पानी भरी खदानों के नाम पर 2 हजार से ज्यादा ई-रवन्ना जारी, खनिज विभाग के रिकॉर्ड पर उठे सवाल
रिकॉर्ड के मुताबिक, यहां 1 से 25 अक्टूबर के बीच पत्थर ले जाने के लिए दो हजार से अधिक ई-रवन्ना (e-Ravanna) जारी किए गए और इनके जरिए करीब 6 हजार टन पत्थर निकालकर खुले बाजार में बेच दिया गया।
पड़ताल में खुला बड़ा फर्जीवाड़ा
जब इस पूरे खनन क्षेत्र का जायजा लिया और मामले की गहराई से पड़ताल की, तो चौंकाने वाला सच सामने आया। पड़ताल में यह स्पष्ट हुआ कि पानी से भरी खदानों के नाम पर धड़ल्ले से ई-रवन्ना काटे जा रहे हैं।
इन फर्जी रवन्नाओं की आड़ में सरकारी और वन विभाग (Department of Forest) की जमीनों पर अवैध रूप से खनन किया जा रहा है। इसके साथ ही अवैध रूप से निकाले गए पत्थरों को वैध बताकर बाजार में बेचा जा रहा है।
जब वहां से गुजर रहे डंपर और ट्रैक्टरों के नंबरों की जांच की गई, तो उनके नाम पर भी रवन्ना जारी होना पाया गया। जबकि हकीकत यह थी कि जिन खदानों के नाम रवन्ना में दर्ज थे, वे पूरी तरह पानी में डूबी हुई थीं। टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और एक-एक वाहन से पत्थरों के सौदे की सच्चाई भी सामने लाई।
क्या है ई-रवन्ना?
ई-रवन्ना (e-Ravanna) एक कंप्यूटराइज्ड या ऑनलाइन ट्रांजिट पास (परिवहन पर्ची) है, जिसका उपयोग राज्य सरकारों द्वारा खनिजों (जैसे रेत, बजरी, पत्थर, कोयला आदि) की ढुलाई और अवैध खनन को रोकने के लिए किया जाता है।
यह कैसे काम करता है?
• ऑनलाइन पंजीकरण: खनन पट्टाधारक या व्यवसायी को विभाग की वेबसाइट पर अपना पंजीकरण कराना होता है।
• विवरण दर्ज करना: खनिज ले जाने से पहले कंप्यूटर या पोर्टल पर यह जानकारी दर्ज की जाती है कि वाहन में कितना खनिज भरा जा रहा है, वह कहां से ले जाया जा रहा है और कहां (किस स्थान पर) पहुंचाया जाएगा।
• ई-रवन्ना जारी होना: पूरी जानकारी दर्ज होने के बाद एक ऑनलाइन पर्ची (ई-रवन्ना या ई-ट्रांजिट पास) जारी होती है, जिसे चालक अपने मोबाइल में रख सकता है या उसका प्रिंट ले सकता है।
इन लीजों पर कटे सबसे ज्यादा रवन्ना
- आनंद सिंह (93 रवन्ना): इस नाम की लीज में पानी भरा हुआ है और वहां खनन असंभव है। इसके बावजूद 1 से 25 अक्टूबर के बीच 93 ई-रवन्ना काटकर अवैध खनन का माल बाजार में बेचा गया।
- पलायथा एसोसिएट (68 रवन्ना): इस लीज क्षेत्र में पिछले तीन महीने से पानी भरा हुआ है, फिर भी 1 से 25 अक्टूबर की सुबह 9 बजे तक 68 रवन्ना जारी कर दिए गए।
- हारुन रसीद (82 रवन्ना): इस खदान में भी पूरा पानी भरा होने के बावजूद 4 से 25 अक्टूबर के बीच ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के लिए 82 रवन्ना काटकर पत्थर बाजार में भेजे गए।
अधिकारियों का पक्ष
जब इस पूरे मामले को लेकर खनिज विभाग के अधिकारियों से बात की गई, तो एमई (कोटा) रामनिवास मंगल ने हैरानी जताते हुए कहा, "नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं हो सकता है। अगर ऐसा हो रहा है तो वह गलत हो रहा है। आप मुझे इसकी जानकारी दीजिए, मैं अभी माइनिंग की टीम को मौके पर भेजकर जांच करवाता हूं।"