामने आया है। यह संपत्ति कस्बे की करीब 100 साल पुरानी ओसवाल व्यायामशाला की कीमती भूमि है। इसे अधिकारियों की मिलीभगत से भूमाफिया फर्जी दस्तावेजों के जरिए हथियाने की कोशिश कर रहा है। इस भूमि का स्वामित्व बदले जाने को लेकर तेरापंथी सभा ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर आपत्ति दर्ज कराई है।
क्या है पूरा मामला?
राजगढ़ के नए श्याम मंदिर के सामने स्थित यह व्यायामशाला दशकों से ओसवाल समाज की धरोहर रही है। दस्तावेजों के अनुसार इस भूमि का इतिहास बीकानेर रियासत काल से जुड़ा है। यह जमीन हमेशा से जैन समाज के नियंत्रण में रही हैं। इसका उपयोग सार्वजनिक कार्यों के लिए किया जाता रहा है।
हाल ही में समाज को पता चला कि यहां के एक पूर्व मंत्री के करीबी राधेयश्याम नामक व्यक्ति ने नगर पालिका राजगढ़ में इस भूमि के संबंध में एक पत्रावली जमा कराई है। यह पत्रावली राजस्थान नगर पालिका अधिनियम की धारा 69ए (69A) के तहत पट्टा प्राप्त करने के लिए पेश की गई है। सभा का आरोप है कि यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से फर्जी दस्तावेजों पर आधारित है।
साजिश के गंभीर आरोप
तेरापंथी सभा के मंत्री रामलाल छाजेड़ ने अपनी शिकायत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। पट्टा लेने की प्रक्रिया के दौरान एक छोटे से अखबार में 10-2-2026 को आपत्ति सूचना प्रकाशित करवाई गई। आरोप है कि सादुलपुर में इस अखबार का वितरण न के बराबर है, ताकि स्थानीय लोगों और जैन समाज को इस कार्यवाही की भनक न लग सके।
समाज का दावा है कि यह सारा खेल मिलीभगत से खेला जा रहा है। भू-माफिया ने गुप्त तरीके से पत्रावली तैयार की और आपत्ति दर्ज कराने का मौका तक नहीं दिया। यह जमीन चारों तरफ से 8-8 फुट ऊंची दीवारों से घिरी हुई है। इस पर सभा के ताले लगे हैं। साल 2021 में जब कुछ लोगों ने दीवार तोड़ी थी, तब सभा ने अपने खर्च पर इसकी मरम्मत करवाई थी।
व्यायामशाला का गौरवशाली इतिहास
इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि ओसवाल व्यायामशाला की स्थापना सन् 1932 में वृद्धिचन्द गुरां जी ने स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर की थी। यह भूमि पहले गुरां और विरदी चंद की निजी संपत्ति थी। इसे बाद में उन्होंने समाज के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।
सन् 1936 में यहां श्री ओसवाल स्पोर्टिंग क्लब बना। सन् 1944 में दोनों संस्थाओं का विलय कर इसे ओसवाल व्यायामशाला स्पोर्टिंग क्लब नाम दिया गया। यहां व्यायाम, खेलकूद और जन-सेवा के तीन प्रमुख विभाग संचालित थे।
उम्मेद मालू बताते हैं कि करीब 5000 वर्गगज में बना यह व्यायामशाल शुरुआत से ही ओसवाल समाज की संपत्ति रही है। इसके चारों तरफ 8—8 फुट उंची चारदीवारी बनी है। भीतरी भाग में पुराना और कुंड है। हमारे पक्ष में इस भूमि का बीकानेर रियासतकाल का पट्टा है। लेकिन पालिका प्रशासन एक भाजपा नेता के दबाव में इस संपत्ति का स्वामित्व बदला जा रहा है। यह संपत्ति आज करीबी 25 करोड़ रुपए की है।
प्रशासन को दी गई चेतावनी
जैन समाज के एक पदाधिकारी ने बताया कि उन्होंने 18 मार्च 2026 को नगर पालिका राजगढ़, एसडीएम और मुख्यमंत्री राजस्थान को स्पीड पोस्ट के जरिए ज्ञापन भेजे हैं। इसके बाद 24 मार्च 2026 को जिला कलेक्टर चूरू को भी आपत्ति पत्र सौंपा गया है।
सभा की मुख्य मांगें
राधेयश्याम द्वारा पेश की गई पत्रावली संख्या 2539 को तत्काल निरस्त किया जाए। फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो। ऐतिहासिक सार्वजनिक संपत्ति को निजी हाथों में जाने से बचाया जाए।
राजगढ़ के नागरिक रमेश का कहना है कि जिस व्यायामशाला ने कभी राजगढ़ के युवाओं को खेल और सेवा के संस्कार दिए, आज वह भू-माफिया के चंगुल में फंसती नजर आ रही है।
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